नींद में सोती हुई सीमा की माँ की चुदाई

ये बात तब की है जब मैंने सीमा दो दिन पहले चोदा था, अगर आपने सीमा की चुदाई वाली कहानी नही पढ़ी है तो अभी पढ़े- सीमा की पैंटी, सीमा और मेरी चुदाई वाली घटना को दो दिन बीत चुके थे। और अब तो सीमा मुझसे पट भी चुकी थी। लेकिन मेरे और सीमा के बीच दुबारा चुदाई का खेल हो उससे पहले ये घटना घट गयी।

दोस्तों, कहते है ना जब मिलता है तो छप्पर फाड़ के मिलता है। दो दिन पहले मैं चुत चोदने को तरसता था। लेकिन एक घटना के बाद तो मुझे सीमा की चुत मिलीं ही मिली दूसरी घटना में मुझे उसकी माँ की चुत भी चोदने को मिली।

मतलब एक ही घर की दो औरतों को मैंने उन दो दिनों में चोदा मैंने बेटी की सील तोड़ी तो तोड़ी ही उसकी माँ की चुत को भी मैंने चोद चोदकर तार-तार कर दिया।

आपको एक बात बता दु की सीमा की माँ की तबियत हमेशा खराब रहती है। यानी कि शरीर में कोई दिक्कत नही है। लेकिन दिमाग से थोड़ी कमज़ोर है। लेकिन बात चीत में आपको समझ नही आएगा कि वो बीमार है। सीमा की माँ का इलाज कई सालों से चल रहा था। वो काफी हद तक ठीक भी हो चुकी थी।

लेकिन तबियत खराब होने की वजह से नाही तो सीमा के पापा और नाही सीमा तक अपनी माँ से सही से बात व्यहार करते थे। वो उसे पागल समझ कर हर बात पर उसे सुनाया करते थे। जहाँ तक मुझे पता था कि सीमा के पापा सीमा की माँ के साथ सोते भी नही थे।

सीमा की माँ कभी कभार उटपटांग हरकतें या बातें करने लगती थी। सीमा की माँ भी ज्यादा किसी से बात नही किया करती थी। बस एक मेरी माँ को छोड़कर सभी से काम भर बात किया करती थी।

उस वक़्त गर्मियों के दिन चल रहे थे, हम रात का खान खा कर सोने की तैयारी में ही थे। की लाइट चली गयी कुछ ही देर में सारा शरीर पसीने से भींग गया। माँ ने कहा कि चलो आज छत पर ही सो जाते है। पापा की तो नाईट शिफ्ट ड्यूटी थी। तो मैं मेरी माँ अपना अलग अलग बिस्तर लेकर छत पर चले गए।

छत पर पहुंच कर देखा तो सीमा और उसके मम्मी, पापा सभी अगल अलग बिस्तर पर अकेले ही पहले से लेटे हुए थे, हम माँ बेटे ने भी एक कोने पर बिस्तर लगाया और हम भी दोनों अगल अलग बिस्तर पर लेट गए। सीमा मुझे छत पर देखकर खुसी में इशारे कर रही थी पर सभी लोगों के होने के कारण हम कुछ नही कर सकते थे।

मैं चुपचाप सोने की कोशिश करने लगा और पता ही नही चला कि कब मुझे नींद लग गयी। मैं सीमा की चुदाई के सपनों में खो गया नींद में ही मैं सीमा को चोदने लगा नींद में ही मुझे चूड़ियों के खनखंनाने की आवाज सुनाई दी कुछ देर बाद चूड़ियों के खनखंनाने की आवाज और तेज़ हो गयी।

चूड़ियों के आवाज से मेरी नींद खुल गयी। पहले तो मैंने अगल बगल देखा तो मुझे न माँ दिखी न ही उनका बिस्तर मैं उठकर बिस्तर पर बैठ गया। अभी भी मुझे चूड़ियों की आवाज आ रही थी। फिर मैंने सीमा के परिवार वाले जिधर सोए थे उधर देखा तो न सीमा दिखी न ही उसके पापा उसके आगे जो मैंने देखा वो देखकर मैं सदमे में आ गया।

देखा सीमा की माँ की ही अपनी चूड़ियां बज रही थी। छत पर मैं और सिर्फ सीमा की माँ ही थे। बाकी के लोग शायद लाइट आने पर नीचे चले गए थे। खंखानाने की आवाज सीमा के माँ के चूड़ियों से ही आ रही थी। मैं जब उठकर सीमा की माँ के तरफ गया तो मैंने जो देखा मैं वो देखकर दंग रह गया।

सीमा की माँ की नाइटी ऊपर उठी हुई थी। और सीमा की माँ नींद मे बड़बड़ाते हुए अपनी चुत में उंगली किये जा रही थी। और अपनी टाँगो को फैला फैलाकर अपनी उँगलियों को अपनी चुत में और अंदर डालने की कोशिश कर रही थी। पर वो अभी नींद में ही थी

वो अपनी चुत में उंगली डालकर अहह… उम्म..उम्म…..अहह…ऊई ई ई… किये जा रही थी। मुझे कुछ समझ नही आ रहा था। कि मैं क्या करूँ? मैं तुरंत ही सीढ़ियों वाले रूम के दरवाजे के पास गया।

सोचा कि दरवाजे को बंद कर देता हूँ। ताकि कोई उन्हें ऐसी हालत में देख न ले लेकिन जब मैं दरवाज़े के पास पहुँचा तो देखा कि दरवाज़ा किसी ने पहले से ही सटा दिया था। मैं समझ गया कि सब छत से बहुत पहले ही चले गए है। और घोड़े बेचकर सो रहे होंगे।

तो मेरे मन मे एक ख्याल आया कि क्यों न इस मौके का फायदा उठाया जाए वैसे भी सीमा का बाप कई सालों से सीमा की माँ को चोद नही रह था। इसलिए वो गहरी नींद में भी ऐसी हरकतें कर रही है।

तब मैंने छत वाला दरवाजा छत के ऊपर से ही बंद कर दिया। ताकि कोई ऊपर नही आ सके। फिर मैं सीमा के माँ के पास पहुँचा अब वो बिलकुल सांत होकर अधनंगी पड़ी थी। वो गहरी नींद में थी शायद दवाइयों का भी असर होगा। वो बाई करवट लेकर सोई हुई थी।

उनके बड़े बड़े काले गांड मुझे साफ दिख रहे थे। मैं चुप से उनके गांड के पीछे बैठ गया और उनके गांड की बनावट को बड़े गौर से निहारने लगा। उनकी गांड देखते ही मेरा लंड टाइट होने लगा। भला लंड को उम्र से क्या करना था। ये तो किसी भी उम्र की छेद को चोदने के लिए तैयार था। वो बस मुझे एक औरत दिख रही थी। जो अपने खुले गांड से मेरे लंड को न्योता दे रही थी।

चांदनी रात थी तो सब कुछ साफ साफ दिख रहा था। मैंने बैठे बैठे ही उनके चूतड़ों के बीच दबे गांड की छेद को उंगली लगाकर टटोलने लगा। उनकी गांड की दरार पसीने से भरी हुई थी। आखिर मेरी उँगलियों को उनकी गांड की छेद मिल गयी जो पूरी तरह झाँटो की गिरफ्त में थी।

शायद उन्होंने अपनी चुत और गांड के बाल साफ नही किये थे। फिर मुझे पता नही क्या हुआ कि मैंने बैठे बैठे ही अपनी पैंट से अपने लंड को बाहर निकाला और सीमा की माँ की गांड में अपना लंड हर तरफ चुभोने लगा।

वाह!! क्या गुदगुदी गांड थी। जहाँ लंड दबाओ वहीँ मेरा लंड उनकी रुई जैसी कोमल गांड में धस जाती उनकी मांस से भरी बड़ी गांड देखकर मेरा मन ललचाया जा रहा था। तो मैंने झट से अपनी पैंट उतार दी और नंगा होकर सीमा की माँ के पास उनकी गांड से लंड सटा कर लेट गया।

कुछ देर बाद मैंने अपनी हरकतें शुरू कर दी। मैं एक हाथ से सीमा की माँ की गांड के एक हिस्से को उठाया और अपना लंड उनकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा। पर इतनी आसानी से मेरा लंड सीमा की माँ की गांड में कैसे जाता भला। पर मेरा लंड उनकी गांड की छेद को टच कर गया। मेरा जोश और बढ़ गया। मैं मानों संभोग विलास में लिप्त हो चुका था।

मेरे अंदर का सारा डर निकल चुका था। मैंने तो ये भी सोच लिया था कि अगर वो हल्ला करेगी तब भी मैं आज उनको चोदूगा। फिर मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और बिल्कुल नंगा हो गया। और सीमा की माँ की गांड की तरफ मुँह करके लेट गया। मैंने अपने हाथों बसे सीमा की माँ की गांड के दोनों हिस्सो को अलग कर दिया और उनकी गांड की दरार में अपना चेहरा घुसा कर उनकी गांड को चाटने लगा।

मैं निडर होकर सीमा की माँ की गांड की दरार में अपनी जीभ फेरते हुए उनकी गांड चाट रहा था। सीमा की माँ को अब मैंने पेट के बल लेटा दिया था। और उनकी दोनों टाँगों को फैलाकर चौड़ा कर दिया था ताकि मुझे उनकी गांड चाटने में आसानी हो अब मेरा मुँह सीमा की माँ की गांड के बीच और मेरे दोनों हाथ उनकी गांड के दोनों हिस्सों पर थे। मैं उनकी गांड चाटने के साथ साथ उनके गांड को भी मसल और सहला रहा था।

कुछ देर बाद मैंने अपनी जीभ को सीमा की माँ के गांड की छेद के ऊपर गोल-गोल फिराने लगा। क्या गजब का एहसास था यारों।। मैं अपने आप को रोक नही पा रहा था। मेरे थोड़ी देर जीभ फिराने के बाद सीमा की माँ की गांड की छेद भी सिकुड़ने खुलने लगी। यानी कि वो नींद में भी गरम हो रही थी। सीमा की माँ की गांड मेरे जीभ से निकले थूक से लबालब हो चुकी थी।

फिर मैं अपना चेहरा और जीभ सीमा की माँ की गांड की छेद से नीचे की ओर लाता हुआ उनकी बूर तक पहुंच गया। उनके पेट के बल लेटे होने के कारण उनकी बूर तो साफ दिख नही रही थी। पर बूर की छेद और थोड़ी सी बूर की पंखुड़िया बाहर की तरफ निकली हुई थी। फिर क्या मैंने अपनी जीभ को सीमा की माँ की बूर पर रगड़ने लगा।

मैंने अपनी जीभ के अगले हिस्से से उनकी बूर को सहलाने लगा साँस लेने की वजह से उनकी बूर ऊपर नीचे को हो रही थी। तो मैंने ऐसा मौका कैसे छोड़ देता जैसे ही उन्होंने साँस ली तो उनकी बूर थोड़ी ऊपर उठी मैंने झट से अपनी जीभ को उनकी बूर में घुसा दिया। फिर मैंने अपनी जीभ से उनकी बूर में ही ऊपर-नीचे, आगे-पीछे करके उनकी बूर को अपनी जीभ से चोदने लगा।

अब मैंने सोचा कि ज्यादा चाट चूट करने से रात इसी में बीत जाएगी तो मैंने सीमा की माँ को चोदने का फैसला किया। उनकी नाइटी तो पहले से पेट तक उठी ही हुई थी। मैंने उनकी नाइटी के सारे हूक को खोल दिया। और धीरे-धीरे करके मैंने उनकी नाइटी उतार दी।

नाइटी उतारते ही सीमा की माँ की बड़ी बड़ी चुचियाँ इधर उधर उछल गयी। मैंने उनकी चुचियों को कुछ देर मसला और पीने लगा। उनकी वो मस्त मुलायम चुचियाँ मेरे हाथों में नही समा रही थी। फिर मैंने उनकी चुचियों के साथ ज्यादा ज़ोर जबरदस्ती नही की वरना कहीं वो जाग जाती।

फिर मैंने उनको सीधा लिटा दिया और उनके टाँगों को मोड़कर फैला दिये। फिर मैं भी उनके टाँगों के बीच बैठकर अपना लंड उनकी बूर में सेट कर दिया। फिर मैंने उनकी दोनों टाँगों को अपने कंधो पर रख लिया। और आराम से आगे की तरफ झुककर अपना लंड सीमा की माँ की बूर में उतारने लगा। धीरे धीरे मेरा लंड उनकी झांटो की आड़ में खो गया।

मेरा करीब 8″ लंबा लंड उनकी बूर में पूरा जड़ तक समा चुका था। अब मेरी कमर सीधे उनकी बूर की झांटो तक सट चुकी थी। मेरे मुँह से हा हा ह की आवाज आने लगी अब मैं उनकी गरम बूर में अपने लौड़े को महसूस करने लगा था। अब उनकी बूर में धक्के मारने का सही समय आ चुका था। तो मैंने अपना चेहरा सीमा की माँ के चेहरे के बगल तकिये पर टिका दिया।

और उनकी टाँगे जो मेरे दोनों कंधो पर थी उनको पकड़ कर अपनी कमर हवा में उठा ली और एक ही धक्के में अपना पूरा लंड उनकी बूर में पेल दिया। उनकी बूर में मेरा लंड घुस रहा था और उनकी बूर से हवा फररर फररर करती हुई बाहर आ रही थी। मैं शुरू में आधे लंड से ही उनकी बूर चोद रहा था। ताकि हमारे शरीर टकराये नही और न ही कोई आवाज हो पर थोड़ी देर बाद मेरा लंड और सख्त हो गया।

मुझे और ज्यादा जोश चढ़ गया तो मैंने अनजाने में अपनी धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी। और कस कस के अपनी कमर को उनकी पैरों के बीच उनकी बूर पर दबाने लगा। अब लंड तेज़ी के साथ उनकी बूर में अंदर बाहर होने लगा। मैंने उनको कस के जकड़ लिया ताकि अगर वो जाग भी जाये तो मेरी पकड़ से न छुटे अगर वो अब जान भी जाएगी तो मैं आज उन्हें बिना चोदे छोड़ने वाला नही था।

फिर एक छोटा सा विराम लेने के बाद मैंने सीमा की माँ की टाँगों को अच्छे से अपने कंधों पर रख कर थोड़ा आगे की तरफ सरक गया। अब सीमा की माँ के घुटने उनके कंधो तक पहुच रहे थे। और उनकी गांड हवा में उठकर उनकी बूर ठीक मेरे लंड के पोजीशन में आ चुकी थी।

मैंने अपना लंड जो कि सीमा की माँ की बूर में घुसा हुआ था। उसे निकाल कर उनकी नाइटी से अपने लंड और उनकी बूर को साफ कर दिया। और फिर से अपना लंड उनकी बूर में घुसाने लगा। जब पूरा लंड अंदर चला गया तो मैंने फिर एक बार अपनी कमर को पीछे खींच कर कसकर धक्का मारा पूरा लंड एक बार मे ही सीमा की माँ की बूर में उतार दिया।

उस धक्के से सीमा की माँ जग गयी इससे पहले की वो कुछ समझ पाती मैंने उनके होंठो को अपने होठों में भर लिया। और ज़ोर ज़ोर से उनकी बूर चोदने लगा। वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी। वो मेरी गर्दन में अपना हाथ डालकर मुझे अपने ऊपर से धकेल रही थी। पर मैंने अपने धक्के चालू रखे और जमकर उनकी बूर में लंड पेलता रहा।

पूरे छत पर फच..फच फ़चाक..फच.. की आवाज आने लगी। सीमा की माँ उह..उह.. ऊह …आह उम.. उम.. न.. अ.. आ ..आ.. कर मिमियाने लगी। पर मैं बूर चोदने में व्यस्त था बस मुझे उनकी जाँघों पर मेरी कमर टकराने की ठाप.. ठाप… ठप..ठप.. और उनकी गीली बूर से निकलती हवा की आवाज सुनाई पड़ रही थी।

थोड़ी देर में सीमा की माँ की बूर ढीली पड़ने लगी साथ ही वो भी ढीली पड़ने लगी वो अब पूरी तरह से काबू में थी। बस तेज़ झटकों से उह.. आह… उह.. आह कर रही थी। अब वो मुझे रोक नही रही थी। पर मैं अभी भी उनकी गांड हवा में उठा कर उनकी बूर में अपने लंड की बरसात किये जा रहा था।

जब मैंने अपने कमर की तरफ अपने लंड को देखा तो मेरे लंड और झांटो पर ढेर सारा वीर्य लगा हुआ था। सीमा की माँ की झांटो पर भी बहुत वीर्य लगा हुआ था। उनकी बूर वीर्य से पूरी तरह चपचापा गयी थी। मगर अभी तक मैं झड़ा भी नही था। इतना सारा वीर्य उनकी ही बूर से निकाल था। शायद काफी दिनों बाद चुद रही थी।

इतने में ही मैं भी अपनी चरम सीमा तक आ गया। मैंने चुदाई की रफ्तार बढ़ा दी और लंबे लंबे झटकों से सीमा की माँ की बूर को चोदने लगा। आखिर में मैंने सीमा की माँ के पैर छोड़ दिये और निढाल होकल उनके ऊपर ही लेट गया। मेरा सारा वीर्य तेज़ धार के साथ उनकी बूर में निकल गया।

फिर मैं उनके ऊपर लेटे हुए उनकी चुचियों को चूमे जा रहा था। मैं बारी बारी उनकी दोनों निप्पलों को पीने लगा। उनकी चुचियाँ पहले से ज्यादा सख्त और बड़ी लग रही थी। शायद चुदाई में उत्तेजित होने के कारण उनकी चुचियों में ये बदलाव आ गए थे। मैं बार बार अपना लंड फिर से उनकी बूर पर रगड़ रहा था। ताकि वो फिर से चुदाई के लिए तैयार हो जाये।

पर वो कोई हरकत नही कर रही थी। न ही वो मुझे मना कर रही थी न ही वो मुँह से कुछ बोल रही थी। बस एक टक मुझे देख रही थी। मैं फिर से उनके पैरों के बीच घुटनों के बल बैठ गया और फिर से उनकी दोनों टाँगों को फैला दिया। पर इस बार मुझे उनकी गांड मारने में दिलचस्पी थी। तो मैंने इसबार अपना लंड उनकी गांड की छेद पर लगाकर धक्का मारा।

सीमा की माँ आहस्स…उ..हह.. करने लगी। फिर मैंने लंड पर थूक लगा कर उनकी गांड की छेद पर रखा। और उनके ऊपर लेटकर उनके हाथों को अपने हाथों में फसा कर एक धक्का मार जिससे लंड का सूपड़ा उनकी गांड में घुस गया। पर उस पोजीशन में मैं सही से धक्का नही मार पा रहा था। मैंने सीमा की माँ को आधा लंड उनकी गांड में घुसाए उठाया।

और अपनी गोद में बिठा लिया। पर उन्हें दर्द हो रहा था। और अभी तक लंड सही से गांड में अंदर घुसा भी नही था। फिर मैंने उन्हें थोड़ा ऊपर करके उनकी गांड से लंड बाहर निकाला और ढेर सारे थूक से अपने लंड को लपेट दिया। फिर सीमा की माँ की गांड की छेद पर लंड रखकर उन्हें बैठने को कहा।

वो डरते हुए अपनी गांड नीचे कर रही थी। जैसे ही गांड पर लंड का निशाना लगा मैंने सीमा की माँ को जकड़ लिया और पहले से ही उनके होंठो को अपनी होठो के गिरफ्त में कर लिया। और एक ज़ोरदार धक्का मारते हुए पूरा लंड एक बार मे ही उनकीं गांड में भर दिया।

वो दर्द से उफ्फ… उम …आन्ह… उह… उह आन्ह हम्म..नहह… कर रोने लगी। पर मैं नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर अपनी गोद में बिठा कर सीमा की माँ की गांड मारने लगा थोड़ी देर बाद उनका दर्द कर हो चुका था। वो भी अपनी ओर से मेरा साथ दे रही थी। मैं भी उनको अपनी गोद मे उछाल उछाल कर उनकी गांड मारते हुए उनकी चुचियों की चुसाइ कर रहा था।

थोड़ी देर में ही सीमा की माँ की गांड की छेद फैल गयी और मेरे लंड को अंदर तक गांड में लेने लगी। 20 मिनट सीमा की माँ की गांड चोदने के बाद मैं उनकी गांड में ही झड़ गया। अब तक मैंने सीमा की माँ की दोनों छेद मे अपना वीर्य से भर चुका था। मैंने भी पहले बेटी और बाद में उसकी माँ को जी भर चोदा था। मैं अब पक्का मर्द बन चुका था।

मुझे अब अपनी चुदाई करने की कला पर नाज़ हो चुका था। कुँवारी तो कुँवारी। मैंने इस आधी अधेड़ उम्र की औरत (सीमा की माँ) को भी अपने मोटे लौड़े से चोद-चोदकर उनकी कराहें निकाल दी। उसके बाद मैं उठकर अपने बिस्तर पर लौट आया। सीमा की माँ कुछ देर वैसे ही नंगी बैठी रही फिर अपनी बूर और गांड को साफ करके कपड़े पहन कर सो गई।

कैसी लगी दोस्तों मेरी और सीमा की माँ की चुदाई की ये कहानी मैंने रात भर सीमा की माँ को चोदा ऐसी चुदाई की सीमा की माँ की तबियत हरी कर दी। उम्मीद करता हूँ कि आप लोंगो को ये कहानी पसंद आई हो।

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