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पड़ोसन राधिका आंटी की चुदाई-1

पड़ोसन राधिका आंटी की चुदाई-1

हैल्लो, दोस्तों
मेरा नाम अमन है, मैं और मेरा परिवार बिलासपुर में रहता है। आज मैं आप लोगो से मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना शेयर करने जा रहा हूं। मेरे पड़ोस में एक फैमिली रहती है, जिनसे हमारे घरेलू संबंध अच्छे है, वो लोग मेरे परिवार से मिल जुलकर रहते है।
उनके परिवार में 3 लोग हैं। आंटी, अंकल और उनका एक 16 साल का बेटा भी है। अंकल रेलवे में इंजीनियर है लेकिन उनकी पोस्टिंग दूसरे शहर में थी। वो सिर्फ वीकेंड पर ही आते थे।

आंटी का नाम राधिका है वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी दिखने वाली एक सूंदर औरत है।

ये घटना मेरे और आंटी के बीच ही हुई थी, हम दोनों में से किसी को भी ये अंदाज नही था, की जिंदगी में कभी हमारे बीच कभी ऐसा हो सकता है, वैसे तो मेरी नियत उनके ऊपर हमेशा से खराब थी ही लेकिन कभी मैंने ये जाहिर नही होने दिया। वो जब भी मेरे घर आती थी, या जब भी मैं उनको देखता तो मैं उनकी बड़ी बड़ी चुचियाँ और उनकी साड़ी में थिरकती गांड को ताड़ता रहता था,

राधिका आंटी दिखने में जवान और सेक्सी है। उनके बूब्स काफ़ी बड़े बड़े हैं। उनकी गांड का तो क्या कहना जब वो चलती है। तो उनकी मटकती उछलती बड़ी गांड के दोनों हिस्से साड़ी के ऊपर से मालूम पड़ते और कभी कभी तो पीछे से उनकी साड़ी के ऊपर से ही उनकी चड्डी की लाइन्स उनकी गांड पर साफ झलकती है। उनकी चड्डी का आकार उनकी गांड को और निखार देता है। और ये सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो जाता था। अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ।

आंटी का बेटा बहुत ही गलत संगत में पड़ गया था। जिससे उसकी शैतानी बढ़ गयी थी और वो बहुत ही ज्यादा बदमासी करने लगा था। वो अपनी मां से हमेशा पैसे माँगता और झगड़ा करता था। और आंटी उससे छोटा बचा समझ कर उसके ज़िद के सामने हारकर उसकी हर बात को मान लेती थी। उस लड़के को अपने पिता का भी डर नहीं था।

एक दिन की बात है वो अपनी मां से किसी बात को लेकर झगड़ रहा था। और धमकी दे रहा था की वो घर छोड़ कर चला जाएगा। उसके बाद वो घर से निकल गया। आंटी को लगा की ऐसे ही मजाक में बोल रहा होगा। लेकिन दोपहर से शाम और शाम से रात हो गई थी, वो अभी तक घर नहीं आया था।

आंटी बहुत टेंशन में थी और डर के मारे वो अपने पति से ये सब माजरा नहीं बता रही थी।
मैं आप लोगो को बता दूं की आंटी और अंकल की आपस में उनके बेटे की वजह से बहुत झगड़े होते थे, और उनके पति बड़े गुस्सेल आदमी थे। मैंने उन दोनों को कई बार आपस मे झगड़ा करते हुए देखा था।

तभी एक पहचान वाले एक अंकल का फोन राधिका आंटी के फ़ोन पर आया उन्होनें ने कहा कि आकाश को कोलकाता की ट्रेन पर चढ़ते हुए देखा था। इससे पहले की वो उसे रोकते ट्रेन चल पड़ी थी। आंटी के बेटे का नाम आकाश है।
उसके साथ 2 लड़के और थे, जो उस उम्र में बड़े थे। इतना सुनते ही घबराहट में आंटी तूरंत घर से निकली और मेरे घर आई और किसी को उनके साथ चलने के लिए पूछने लगी।

वो दरवाज़े के पास खड़ी होकर मेरी माँ से बात ही कर रही थी कि मैं उनकी आवाज सुनकर बाहर आया तो मैं मेरी माँ ने मुझे आंटी के साथ जाने को कहा और आंटी ने भी आग्रह किया। मैंने तुरंत कपड़े बदले और मैं और राधिका आंटी स्टेशन के लिए निकल गए। और हमने कोलकत्ता की अगली ट्रेन पकड़ी।

आंटी एक दम बौखलाहट में थी, उनके आंखों से आँसू रुक ही नही रहे थे। वो मेरे बगल में बैठी रोये जा रही थी, मैं उनको चुप करा रहा था और उनको हिम्मत दे रहा था, रो – रो कर उनका हाल बुरा हो चुका था। उनके शरीर में जैसे बेचैनी हो रही थी। उनको होश ही नही था कि उनकी साड़ी बाल बिखरे हुए थे, मैं उनको चुप करवा रहा था, वो अपनी साड़ी के पल्लू से अपने आँसुओ को पोंछ रही थी।

जिससे गहरे गले वाले ब्लाउज में उनकी बड़ी बड़ी चुचियों के उभार और चुचियों के बीच की सीधी और गहरी रेखा साफ दिख रही थी, उनके ब्लाउज का गला इतना नीचे था, की उनकी काली ब्रा तक दिखाई दे रही थी, मैं ये सब देख पा रहा था पर उस वक़्त माहौल ऐसा था। की मेरे मन मे कुछ गलत खयाल नही आये।

पर सामने की सीट पर बैठा एक आदमी राधिका आंटी की चुचियों की तरफ ही देखे जा रहा था। उसकी नज़र आंटी की बूब्स की क्लेवेजस में अटकी हुई थी। वो अपनी नज़रो से आंटी की सेक्सी चुचियों को नापे जा रहा था। जब मेरी नज़र उस आदमी की तरफ पड़ी तो मैंने देखा वो आंटी को बुरी नज़रो से देख रहा था। तो मैंने आंटी के हाथ से उनका पल्लू लिया और उनके बूब्स को ढक दिया। उनके बूब्स ढकने के क्रम में आंटी के बूब्स के गोले मेरे हाथों से छू गए। काफी नर्म नरम बूब्स थे। अभी तक आंटी ने इस बात पर धयान नही दिया।

वो अभी सूझ बूझ में नही थी, आधी रात हो चुकी थी। आंटी मेरे कांधे पर सर रख कर सो रही थी। तभी मेरी नज़र उनके बूब्स पर गई उनका पल्लू उनके सीने पर से थोड़ा सरक गया था। उनके बूब्स को देख मेरी नियत बिगड़ने लगी मैं चोरी निगाहों से उनकी बूब्स को देखने लगा। आंटी की बूब्स साफ दिख रही थी। उनकी मस्त गोरे बूब्स देख कर मैं बेचैन हो रहा था। आंटी के बूब्स का नज़ारा देखकर मेरे पैंट में हलचल मच गई थी।

मैंने देखा हमारे सामने की शीट पर जो लोग बैठे थे, वो लोग भी नींद में सो रहे थे। तभी मैंने हिम्मत करके धीरे से राधिका आंटी का पल्लू थोड़ा सा और खिस्काया। अब मैं ऊपर से आंटी का आधा से जादा स्तन देख पा रहा था, वह्ह्ह क्या चुचिया थी। उनकी ब्रा भी थोड़ी सरक चुकी थी। जिससे मुझे उनके बूब्स के निप्पलों वाले काले घेरे दिखने लगे। मैं उतेजित होने लगा।

उनके ऊपर काली ब्रा काफ़ी सूट कर रही थी। मैं उनकी बड़ी बड़ी चुचियो को घुर रहा था। फिर हिम्मत करके मैंने अपना हाथ उनके सीने पर रख दिया और और अपनी एक उँगली को उनके बूब्स के दरार के बीच पहुँचा दिया। और मैं भी सोने का नाटक करने लगा और उनकी चुचियो को हलका हलका टच भी कर रहा था।
क्या मुलायम चुचिया थी। मैं बीच बीच में उनकी चुचिया दबा भी दे रहा था।

फिर मैंने हिम्मत की और अपने उस हाथ को उनकी ब्रा के अंदर घुसा दिया और चुपचाप सोने का नाटक करने लगा। ताकि अगर वो जाग भी जाये तो लगे की निंद में मेरा हाथ उनके ब्लाउज में चला गया है।

अब मेरी उंगलियों से उनका निप्पल टच होने लगा उनका निप्पल किसी सॉफ्ट रबर के गरम बड़े दाने जैसा महसूस हो रहा था। उनका निप्पल मेरी उँगली पर गरमाहट छोड़ रही थी, मैं कुछ समय का अंतराल लेकर उनके निप्पल को अपनी उंगलियों से रगड़ता और मजे लेता और मैं हौले हौले से उनके बूब को भी दबा दे रहा था। राधिका आंटी की चूची बहुत मुलायम और रबर के गेंद की तरह दब रही थी।

मेरे लंड का हाल बुरा हो चुका था, जैसे अभी राधिका आंटी की चुत में गोता लगा दे। पर अगल बगल काफी लोग थे, और आगे कुछ करना गलत होता ऐसे ही मैं भोर के 3 बजे तक उनकी चूची को मसलता और छूता रहा आखिर में मेरे लंड ने मेरी पैंट में ही पिचकारी मार दी और मैं झड़ गया।

मैंने रात भर आंटी के बूब्स के मज़े लेता रहा सुबह सुबह हम कोलकता पहुँच गये। वहाँ बहुत तेज़ बारिश हो रही थी, और तूफान भी काफी तेज था। राधिका आंटी के चेहरे पर उदासी साफ झलक रही थी। हमने पहले पूरा स्टेशन छान मार आकाश कही नही मिला आंटी ने कहा चलो बाहर जाकर खोजते है।

बारिश बहुत तेज़ थी लेकिन हम आकाश को खोजने बाहर निकल पड़े सुबह से दोपहर हो चुकी थी लेकिन आकाश कहीं नही दिख रहा था। बहुत भूख लगी थी और आंटी ने भी कुछ नही खाया था। तो मैंने आंटी को कहा चलो आओ पहले कुछ खा लो, आंटी दिनभर रो रही थी, हमने होटल में जाकर खाना खाया आंटी के चेहरे पर मायूसी छाई थी। हम फिर होटल से बाहर निकलकर आकाश को खोजने लगे।

सुबह से बारिश में घूमने की वजह से हम पूरी तरह भीग चुके थे। ठंढ भी लग रही थी। तभी अचानक आंटी ने जोर से चिल्लाई आकाश और दौड़ पड़ी मैं उनको भागता देख मैं उनके पीछे भागा तो देखा कि आकाश रोड के किनारे खड़ा था। आंटी ने उसे गले से लगाया और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। मुझे भी बहुत खुशी हुई। आंटी भी अब खुश थी।

हम आकाश को लेकर घर जाने के लिए जब स्टेशन पहुँचे तो पता चला कि भारी बारिश की वजह से सारी ट्रेनें रद्द हो चुकी है। क्योंकि पटरियाँ पानी में डूब चुकी थी। इसलिए सारी ट्रेन बंद हो चुकी थी। मैं और आंटी सुबह से भीग रहे थे। हमारे कपड़ो से पानी टपक रहा था।

ट्रेनें बंद होने की वजह से हमारा दिमाग काम नही कर रहा था कि हम घर कैसे पहुँचे। तभी मैंने आंटी को कहा कि आंटी कितनी देर स्टेशन में रहेंगे कही लॉज का पता करते है। आंटी को भी ये सही लगा और उन्हीने कहा यही ठीक रहेगा चलो। लेकिन आंटी को अभी भी अपने पति का डर था, कि उनको ये सब मालूम न चल जाये, वो जल्द से घर जाना चाहती थी।

हम बाहर निकल कर लॉज ढूंढने लगे हम पूरे गीले हो चुके थे, आंटी की साड़ी गीली होने की वजह से उनके ब्रा और पैंटी के शेप साफ दिख रहे थे। जिसे देख मेरे लंड में हलचल हो रही थी, वो एकदम मस्त माल लग रही थी। कुछ देर बाद हमे स्टेशन के पास ही एक लॉज मिल गया। जिसमें दो कमरे और एक हॉल था। हमने लॉज ले लिया।

आकाश भी गिला हो चुका था। तो आंटी ने उसे नहलाकर एक कमरे में भेज दिया हम अभी भी गीले खड़े थे। आंटी ने कहा कि हम भी गीले है गीले कपड़ो में रहने से तबियत खराब हो सकती है। लेकिन हमारे पास कपड़े भी तो नही है। एक ही टॉवल थी जो आकाश पहन के सो गया है। फिर उन्होंने कहा कि अगर कुछ कपड़ो का जुगाड़ हो जाये तो

मैंने कहा कि रुकिए मैं लॉज वालो से पूछता हूँ। मैं जाकर दो टॉवल ले आया लॉज वालो के पास और कोई कपड़े नही थे। एक टॉवल लेकर आंटी नहाने चली गयी। कुछ देर में आंटी नहाकर बाहर आ गयी जब मेरी नजर उनपर पड़ी तो मेरी आँखें खुली की खुली रह गयी। आंटी ने अपने बदन पर सिर्फ टॉवल लपेट रखा था। जो उनके चुचियों पर बंधा उनके घुटनो के ऊपर उनकी जांघो तक ही आ रहा था। मुझे उनकी गोरी मोटी आधी जाँघे दिख रही थी।

वो थोड़ी शर्माती हुई पर कपड़े की दिक्कत थी और करती भी क्या मेरे पास आई और बोली तुम भी नहा लो। मैं भी नहाने चला गया और आंटी के अभी वाले और ट्रेन वाले सीन को याद करता हुआ अपने लंड को मुठियाने लगा। और आंटी को चोदते हुए कल्पना करने लगा जिससे मेरा लंड जल्दी झड़ गया। मैं जब नहा कर बाहर आया तो आंटी हॉल में फ़ोन पर तेज़ आवाज में बहस कर रही थी।

उनका उनके पति के साथ झगड़ा चल रहा था शायद उनके पति को ये सारी बातें पता चल गई थी कि आकाश घर से भाग गया था। उनके पति उनको गालियां दे रहे थे। जिससे आंटी रोते हुए बात कर रह रही थी। मुझे देख आंटी ने फ़ोन काट दिया और सोफे पर बैठकर रोने लगी। मैंने पूछा कि क्या हुआ तो वो रोने लगी मैंने उनको चुप होने को कहा और बोला धीर आकाश दूसरे कमरे में सो रहा है

तो धीमे आवाज में रोने लगी उनको रोता देख मैं उनके बगल में बैठ गया और उनके कंधे पर हाथ रख उनको चुप कराने लगा। और अपने हाथ उनके गालो पर रखते हुए मैं उनके आँसू पोंछने लगा।

आंटी ने मेरे कंधे पर सर रख दिया और अपनी किस्मत को कोसते हुए रोने लगी मैं उनकी पीठ सहलाने लगा। उन्होंने कहा एक तुम हो जो इस मुश्किल समय में मेरा साथ दे रहे हो और एक मेरा पति है जो मुझे गालियां और धमकी दे रहा है। मैंने आंटी को कहा ऐसे पति को छोड़ क्यों नही देती तो वो बोली ऐसा कैसे??? आकाश का क्या होगा । फिर मैंने उनको हँसाने के लिए कहा कि आप रोती हुई बहुत बदसूरत लगती हो तो वो थोड़ी मुस्कान के साथ हस दी।

फिर आंटी ने कहा कि मेरे पति ने धमकी दी है कि वो मुझे पिटेंगे अभी भी वो भावुक हो रही थी। मैं उनको हिम्मत देने के लिए उनकी पीठ को सहलाता हुआ उनको चुप करा रहा था। और आंटी ने अपना सर अब मेरे सीने पर रखा हुआ था मेरा एक हाथ उनकी जांघ पर था। मैं उनकी पीठ और जांघ को सहला कर उनकी हिम्मत बढ़ रहा था। पर मेरे मन मे कुछ और ही घर कर चुका था।

आंटी को मेरा उनकी जांघ को छुना थोड़ा भी अजीब नही लग रहा था आंटी उस वक़्त भावनाओं में बह रही थी। मैं उनकी मस्त मुलायम जांघ को सहलाये जा रहा था। मेरा तो मन कर रहा था कि अभी अपना हाथ उनकी टॉवल के अंदर करके अपनी उंगलियों को उनकी चुत में पेल दू।

पर तभी आंटी उठकर खड़ी हो गई और बोली देखो मेरे पति ने क्या किया है मेरे साथ। मैंने देखा उनकी कंधे के पास पीठ पर चोट के निसान थे। जिसपर अब तक मैंने गौर नही किया था, मुझे ये देखा कर उनके लिए काफ़ी बुरा लग रहा था। उनके पति को ऐसी सूंदर औरत की कोई कदर नहीं थी। मैंने उठ कर उनकी पीठ सहलाई। और कहा कि इतना सब कैसे सहन करती हो।

फिर मैंने झट से उन अपने गले से लगा लिया। मैंने उनके मन के दुख को कम करने के लिए एक जादू की झप्पी दे दी। वो भी बिना कोई संकोच दिखाए मेरे सीने से लिपट कर खड़ी हो गयी। इतना तो पक्का था, की आंटी मेरे साथ कंफर्ट महसूस कर रही थी।

फिर हम दोनों सोफे के अगल अलग कोने में बैठकर बातें करने लगे। और पता ही नही चला कि कब मेरी आँख लग गयी। जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि आंटी सोफे पर आराम से लेटी हुई है और उनके पैर मेरी तरफ थे। आंटी का टॉवल थोड़ा ऊपर चढ़ चुका था। जिससे मुझे उनकी गांड की उभारे और चिकनी चुत साफ नजर आ रही थी,

वो नज़ारा देखते ही मेरा लंड टनक गया और टॉवल के बाहर आ गया। आंटी की चूतड मेरी तरफ थी, मैं उनके नंगे गांड और चुत को देखकर हड़बड़ा सा गया। फिर मैंने एक तरकीब लगाई मैं भी उनके पीछे से सट कर उनकी गांड में अपना लंड सटाकर लेट गया। और अपने टॉवल की गया गाँठ खोल दी। जिससे मैं पूरा नंगा होकर आंटी के पीछे लेट गया।

फिर मैंने आंटी की टॉवल की गांठ खोल दी और उनको भी पूरा नंगा कर दिया अब मैंने उनकी गांड के ऊपर से भी टॉवल हटा दी। फिर मैं धीरे-धीरे उनकी जांघो को सहलाने लगा। मेरा लंड एकदम कड़क हो चुका था। मेरा लंड उनकी गांड में चुभ रहा था। पर वो अभी एकदम मस्ती में सोई हुई थी। फिर मैंने अपनी उंगलियों से उनकी चुत टटोलनी शुरू की और मेरा उँगली उनकी चुत की दोनों भागों के बीच पहुँच गयी

मेरी उँगली उनकी चुत के दोनों भागो के बीच से होती हुई चुत के दाने तक आ गयी ऐसा लग रहा था कि उनकी चुत से गर्म भाप निकल रही हो, मैंने उनके चुत के दाने क्लिटोरियोस को दबाया और थोड़ा फील लिया। उनकी चुत का दाना गोल और थोड़ा बड़ा था। यानी उनके चुत के बाहर निकला हुआ था। मेरा लंड तड़प रहा था, फिर मैंने उनके चूतड के एक हिस्से को सहलाते हुए अपनी उंगलियों को चूतड़ों के बीच ले गया और राधिका आंटी के चूतड के एक हिस्से को उठाते हुए फैला लिया ताकि पीछे से उनकी चुत में लंड आसानी से घुस सके।

मैं आंटी के चूतड के एक हिस्से को उठाये हुए था। जिससे उनकी चुत भी फैल गयी थी, और उनकी चुत का छेद थोड़ा सा खुल गया। मैंने दूसरे हाथ से अपना लंड पकड़ा और धीरे से अपना लंड आंटी की चुत के छेद पर लगाया। मेरा लंड का सूपड़ा आराम से उनकी चुत के छेद में समा गया। फिर मैंने अपना हाथ अपने लंड से हटाया और अपने एक जांघ को उनके एक जांघ पर रख दिया। और अपने लंड को उनकी चुत में दबाने लगा।

मेरा लंड मोटा लंड आधा अंदर हो गया। कुछ देर तक मैंने ऐसे ही मज़े लिए और फिर मैंने अपना आधा लंड ही अंदर बाहर करने लगा। क्योंकि मेरा लंड थोड़ा मोटा और लंबा था। जिसकी वजह से अंदर नही जा पा रहा था। ज्यादा जबरदस्ती घुसाने से आंटी जाग जाती। मैं वैसे ही लंड को उनकी चुत में अंदर बाहर कर चोदने लगा। मेरे लंड पर उनकी चुत का पानी लग चुका था। जिससे लंड चिपचिपा हो गया था। और फिसलन होने की वजह से मुझे ज़ोर नही लगाना पड़ रहा था।

अचानक पता नही मुझे क्या हुआ कि मैं काबू से बाहर होने लगा उनकी चुत और बदन की गर्मी ने मेरा सारा सब्र तोड़ दिया। मैंने आंटी को थोड़ा टेड़ा किया और उनकी गांड पे सवार हो गया। मैं कसकर अपने लंड को उनकी चुत में हुमचने लगा। जिससे लंड घप्प से पूरा उनकी चुत में घुस गया। और मैंने 2-3 ज़ोरदार शॉर्ट्स लगाए ही थे। की आंटी की नींद खुल गयी।

उन्होंने मुझे धकेलकर सोफे से नीचे गिरा दिया और खुद सीधी होकर सोफे पर बैठ गयी। वो अपने आप को और मुझे बिल्कुल नंगा देखकर शॉक्ड हो गयी। और अपनी चुचियों और अपने हाथों से और अपने पैरों को सिकोड़कर अपनी चुत को छिपाने लगी। वो मेरी तरफ गुस्से से देख रही थी। साथ ही मेरे खड़े काले मोटे लंड को भी घूर रही थी। जिसपर उनकी चुत का सफेद धात लगा हुआ था। उन्होंने मुझे गुस्से से कहा ये क्या कर रहे थे। तुम मेरी नींद का फायदा उठाया तुमने!!

मैंने कहा कि आपका पति आपको खुश नही रख सकता इसलिए मैंने सोचा आपको थोड़ा सा सुख दे दूं। तो उन्होंने गुस्से में कहा तो तुम क्या मुझे चोद दोंगे???? मेरे पति की जगह लोगे किसने तुम्हे ये हक दिया। वो मुझे बहुत सुनाने लगी। पर मैं मेरे खड़े लंड को देख बस उनको चोदने के फिराक में था।

फिर मैंने झट से आंटी के दोनों टाँगों को पकड़ा और खींच कर सीधा करके सोफे पर लिटा दिया और मैं भी उनके ऊपर चढ़कर लेट गया।वो मुझे धकेलने लगी पर मैं किसी सांढ़ की तरह उनके ऊपर जम गया फिर मैंने उनके हाथों को उनकी चुचियों पर से हटाया और उनके सर के पास ऊपर करके जकड़ लिया। अब उनकी बड़ी बड़ी चुचियाँ मेरे आंखों के सामने थी। आंटी बार बार मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी।

जिससे उनकी चुचियाँ इधर उधर उछल रही थी। और उनकी उछलती चुचियों बहुत सेक्सी लग रही थी। मैं उनको छटपटाते हुए देख मज़े ले रहा था। मैं उनकी बड़ी बड़ी चुचियों के काले काले निप्पलों को लालच की नज़रो से देखते हुए उनकी चुचियों पर टूट पड़ा और किसी भूखे जानवर की तरह मैं उनके निप्पलों को चबाने लगा। जैसे ही मैंने उनके निप्पलों को चूसना चालू किया। आंटी सिसकने लगी वो रोती हुई मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी।

मैं उनकी चुचियों को चूसता मसलता रहा करीब आधे घंटे तक मैंने उनके दोनों चुचियों को जानवरों की तरह पीता रहा, उनकी निपल्लो को दांतों से चबाता, काटता रहा और चुचियों को किसी गेंद की तरह मसलता रहा मसल मसल कर मैंने उनकी चुचियों को लाल कर दिया था। ऐसा लग रहा था मानो अब खून आ जाये।

मेरा लंड भी अब पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो चुका था। ये सब आंटी की चुचियों की देन थी। उनकी चुचियों को पीते हुए मैं उत्तेजित हो गया था। कि काला लंड किसी मोटे मूसल की तरह हो चुका था। मैं आंटी के ऊपर चिपक कर लेटा हुआ था। उनकी टाँगे मेरी टाँगों से दबी हुई सीधी थी। फिर मैंने उसकी दोनों टाँगों को उनकी जांघो से पकड़ा और खींचकर उनकी दोनों टाँगों को अपनी कमर के दोनों तरफ कर दिया।

जिससे मैं उनकी दोनों टाँगों के बीच मे आ गया। आंटी अभी भी सिसक कर मेरा विरोध कर रही थी। मैं उनके ऊपर लेटकर ही अपने लंड को उनकी चुत पर रगड़कर अंदर डालने की कोशिश करने लगा पर लंड बार बार इधर उधर मुड़ जा रहा था। आंटी रों रही थी और मेरे सीने पर अपने हाथ रखकर मुझे धकेलने की कोशिश कर रही थी। पर मैं आंटी के ऊपर जम कर लेटा हुआ था और अपने शरीर का सारा भार आंटी के ऊपर डाल रखा था।

मैं उनके ऊपर लेटे हुए ही लंड को बार बार उनकी चुत में डालने की कोशिश कर रहा था। पर लंड सही जगह पर जा ही नही रह था। जिससे मुझे गुस्सा आ रहा था। फिर मैंने अपने शरीर को थोड़ा ऊपर उठाया और अपने लंड को देखते हुए आंटी के चुत के छेद पर लगाने लगा। आंटी ने भी अब मेरा लंड देख लिया और मेरे काले लंड के साइज को देखकर रोने चीख़ने लगी।

पर मैंने उनकी चुत की छेद पर अपना लंड जमा दिया और अपने लंड को उनकी चुत में धकेलते हुए उनके ऊपर लेट गया। आंटी दर्द के मारे चीख़ने चिल्लाने लगी। उनके आंखों से आँसू बहने लगे। मेरा लंड की मोटाई की वजह से उनकी चुत में दर्द हो रहा था। जिस वजह से न चाहते हुए भी उन्होंने अपनी दोनों और फैला दी जिससे उनकी चुत फैल जाए और उनको ज्यादा दर्द न हो।

इधर मैं अपनी रफ्तार बढ़ाने लगा था। आंटी रो गिड़गिड़ा रही थी और चुत चुदने के दर्द से आ..आ..आह..आ.आह किये जा रही थी। पर उस वक़्त उनकी वो आवाजें मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी। वो मेरी कमर को पकड़ के पीछे धकेलने में लगी थी। ताकि उनकी चुत में काम झटके लगे पर मैं अपना लंड खींच-खींच कर उनकी चुत में मार रहा था। मैं जानवरों की तरह उनकी चुत में अपना लंड घुसेड़ रहा था

मैंने थोड़ी रफ्तार और बढ़ा दी अब आंटी की सांसे फूलने लगी और वो बिलकने लगी वो मुझे छोड़ने के लिए कहने लगी पर मैं जमकर उनकी चुत को चोदता रहा जिससे उनकी आवाजें और भी तेज हो गयी मैंने उसकी आवाजो को दबाने के लिए उनके होठों को किस करने लगा और एक हाथ से उनकी चूची को दबाने लगा।

कुछ देर तक आंटी को मैं वैसे ही चोदता रहा। उनके होठों को किस करने, और उनकी चूची को दबाते हुए, मैंने चोदने की रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी। अब मैं आराम से उनकी चुत में लंड डालने लगा। जिससे अब उनको दर्द नही हो रहा था। न ही वो अब चिल्ला रही थी। वो सांत पड़ी मेरे नीचे लेटकर अपनी चुत चुदवा रही थी, कुछ देर बाद उन्होंने अपना हाथ मेरी पीठ पर रखा और मेरी पीठ सहलाने लगी।

मैं भी समझ गया कि अब ये मेरा साथ दे रही है। भले ही मैंने आंटी को इनकी मर्ज़ी के खिलाफ चोदा था, मगर इनकी नौटंकी आखिर कितने देर चलती आखिर वो भी तो एक औरत है। शायद वो चरम सुख पर आ चुकी थी, इसीलिए वो अब मेरा विरोध नही कर रही थी, मेरा लंड लगातार उनकी चुत के अंदर बाहर हो रहा था, अब मेरा काला लंड उनके चुत के पानी से गिला होकर चमक रहा था, उनकी चुत से फच्च फच्च की आवाज आ रही थी,

घुसते हुए लंड की रफ्तार के साथ फच्च फच्च की आवाज और तेज़ होने लगी अचानक आंटी ने आहआह आह आ…. करते हुए मुझे जकड़ कर अपने सीने पर दबा लिया। और अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर लंड को अपनी चुत में और अंदर तक घुसवा लिया। आंटी ने मेरी कमर को इतनी जोर से अपनी टाँगों से जकड़ा था कि मैं हिल भी नही पा रहा था। कुछ पलों बाद उनकी चुत के अंदर मेरे लंड पर कुछ गरम गीला-गीला से महसूस हुआ।

जो बाद में बुलबुला बनकर उनके चुत से बाहर आने लगा तब आंटी ने मेरी कमर पर से अपने पैर हटा लिए मैं समझ गया कि अब ये झड़ गयी है अब मुझे भी जल्दी जल्दी करना होगा वरना ये फिर से नखरें दिखाने लगेगी। मैंने भी सटासट लंड को आंटी की चुत के अंदर बाहर दौड़ाने लगा। अभी भी आंटी रह रह कर झड़ रही थी। वो अपनी चुत के दोनों पट्टो को अपनी उंगलियों से फैलाकर अपने चुत के दाने को रगड़ रही थी।

कुछ ही झटकों में मैं भी झड़ गया और सारा गर्म माल उनकी चुत में ही छोड़ दिया। जैसे ही मेरे लंड का पानी उनकी चुत में गया मैं थक कर निढाल हो गया था रात भर मैंने आंटी की चुदाई की थी, तब उन्होंने मुझे दूर झटक दिया और तुरंत दौड़ती हुई बाथरूम में गयी और अपना माथा पकड़कर रोने लगी। और रोती हुई अपनी चुत में से उँगली डालकर मेरे वीर्य को बाहर निकालने लगी और अपनी चुत को धोने लगी। सुबह के 5 बज चुके थे, रात भर मैंने आंटी की चुत की ठुकाई की थी, मैं बहुत थक गया था पर मैं खड़ा होकर सब देख रहा था।

मैं समझ गया कि उन्होंने मेरा साथ इसलिए दिया था, की उस वक़्त वो अपने चरम सिमा पर थी, और उनके शरीर पर उनका कोई काबू नही था, आखिर कोई भी औरत कितनी देर विरोध कर सकती है जब उसके चुत में लंड अंदर बाहर हो रहा हो, चाहे चोदने वाला कोई भी हो, अगले दिन भी हमलोग घर के लिए नही निकले सके क्योंकि अभी भी मौसम खराब ही था, और अभी तक ट्रेने चालू नही हुई थी। अगले दिन की कहानी अगले भाग पड़ोसन राधिका आंटी की चुदाई -2 में पढ़े।