नौकरानी आंटी की रातभर ठुकाई

हैलो दोस्तों,
मेरा नाम अमन है और मैं अपनी एक और कहानी
आप लोगो से शेयर कर रहा हूं। मैं बिलासपुर का
रहने वाला हुं। मेरी हाइट 5.9″ मैं लंबी कद काठी वाला थोड़ा एवरेज दिखने वाला लड़का हूँ। मैं कॉमर्स का स्टूडेंट हूं। मेरी फैमिली में 4 लोग हैं मम्मी, पापा, और एक छोटा भाई है।

हम एक मिडिल क्लास फैमिली के दायरे में आते हैं। हमारे घर मे
एक आंटी है। जो करीब 10-12 साल से हमारे यहां काम करती है। उनका नाम रचना है। उनके ससुराल वालो ने उन्हें घर से निकला दिया था। क्योंकि वो कभी मां नहीं बन सकती थी।

किसी तरह वो हमारे यहाँ काम खोजती हुए पहुंच गई थी। तब से वो हमारे घर में हमलोगो के साथ वह रहती है।

उनकी उम्र 40 साल के लगभग होगी। उनका बदन काफ़ी गठिला है। इस उम्र में भी वो क्या माल लगती थी। आस पास के लड़के और बूढ़े भी उनके बारे में गंदी-गंदी बातें करते थे। उन्हें अफ़सोस होता कि ये औरत काश उनके घर में काम करती।
उनके शरीर की बनावट देखकर कोई भी आन्ह भर मदहोश हो जाता है। मेरे पड़ोसी भी उन्हे वासना की नज़र से देखते हैं।

उनकी चुचियाँ इतनी बड़ी बड़ी है की एक हाथ में नहीं आएगी। जब वो चलती है तो लोग उनकी बड़ी गांड को देखते हैं। मतलब ऐसा था कि अगर वो हामी भरती तो पूरा मोहल्ला उनको चोदने को तैयार था। बात उस समय की है जब मेरे मामा के बेटे की शादी थी। मम्मी, पापा और भाई मामा के घर चले गए। मैं नहीं जा सका क्यू की मेरा 12वीं का फाइनल एग्जाम चल रहा था।

तो मैं और रचना आंटी घर पर अकेले रह गए। 2 दिन में मेरा पेपर खतम हो गया अब मैं जायदा टाइम घर पर ही रहता था। घर पर मैं जब बोर हो जाता था तो मैं रचना आंटी की घर के काम में मदद कर देता था जिससे उनको थोड़ा आराम मिल जाता था।

एक दिन की बात है मैं जब बाहर से घूम कर घर आया तो देखा कि बॉथरूम का दरवाजा बंद था। मैं समझ गया कि आंटी बाथरूम में नहा रही है। पर उनको पता नही था की मैं घर आ चुका हूँ। जब मैं बाथरूम के बहार चुप चाप गया तो दंग रह गया बाथरूम से आजीब आवाजे आ रही थी। फिर मैंने छुपकर चुपके से कीहोल से जब झाँक बॉथरूम में देखा तो मैं दंग रह गया।

आंटी अपने चुत में उंगली कर रही थी और। आआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ऊउउउह्ह्ह्ह्ह की आवाजें निकाल रही थी. उनकी चुत पर काले घने बाल थे। ऐसा लग रहा था कि उन्होंने अपनी झांटो को बहुत दिनों से साफ नहीं किया हो।

आंटी बेफिक्र होकर लगातार अपनी चूत में उंगली कर रही थी। थोड़ी देर में उनका पानी निकल गया और वो हांफती हुई टाँगे फैलाकर दीवार से अपनी पीठ सटा कर बैठ गई और अपने चुत के निकलते पानी को अपनी चुत पर उंगलियों से लपेटते हुए सिसक सिसक कर रोने लगी।

आंटी की टाँगे फैले होने से उनकी चुत साफ साफ दिखाई दे रही थी। शायद वो अपने शादी टूटने के बाद ऐसे ही अपनी चुदाई की आग सांत करती थी। और शायद अपने पति या फिर चुदाई के लिए रो रही थी।

वो अपनी चुत में उंगली डालकर अपने शरीर की आग को शांत कर रही थी। पूरी तरह झड़ने के बाद आंटी नहाने लगी। फिर मैं वहाँ से रूम में आकार बैठकर टीवी देखने लगा। मेरे दीमाग में अब भी आंटी की चुत का सीन आ रहा था। मेरा लंड खड़ा हो चुका था। उसे अब आंटी की चुत चाहिए थी। थोडी देर में आंटी नाह कर आ गयी।

वो मुझे देखकर थोड़ा चौंक गयीं और पूछा कि तुम कब आये मैंने कहा बस अभी आया हूँ। फिर उन्होंने मुझसे खाना खाने को पूछा मैंने हाँ कहा।।

थोड़ी देर बाद वो हम दोनों का खाना लेकर आयी। फिर हम दोनो एक साथ खाना खाने बैठ गए। वो मेरे सामने बैठकर खाना खा रही थी। मैं उनकी चुचियों को घुरे जा रहा था। क्या मस्त गोरी-गोरी बड़ी चुचियाँ थी उनकी उन्होंने ब्रा नहीं पहनी थी। जिनसे उनकी चुचियाँ ब्लाउज के गले से साफ दिख रही थी।

उनके निपल्स के दाने भी ब्लाउज पर उभरे हुए थे मन कर रहा था की अभी उनकी ब्लाउज को फाड़ कर उनके बड़ी बड़ी दूध को चूसने लग जाऊ। पर मैंने खुद को समझाते हुए अपने आप को शांत कर लिया।

अगले दिन जब रचना आंटी नहाने गई तो मैंने देखा की पहले आंटी ड्रॉर में कुछ खोज रही थी। उसके बाद आंटी वहा से अपनी मुट्ठी में कुछ छुपाये कुछ ले गई। तो मैंने जल्दी से ड्रॉर खोल कर देखा तो उसमे सेविंग ब्लेड की डिब्बी दिखाई दी। जिसमे से आंटी ब्लेड निकाल कर ले गयी थी।

मुझे अब मालुम था की आगे क्या होने वाला है। आंटी अपने चुत के बालो का साफ करने वाली थी। मैं आंटी की चुत के कटते हुए बालों को देखना चाहता था। इसी मौके से मुझे उनकी साफ चुत के भी दर्शन हो जाते। तो मैं फिर चुपके से बाथरूम के पास जा कर कीहोल से देखने लगा। आंटी अपनी साड़ी उतार रही थी फिर उन्होंने अपनी ब्लाउज उतार दी थी।

अब उनके बड़े स्तन बाहर लटकने लगे फिर उन्होंने अपनी दोनों चुचियों का वजन एक एक करके नापने लगी उस वक़्त तो मुझे यही लगा फिर वो अपने बड़ी बड़ी गोरी चुचियों को सहलाते हुए हल्का हल्का दबा रही थी।

फिर उन्होंने अपनी पेटीकोट उतारी क्या मस्त माल लग रही थी। डर ना होता तो अभी मैं उनकी बुर और अपने लंड की खुजली मिट्टा देता पर मैं देखता रहा। अब आंटी ने अपनी पैंटी भी उतार दी अब वो पूरी तरह से नंगी थी। फ़िर रचना आंटी दीवार के सहारे बैठी और अपनी चुत को पानी से भीगा दिया और चुत पर साबुन मलने लगी।

बिच बिच में वो अपनी चुत में उंगली भी कर रही थी। और लंबी लंबी सांस ले रही थी थोड़ी देर में आंटी ने अपनी चुत का (मुंडन) कर दिया चुत के बाल साफ कर लिऐ। क्या चुत थी उनकी एकदम कसी हुई चुत वाहह, क्या मस्त नज़ारा था। मेरा लंड रॉड की तरह टाइट हो गया था। मैंने पहली बार किसी औरत की बूर को इतने करीब से देखा था। तो मेरी उतेजना संभाले नही संभल रही थी।

मैं जल्दी से आंटी के रूम में गया और देखा आंटी ने पहले से पहनने के लिए कपड़े निकाल कर रखे थे। उनकी साड़ी के नीचे उनकी ब्रा और पैंटी भी थी। मैंने अपना 8 “लंबा और 4” चौड़ा लंड निकाला और उनकी पैंटी को अपने लंड पर लपेटकर रगड़ने लगा।

मैं इतना उत्तेजित हो गया की मेरा सारा गढ़ा माल आंटी की पैंटी पर ही गिर गया। मैंने झट पट पैंटी को वही साड़ी के नीचे रख दिया और वहा से भाग आया।

फ़िर आंटी बाथरूम से बहार आई और रूम में चली गई। और अपने रूम का दरवाजा हल्का सा बंद कर कपड़े पहनने लगी। मैं छुप कर उनको कपड़े पहनते देख रहा था। आंटी ने अपनी पैंटी उठाई और पहन ली पहने के बाद उन्हें कुछ गिला सा लगा तो वो रुक गयी और थोड़ी सोंचने के बाद उन्होंने अपनी पैंटी कमर पर चढ़ा ली। उनकी पैंटी पर पूरा मेरा वीर्य फैला हुआ था। पर उन्होंने ज़्यादा ध्यान नही दिया।

उसके बाद वो जल्दी से कपड़े पहनकर बाहर आई और हमनें दोपहर का खाना खाया और फिर मैं सो गया साम को उठ कर घुमने चला गया।

रात में आंटी और मैंने साथ खाना खाया उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया और आंटी घर का काम निपटाने लगी। मुझे निंद नहीं आ रही थी। तो मैं फोन पर फिल्म देखने लगा। मेरे कमरे की लाइट ऑन थी। आंटी भी काम निपटा कर मेरे कामरे में आई या बोली की तुम अभी सोया नहीं। उन्होंने कहा कि मैं तुम्हारे कमरे की रोशनी देखकर आ गयी। मैंने कहा निंद नहीं आ रही है। उन्होंने पूछा क्या देख रहे हो? मैंने कहा की फिल्म देख रहा हूं। वो बोली मैं भी देख सकती हूँ? मैंने कहा क्यू नहीं आ जाइये।

मैंने एक तरफ का ईयरफोन उनके कान में लगा दिया। वो थोड़ी झिझक और मुस्कान के साथ मेरे बगल में लेटेकर मूवी देखने लगी। उस वक्त उनकी सांसे मेरे गालो से टकरा रही थी। मुझे आजिब सा लगाने लगा। थोड़ी देर में फिल्म में रोमांटिक दृश्य आया जिसमे लड़का लड़की को फ्रेंच किश कर रहा था।

आंटी वो दृश्य देख शर्मा कर बोली ये क्या गंदे गंदे फिल्म देखते हो मैंने कहा इसमे गंदा क्या है! हालांकि फिल्म का ये दृश्य देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगा था। वो किसिंग दृश्य देखकर मुझे आंटी में एक मौका दिखने लगा मुझे अब उनको को चोदने के ख्याल आने लगे। थोड़ी देर में आंटी मूवी देखते देखते वही सो गई। जब मैंने उनको हल्की सी आवाज दी। पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नही दिखाई।

मैं समझ गया कि उन्हें गहरी नींद आ गयी है फिर मैंने मूवी बंद कर फोन को साइड में रख दिया। मैं आंटी के बगल में लेटकर उनकी गदराए बदन के उभारों देख ही रहा था। तभी आंटी ने आपने पैरों को खुजलाना शुरू किया जिससे उनकी साड़ी उनके पैरों से हटकर उनके मस्त मोटे जांघो तक आ गयी। वो अभी भी नींद में ही थी और नींद में ही अपने पैर खुजा रही थी।


मैं आहिस्ते से उठा और उनके जांघो के पास बैठा उनके दोनों पैर खुले हुए थे। जिनसे उनकी रसीली सांवली चुत हल्की सी दिखाई दे रही थी। मैंने अपना फोन उठाया और टॉर्च ऑन कर के उनकी चुत देख रहा था। पहली बार मैं उनकी चुत को इतने सामने से देख रहा था। दोस्तो मैं बता नहीं सकता उस समय मेरी क्या हालत थी। आप लोग समझ लो की मेरे हाथ में सोने (गोल्ड) की खादान लग गयी हो।

मैंने आंटी के पैरों को धीरे से और फैलाकर। अपने फोन को उनकी चुत के नजदीक लेजाकर उनकी चुत के क्लोजअप शॉट्स लेने लगा और वीडियो भी लिया। मैंने उनके नंगे चुत के उस नज़ारे को कैमरे में कैद कर लिया। फिर मैं उनके बगल में जाकर लेट गया और सोने का नाटक करने लगा।

मैंने धीरे से अपना एक हाथ उनकी पेट पर रखा फिर हिम्मत करके अपना हाथ उनके जांघ पर रखा। क्या मस्त मखमली कोमल जांघे थी अब मैं उनकी जांघो को सहलाते सहलाते नीचे उनकी कमर की तरफ बढ़ा रहा था जिनसे उनकी साड़ी मेरे हाथों से हटकर उनकी कमर पर चढ़ गयी। अब मुझे उनकी चुत के अगल बगल के बाल दिख रहे थे जो उनकी साँवली चुत को चारों तरफ से घेरे हुए थे।

अब मैंने उनकी चुत पर अपना हाथ रखा देखा आंटी कुछ प्रतिक्रिया नहीं कर रही है। मैंने अपनी उंगली पर ठुक लगाई और उँगली को आंटी के बुर के छेद तक ले गया। मैंने ये सब धीरे-धीरे कर रहा था। ताकी आंटी उठ भी जाए तो लगे मैं नींद में हूँ। मेरी एक उँगली उनकी बूर की छेद पर था। मैंने धीरे से एक उँगली उनकी बूर में डाली क्या गरमी थी उनकी बुरी की । मैं धीरे से उँगली उनकी बूर के अंदर और बहार कर रहा था। मेरी दुसरी उँगली उनके गांड के छेद को भी टच कर रही थी।

मेरा लंड उनके कूल्हों पर दबाव डाल रहा था
थोड़ी देर में उनकी चुत गीली होने लगी। उनके चुत से चिप चिपा पानी रिस कर बाहर आने लगा। ये देख कर मुझसे रहा नहीं गया मैं उठकर उनके जांघो के बीच में बैठ गया और अपने लंड पर थूक लगाया और बैठे बैठे ही उनकी चुत के छेद पर अपना लंड रख और अपने लंड को हल्का सा उनकी चुत में दबाया।

आंटी की चुत फैली और मेरे लंड को अपने अंदर लेने को तैयार हो गयी। लंड का गोल सूपड़ा अंदर आंटी की चुत में घुस गया। मैंने आंटी की तरफ देखा तो वो अभी भी गहरी नींद में थी। मैंने धीरे धीरे पुरा लंड उनकी चुत के अंदर डाल दिया और उनकी चुत की गरमी का मजा ले रहा था। और उनके जांघो को छूकर मनमुग्ध हो रहा था

इतने में ही मेरा लंड फुहारे मारने लगा आंटी की चुत की गर्मी ने मेरा पानी झाड़ दिया मैंने जल्दी से अपना लंड उनकी चुत से बहार किया पर तब तक कुछ वीर्य उनकी चुत में निकल चुका था। बाकी का पानी भी बहार झड गया। मैं उनके जांघो के बीच में ही अपना सर रख के ले गया और आंटी की बूर और गांड की छेद को निहारने लगा।

तभी मैंने देखा की उनकी चुत में मेरा जो वीर्य गिरा था वो धीरे-धीरे बूंद – बुंद करके उनकी चुत से बहार आ रहा था। और उनकी गांड की दरार से बहता हुआ बिस्तर पर गिर रहा था। फिर मैंने उनके कपड़े ठीक किए और अपनी पैंट पहन कर सो गया। अगले दिन जब मैं सो कर उठा तो आंटी एकदम सामान्य व्यवहार कर रही थी। उनको कुछ पता नहीं था की कल रात मैंने उनके साथ क्या किया। मेरी किस्मत भी मेरा साथ दे रही थी।

उसदिन शाम से ही काफ़ी जोर की बारिस हो रही थी। जो रात में भी रुकने का नाम नही ले रही थी। रात में हम लोग डिनर करके टीवी देख रहे थे। तबी आंटी ने कहा ये बारिस बंद नहीं हो होने वाली है। मैं घर का काम निपटा लेती हूं। ये बोलकर आंटी आंगन के तरफ चली गयी। थोड़ी देर बाद चाची के चिल्लाने की आवाज आई। मैं उठकर तेजी से उनकी तरफ भागा। तो देखा आंटी गिरी हुई है।

वो ऐसी गिरी थी कि उनसे उठा भी नही जा रहा था। उनकी टाँगे फैली हुई हाथ पसरे हुए और सीने से साड़ी हटकर जमीन पर थी और बारिश से पूरी गीली हो चुकी थी। उनको कमर और कूल्हों पर काफी चोट लगी थी। मैं उनको उठाकर कमरे में ले गया उनको कमर और कूल्हों पर चोट लगी थी तो वो पेट के बल लेट गयी। वो काफी दर्द में थी।

मैंने उनसे पूछा कहाँ चोट लगी है। तो उन्होंने कमर और गांड की तरफ इशारा किया। मैंने उन्हें पेनकिलर दिया पर जब तक वो असर करता तब तक उनसे दर्द सहन नही हो रहा था। वो ओ..मा ओ..मा कर रही थी। मुझसे उनकी तकलीफ देखी नही जा रही थी। तो मैंने उनसे पूछा कि मूव लगा दूं तो वो मना करने लगी। पर वो अब भी दर्द से छटपटा रही थी। मैंने उनसे कहा रुको मैं मूव लाता हूँ।

वो अभी भी मना कर रही थी। तो मैंने जिद की फिर वो बोली अरे तुम वहाँ लगाओ गे कैसे तो मैंने कहा शर्म करोगी तो दर्द से मरोगी। तो भी वो मना कर रही थी। मैंने उनसे कहा कि यहाँ है कौन जो आपको इस हालत में देख लेगा सिर्फ मैं ही तो हूँ। चाहो तो दर्द से मरती रहो। फिर वो शर्माते हुए धीरे धीरे करके अपने मुठी से अपनी साड़ी ऊपर उठाने लगी। उनसे थोड़ा सा भी हिला नही जा रहा था। तो मैंने कहा लाओ मैं उठा देता हूँ।

इतना कहकर मैंने बिना शरमाये एक झटके में ही उनकी साड़ी को उठाकर उनकी पीठ पर कर दिया। वो अपनी नंगी गांड लिए मेरे सामने पड़ी थी। अब मैं उनकी गोल बड़ी गांड और मोटी जांघो को मैं नंगा अपने सामने देख रहा था। फिर मैंने अपने हाथों में मूव निकाला और मज़े से आंटी की गांड और कमर की मालिश करने लगा। जब मेरे हाथ उनकी गांड को मलते तो उनकी गांड बाउंस होती मुझे ये सब देख अच्छा लग रहा था।

मैं उनकी गांड मलने के बहाने से उनके कूल्हे के दोनों हिस्सो को फाड़ कर गांड की छेद को भी निहारने लगा। उनको क्या पता कि मैं उनकी गांड की छेद पर नज़रे टिकाए बैठा हूँ। इधर मेरा लंड तन चुका था। मैं अपने धार दार लंड से उनकी चुत की जंग छुड़ाने की फिराक में था। उन्होंने शर्म से अपना मुँह दो तकियों के बीच मे छुपाकर रखा था।

फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी आप अपने कपड़े पूरे निकाल दो ताकि मैं आपके शरीर की अच्छे से मालिश कर सकूँ। आंटी ने ” धत्त पगले” कहकर मेरी बात टाल दी मैंने उनसे कहा कि अब मैं तो सब देख ही चुका हूँ। आपके फायदे के लिए ही बोल रहा हूँ। तब आंटी ने कहा कि ठीक है पर तुम ये सब किसी को बताना मत फिर उन्होंने अपनी ब्लाउज उतारी और मैंने उनकी साड़ी और पेटीकोट अब आंटी बिना कपडों के बिल्कुल नंगी होकर मेरे सामने लेटी हुई थी।

फिर मै सरसों का तेल गरम करके ले आया और उनके पैरों की मालिश करने लगा। मैं उनके पैर मलते हुए ऊपर आया और ढेर सारा तेल उनकी गांड और जांघ पर उड़ेल दिया फिर उनकी एक एक जांघ को अच्छे से मसलने लगा। फिर मैंने उनके गांड पर हाथ चलाने लगा आंटी को थोड़ा आराम मिलने लगा। अब उनका शर्माना खत्म हो गया था।

जब मैं उनकी गांड की मालिश कर रहा था तब मैं जान बूझ कर अपनी उंगलियों को उनकी गांड की छेद पर ले जाता आंटी कुछ नही बोल रही थी। फिर मेरा क्या मन हुआ कि मैंने अपनी उंगली आंटी की बूर पर ले गया। और बूर के दोनों पट्टों को मलने लगा। मेरी इस हरकत पर आंटी बोली ये क्या था तो मैंने कहा गलती से हाथ फिसल गया।

फिर मैं आंटी की पीठ की मालिश करने लगा तब मेरी नज़र उनके चुचियों पर पड़ी जो उनके सीने से दबे होने के कारण साइड से बाहर निकली हुई थी और दबे होने के कारण और भी सेक्सी और बड़ी लग रही थी। उनकी चुचियाँ इतनी कमाल की लग रही थी। कि मेरा सब्र छूट गया। मैंने झट से दोनों साइड से हाथ लगाकर उनकी दोनों चुचियों को जकड़ लिया।

उनकी दोनों चुचियाँ मेरे पंजो के गिरफ्त में थी। आंटी मुझे ऐसा करता देख चौंक गयी। बोलने लगी ये क्या कर रहे हो और अपना सीना हिलाकर अपनी चुचियों को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। मैं मसल रहा था। वो आह..आ..आह..ओ हो..उफ्फ..ओ करती हुई अपनी दूध मेरे हाथों से छुड़ाने के चक्कर में थी।

मैंने सोचा साला इतनी देर से इसे नंगा देख रहा हूँ। ये नंगी हो कर मुझसे मालिश करवा रही है। ये गरम हुई ही होगी सिर्फ ऊपर मन से नखरें दिखा रही है। मैंने उनकी चुचियाँ पकड़े रखी और उनके पीठ पर लेट गया। वो जिद्दो जहद कर रही थी। फिर मैंने अपनी टाँगों से आंटी की टाँगे फैला दी ताकि बीच में मेरे लिए जगह बन जाये।

आंटी की टाँगे फैल चुकी थी बीच वाली जगह में मैंने अपनी टाँगे कर दी ताकि आंटी फिर से अपनी टाँगों को सटा न ले। फिर मैंने उनके ऊपर लेटे हुए ही अपने एक हाथ से अपनी पैंट पूरी उतार दी और नंगे लंड से मैं उनके गांड को मलने लगा। एक हाथ से मैं उनकी दोनों चुचियों को मसल कर उन्हें कंट्रोल कर रहा था।

उनके गांड पर तेल लगा हुआ था। जिससे मेरा लंड भी तेल से लिपट कर चिकना हो गया था। वो बार बार अपनी टाँगों को आपस में चिपकाकर अपनी चुत छिपाने की कोशिश कर रही थी। पर मेरे आगे वो कहा जीतती मैं खिसक कर थोड़ा नीचे हुआ और अपना लंड उनकी चुत से सटाकर लंड को उनकी चुत के छेद पर लगा दिया।

जब लंड उनके चुत के छेद पर अड़ गया तो मैं उनकी पीठ पर लेटे हुए ज़ोर से उनके पीठ पर आगे की तरफ सरक गया। आगे सरकने पर मेरा लंड आंटी की चुत को भेदता हुआ अंदर घुस गया। लंड पर तेल लगा हुआ था तो आराम से एक बार में ही पूरा साबुत लंड उनकी चुत में पिल गया।

आंटी की चुत में अचानक लंड घुस जाने पर वो कराह दी आ…आ..ह….ह…माई… रे रे… फिर मैं उनकी चुत में लंड के गोते मारने लगा थोड़ी देर बाद वो सांत पड़ गयी। मैं मज़े से उनकी चुत में लंड पेलने लगा। अब ऐसा लग रहा था कि आंटी ने मुझे खुद को सौप दिया है। मैं जैसे चाहे धक्के मार रहा था।

मैंने करीब आधे घंटे तक अपनी कमर को उनकी गांड पर पटक पटक कर उनकी चुत चोदी जब मैं उनकी गांड पर कस कस कर अपनी कमर मारते हुए उनकी चुत को पेल रहा था। तो ठप्प ठप्प की ज़ोरो की आवाज आ रही थी। पर घर में कोई नही था जो चुदाई की इस आवाज को सुन सके मैं पूरी आजादी के साथ उनकी चुत मार रहा था। अंत मे मैं उनकी चुत में ही अपना माल छोड़ते हुए झड़ गया। आंटी की चुत और झाँटे पूरी लसलसा गयी थी।

फिर मैं हाँफता हुआ उनके ऊपर से पलट कर उनके बगल में लेट गया पता ही नही चला कि कब मेरी आँख लग गयी। फिर 4 बजे भोर में मेरी नींद खुली तो देखा आंटी वैसे ही नंगी मेरे बगल में सोई हुई थी। मेरी नींद खुलते ही मेरी नज़र उनकी गांड पर पड़ी वो दाहिनी करवट लेकर सोई थी मैं ठीक उनके पीछे लेटकर उनकी गांड पर नज़र गड़ाये हुए था।

फिर मैंने अपना हाथ बढ़ाकर उनकी गांड को छूने लगा मैं उनकी मस्त लचीली बड़ी गांड देखकर कामुक हो गया। मैंने उनकी गांड की दरार में हाथ डालकर गांड की छेद का मुआयना करने लगा। उनकी गांड की छेद थोड़ी खुली हुई पर छोटी सी थी। मेरा उनकी गांड मारने का मन कर गया।

तो मैंने रात को जो सररो का तेल रखा था। वो मैंने अपने हाथ में लिया और उनकी गांड की छेद पर मल दिया और थोड़ा सा तेल अपने लंड पर लगा लिया। फिर मैं खिसक कर अपने लंड को उनकी गांड के नजदीक ले गया। फिर मैंने उनके गांड के एक हिस्से को थोड़ा ऊपर उठाया जिससे उनकी गांड की छेद दिखने लगी। फिर मैंने अपने लंड को आंटी की गांड की छेद पर रखा।

फिर मैं भी उनसे पीछे से चिपक गया और धीरे धीरे अपने कमर को दबाते हुए अपने लंड को उनकी गांड में ठेलने लगा। लंड पर तेल लगने से सूपड़ा तो आराम से अंदर गांड में घुस गया पर बाकी का लंड उनकी गांड में नही घुस रहा था। तो मैंने अपने एक हाथ आंटी की कमर को पकड़ लिया। और ज़ोर जबरदस्ती करके अपना लंड उनकी गांड में डालने की कोशिश करने लगा।

पर अचानक शायद आंटी को दर्द हुआ और उनकी नींद खुल गयी वो मुझे पीछे धकेलने लगी और कहने लगी इसमें नही….इसमें नही…दर्द हो रहा है। छोड़ो… पर मैंने उनके गले में एक हाथ डाला और दूसरे हाथ से उनकी कमर पकड़ी और नीचे जोर से झटका उनकी गांड में पेल दिया। जिससे उनका मुँह खुला का खुला रह गया और उनकी आंखें बड़ी बड़ी हो गयी। दोस्तों उनके चेहरे को देख मैं पक्का हो गया कि इस बार लंड उनकी गांड फाड़ने में कामयाब हो चुका है।

लंड तो पूरा उनकी गांड में उतर ही चुका था। अब मैं बिना उनकी गांड चोदे उन्हें छोड़ने वाला नही था। मैंने आंटी के गांड में झटके देने शुरू कर दिए और आंटी आ……..आ……न….अ… ह…न..ही..ई…आन्ह… माई…..म…र….ग..ई..हो…आन्ह.आन्ह…. मैं उनकी गांड चोदता रहा कुछ देर बाद वो खुद ही चुप हो गयी। और अपनी गांड मेरे कमर की तरफ निकाल कर खुद भी मुझसे अपनी गांड मरवाने लगी।

20 मिनट तक मैं उनकी गांड मारता रहा फिर मैं झड़ने वाला था तो मैंने 2-3 दमदार धक्के मारे जिससे आंटी की चींख निकलने लगी फिर मैंने अपना लंड आंटी की गांड से निकालकर उनके मुँह में डाल दिया और उनके सर को पकड़ के अपना लंड उनके मुँह में चोदने लगा। और अपना सारा वीर्य उनके मुँह में भर दिया। मेरे घर वाले 10 दिन नही आने वाले थे।

मैंने आंटी को 10 दिनों तक लगातार चोदा जब भी मेरा मन कर जाता मैं आंटी को नंगा करके चोदने लगता दिनभर में 2-3 बार तो मैं उनको चोद ही देता था। इतनी चुदाई करने से मेरे लंड का साइज बढ़ गया था। और आंटी की चुत तो अब भोसड़ा बन चुकी थी। पर अब भी उनकी चुत में मज़ा था। अभी भी हमारी चुदाई जारी है। मेरी शादी न होने तक तो वो मुझे अपनी चुत देती रहेगी। मैंने उनकी चुचियाँ मसल-मसल कर और भी बड़ी कर दी है। वो मेरी रंडी बन चुकी है। मैं जब चाहूँ उन्हें चोद देता हूँ।

वो भी मेरे लंड की आदि हो चुकी है जब तक उसकी चुत मेरे लंड की मार न खा ले आंटी को नींद नही आती है। तो दोस्तों कैसी लगी आप सब को मेरी ये कहानी उम्मीद करता हूँ। कि मेरी और मेरी नौकरानी की चुदाई की ये कहानी आप सब को पसंद आई होगी।