नशे में धुत सगी दादी का फ़ायदा उठाया, और दादी की जबरदस्त चुदाई की

नमस्ते दोस्तों आज मैं आप सभी को ये सच्ची घटना बताने जा रहा हुं। काफ़ी दिनों से ये बात मेरे मन में थी। मैं उस घटना के बाद मैं अपने ही नजरों में गिर गया था। मैं काफ़ी दिनों तक उस घटना को याद कर कर के मन ही मन अपने आप को कोसता रहा और मन ही मन कुढ़ता रहा।

मैं कैसे अपनी सगी दादी के साथ ऐसा कर सकता हुं। मैंने नशे में धुत सगी दादी का फ़ायदा उठाया, और दादी की जबरदस्त चुदाई की। एक तरह से देखो तो मैंने उनका बलात/कार ही कर दिया था। लेकिन जब मैंने दादी पोते के बीच हुई चुदाई की कहानियां पढ़ी, तो मुझे समझ आया की ये तो हर घर की कहानी है, और लोग इसे पाठकों के बीच साझा भी कर रहे है।

नशे में धुत सगी दादी का फ़ायदा उठाया, और दादी की जबरदस्त चुदाई की

तब जाकर मुझमें हिम्मत आई और मैंने खुद को दोषी मानना बंद किया और ये कहानी आप लोगो के बीच लाने की हिम्मत कर पाया हूं। चलिए अब आप सभी को सीधे कहानी पर ले आता हूं।

ये बात साल 2019 की है जब सारे देश में अचानक लॉकडाउन लग चुका था। जिस कारण सारा देश ठप पड़ गया था। जो जहां थे वहीं फंसे रह गए। लॉकडाउन लगने से पहले मेरे घर वाले गांव चले गए थे। किसी कारण वश मैं नहीं जा पाया और दादी अब 60 साल की हो चुकी थी। वो ज्यादा लंबा सफर नही कर सकती थी इसलिए वो भी नही गई।

अब मैं और दादी घर में हम दो लोग ही थे। परिवार वालों के गांव जानें के कुछ दिनों बाद ही सारे देश में लॉकडाउन लग गया। जिससे मेरे घर वाले वहीं फंसे रह गए थे। मेरा भी कॉलेज बंद हो चुका था जिस वजह से मैं दिन भर घर में ही पड़ा रहता था। बाहर घूमना फिरना बंद मुझे शराब और गुटका खाने की आदत थी। जो अब मुझे मिल नही रही थी। जिस वजह से मेरे शरीर में एक दम बेचैनी होती थी।

मेरी दादी को भी बीड़ी पीने की आदत थी। जो अब उन्हें भी मिलनी बंद हो गई थी। जिस वजह से वो भी अब बेबस और बेचैन हो चुकी थी। वो बार बार मुझसे कहती की मैं कही से उनकी बीड़ी की जुगाड़ लगा दूं। पर उन्हें क्या पता मैं खुद शराब और गुटके के लिए बेचैन था। मैं चाह कर भी दादी की बीड़ी और अपनी शराब और गुटके का बंदोबस्त नही कर पा रहा था।

मेरे एक दोस्त ने मुझे कच्चे भांग का एक बंडल दिया। वो भी मेरी तरह नसेड़ी ही था। उसे भी शराब नहीं मिल रही थी। तो नशे के लिए भांग खा रहा था। जो उसने मुझे भी दिया। मैं बचते बचाते भांग लेकर घर आया तो तुंरत दादी मेरे पास आई और बोली बीड़ी लाया क्या? मैंने कहा नहीं दादी बीड़ी तो नही मिली पर भांग मिली है।

देख लो अगर इससे आपका गुजारा चल जाए तो, दादी बोली मैंने कभी भांग नही खाया लेकिन बीड़ी की तलब से मैं चैन से सो भी नही पा रही हूं। वो बोली दे दे मुझे मैं थोड़ी सी खाकर चैन से सोना चाहती हूं। तो मैंने उस भांग के बंडल से थोड़ी सी भांग निकाली और दादी को दे दी, और चुपके से मैंने भी भांग खा लिया

मुझे क्या पता था की वो थोड़ी सी भांग भी दादी के लिए बहुत थी। दादी भांग खाकर थोड़ी देर तो नॉर्मल बात करती रही फिर उनके होठ लपटाने लगे और उनकी पलके भारी होने लगी। अचानक दादी बैठी बैठी ही धड़ाम से बिस्तर पर गिर गई। मुझपर भी भांग का नशा थोड़ा थोड़ा चढ़ने लगा था।

मैं तुरन्त उठकर दादी के पास गया और उन्हें जगाने की कोशिश करने लगा। लेकिन काफी कोशिश के बाद भी दादी नही हिली बस उनकी सांसों की आवाज आ रही थी। उनके शरीर का वजन काफी था लेकिन मैंने किसी तरह उनको खींचकर बिस्तर पर ठीक से लेटा दिया। इसी खींचा तानी में उनके कपडे अस्त व्यस्त हो गए।

दादी को ठीक से बिस्तर पर लिटाने के बाद जब मेरी नज़र उन पर पड़ी तो मैं एक दम से चौंक गया। दादी की एक चूची उनके ब्लाउज़ के गले से बाहर निकल गई थी। उनकी चूची का आकार देखकर मैं स्तब्ध रह गया। कुछ पल मैं दादी की बड़ी सी गोल चूची को देखता रहा जिसपर काफी सिलवटे थी। उस वक्त मेरी नीयत खराब हो गई।

जैसे ही मैंने अपना हाथ बढ़ाकर दादी की चूची को पकड़ना चाहा तो मेरी अंतर आत्म ने मुझे रोक दिया, नही ये गलत है ये मेरी सगी दादी है। मैंने तुंरत दादी के पल्लू से उनकी चूची को ढक दिया। लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी। मेरा लंड दादी की चूची को देखकर ही खड़ा हो गया था। जिसने मुझे दादी से अलग होने से मुझे रोक दिया।

भला लंड को रिश्तों से क्या फर्क पड़ता है। इसने तो बस एक औरत की अधनंगी शरीर को देख लिया था। अब मेरे लंड में खलबली मच गई थी। मुझे भी लगा की अगर मैं थोड़ी देर दादी की चूची को देखकर अपना मन बहला लूं। तो इससे क्या फर्क पड़ेगा वैसे भी दादी होश में नहीं है। उनको ये सब पता भी नही चलेगा।

मैं आराम से जाकर दादी के बगल में उनसे सटकर बांई करवट लेकर लेट गया और फिर आराम से एक हाथ से उनका पल्लू उनकी छाती पर से हटा दिया पल्लू हटते ही फिर से वही नज़ारा मेरी आंखों के सामने आ गया। मुझे अपनी दादी की बड़ी गोल सिलवटो वाली चूची दिखाई देने लगी। मैं दादी की चूची देखते हुए अपनी पैंट नीचे सरकाने लगा।

मैं दादी की चूची को देखता हुआ अपना लंड मुट्ठी में भरकर धीरे धीरे मुठ मार रहा था। फिर मैं एक हाथ से दादी की चूची को होले होले दबा भी रहा था। दादी की चूची में काफी लचीलापन था और उनकी चूची काफी मुलायम थी। मैं बीच बीच में उनकी काली  गोलाई में फैली बड़ी निप्पल को भी इरेक्ट कर रहा था।

फिर मेरे दिमाग में आया की क्यों न मैं दादी की चुचियों को चूसते हुऐ मुट्ठ मारू तो मैंने हिम्मत करके दादी के ब्लाउज़ के बटनों को खोलने लगा। दादी के ब्लाउज़ के सारे बटन खुलते ही उनकी बड़ी बड़ी लचीली सिलवटो वाली दोनों चूचियां उनके छाती के दोनों तरफ लटक कर आ गई।

उनकी एक चूंची लटकती हुई सीधे मेरे मुंह के करीब आ गई मैंने होले से उनकी उस चूंची के निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और उनके निप्पल की चुसाई करते हुए अपने लंड की मुट्ठ मारने लगा। उनकी नरम चूंची एक दम किसी मुलायम केक की तरह थी। मैं उनकी एक चूंची को चूस रहा था। तो दूसरी चूंची को अपने पंजों से होले होले मसल रहा था। साथ ही एक हाथ से मैं अपने लंड की मुट्ठ मार रहा था।

कुछ ही देरी में दादी की नंगी चूचियों का जादू मेरे लंड पर चढ़ गया मेरे लंड ने बिना रंग वाला पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। जिससे मेरे लंड का 6 इंच गोल सुपाड़ा अब गीला हो चुका था, और वो चिपचिपा पानी मेरे पूरे लंड पर बह रहा था। जिससे मेरी मुट्ठी और लंड पर चिपचिपाहट हो चुकी थी।

अभी मैं झड़ा नहीं था। शायद भांग के नशे के चलते मैं झड़ नही रहा था। बस मेरा लंड बिना रंग वाला पानी छोड़े जा रहा था। फिर अचानक से पता नही मुझे क्या हुआ और मैं उठकर खड़ा हो गया और अपनी टांगों में फसी अपनी पैंट को पूरा निकाल दिया फिर मैं दादी के सीने के दोनों तरफ अपने पैर करके बिना वजन डाले बैठ गया।

मैंने अपने 8 इंच लम्बा और 5 इंच मोटे लंड पर ढेर सारा थूक लगा लिया फिर मैंने अपना लंड दादी के दोनों चूचियों के बीच उनके सीने पर रख दिया और दादी को दोनों चूचियों को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर उनको आपस में चिपका दिया और होले होले से अपनी कमर आगे पीछे करके उनकी चुचियों के बीच अपना लंड घसीटने लगा।

मेरे मोटा और लंबा लंड दादी की दोनों चूचियों को चोदते हुए उनके चीन से टकरा रहा था। मैं बड़े आराम आराम से अपनी कमर आगे पीछे करके दादी की चुचियों को चोदते हुए उनकी दोनों रबड़ जैसी निप्पलों को मिस और छेड़ रहा था।

करीब दस मिनट तक दादी की चुचियों को चोदने और मसलने के बाद अचानक से मुझे मेरी रफ़्तार बढ़ाने की इच्छा होने लगी मैं तेज़ी से अपना लंड दादी की दोनों चूचियों के बीच रगड़ने लगा। मैं अब झड़ने वाला था जिससे ना चाहते हुए भी मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी अब मेरा माल छुटने वाला था। जैसे ही मैंने अपना लंड उनकी चुचियों में से हटाना चाहा मेरा माल छुट गया।

मेरे लंड से एक तेज धार पिचकारी निकली और मेरा कुछ वीर्य उनके चेहरे और गले पर फैल गया। मेरा लंड अभी भी दादी की दोनों चूचियों के बीच था और मेरे लंड से अभी भी रुक रुककर वीर्य बाहर निकल रहा था जिससे दादी का सीना भी मेरे वीर्य से लबालब भर चुका था।

दोस्तों पहली बार हुआ था की मेरे लंड से इतनी ज्यादा मात्रा में वीर्य निकला था। जब तक मेरे लंड का सारा वीर्य दादी की छाती पर नही निकला तब तक मैं वहां से नही हिला। फिर मैंने दादी की चुचियों और चहरे को उनके पल्लू से पोंछकर साफ कर दिया। फिर मैं दादी के बगल में लेटकर उनकी नंगी पड़ी चुचियों के दर्शन करता रहा।

मैं ये देखकर चिंता मुक्त था की मैंने मेरा काम भी कर लिया और दादी को पता भी नही चला दादी अभी भी भांग के नशे में धुत बेहोश पड़ी थी। मैं झड़ चूका था लेकिन मेरा लंड अभी भी कड़क था। फिर से उसमें खुजली मच रही थी। तभी मेरे मन में आया की अगर दादी को अभी जो हुआ वो सब महसूस नहीं हुआ तो मैं उनको चोदू तब भी उनको कुछ पता नहीं चलेगा।

मैं दादी के बगल में लेटा हुआ था मैंने अपनी दादी को चोदने का फैसला कर लिया और लेटे हुए ही मैं धीरे धीरे उनकी साड़ी को ऊपर की ओर खींचने लगा। जैसे जैसे उनकी साड़ी ऊपर चढ़ रही थी वैसे वैसे दादी की दोनों टांगें नंगी होती जा रही थी।

मैंने उनकी साड़ी को खींचकर उनकी जांघों तक कर दिया अब मुझे दादी की मोटी मोटी जांघें दिखाई दे रही थी। उनकी जांघों पर भी उम्र की वजह से सिलवटें आ गई थी। उनकी जांघों को देखते ही मैं उनकी चुत में अपना लंड डालने की कल्पना के साथ कामोत्तेजना से भर गया। अब मुझसे रहा नही गया।

मैं तूरंत उठकर दादी के टांगों के पास जाकर बैठ गया। फिर मैंने बड़ी मशक्कत से दादी के दोनों टांगों को मोड़कर फैला दिया और उनकी साड़ी उठाकर उनके पेट तक चढ़ा दी। अब जो नज़ारा मेरी आंखों के सामने था। उसके लिए मैं वर्षों से तड़प रहा था। आखिरकार मुझे मेरी दादी की चुत दिख गई।

उनकी बढ़ती उम्र ने उनकी चुत को भी अपने गिरफ्त में ले लिया था। उनकी चुत के  इर्द – गिर्द की चमड़ी झूल गई थी अब शायद उनको झांटे भी कम आती थी। उनकी चुत पर गिने चुने 8 – 10 बाल ही थे। उनकी चुत का गंजापन आ चुका था। फिर मेरी नजर उनकी चुत के दोनों होठों पर गई जो आपस में चिपकी हुई थी और उनकी चुत की छेद को ढक रखा था।

अब मुझसे और रुका नही गया मैंने दादी की दोनों टांगों को थोड़ा और फैलाकर बीच में जगह बना ली। फिर मैं अपना लंड पकड़े लंड को दादी की चुत से सटाकर बैठ गया। अब मैं अपने लंड से दादी की क्लिट को रगड़ने लगा। जिससे मेरे लंड में तनाव आने लगा और मेरा लंड फिर कड़ा और सीधा हो गया।

अब मैं अपना लंड अपनी मुट्ठी में पकड़कर दादी के चुत के होठों पर रगड़ने लगा। जिससे दादी के चुत दोनों होठ अलग हो गए और उनकी चुत का छेद खुल गया। पहले तो मुझे डर लगा की शायद दादी मेरे मोटे लंड की मार से मर न जाए। पर अंजाम की परवाह ना करते हुए मैंने अपने लंड का 6 इंच गोल सुपाड़ा दादी की  चुत में धकेला।

मेरे लंड का सुपाड़ा दादी की चुत के छेद के मुहाने पर थोड़ा अटका लेकिन फिर होले से धक्के से दादी की चुत में घुस गया। जैसे ही मेरा सुपाड़ा दादी की चुत में घुसा मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे मैं सालों से इस जन्नत की तलाश में था। मेरे सुपाड़े को अपनी गिरफ्त में लेते ही दादी की चुत की भीतरी दीवारों का कसाव सुपाड़े पर महसूस होने लगा।

फिर मैंने होले से अपनी कमर आगे चलाई जिससे मेरा आधा लंड दादी की चुत में चला गया। दादी को तकलीफ न हो इसलिए मैं आधे लंड से ही दादी की चुत को पेलने लगा। अब मेरा आधा लंड दादी की चुत के अंदर बाहर होने लगा। मेरे लंड पर दादी की चुत का पानी चढ़ चुका था। जिससे मेरा लंड आसानी से 4 इंच तक उनकी चुत की दीवारों को रगड़ता हुआ। अंदर बाहर घुस निकल रहा था।

जब मैंने देखा की दादी को इस चुदाई से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। तब मेरी हिम्मत और बढ़ गई और जोश जोश में मैंने अपना लंड कसके अंदर तक ठेल दिया अब मेरा लंड पूरा का पूरा 8 इंच दादी की चुत को फाड़ता हुआ उनकी चुत में घुस गया। इस धक्के से दादी की आंख खुल गई।

वो नशे में बोली ये क्या कर रहा है? और मुझे अपने ऊपर से धक्का देकर हटाने की कोशिश करने लगी। वो एक तो बूढ़ी उपर से भांग के नशे में वो मुझे अपने ऊपर से नही हटा सकी। मैं उनकी चुत में अपना 8 इंच लम्बा लंड घुसाए उनकी सारी कोशिशों को देखता रहा। जब वो थक गई तो वो बोली रे तू मेरा बलात/ कार कर रहा है!

मैंने सोचा की अब अगर मेरी चोरी पकड़ी गईं ही है तो क्यों ना मैं खुलकर दादी की चुत का मजा लूं। मैंने अपना लंड उनकी चुत से खींचा और एक ज़ोर के धक्के के साथ वापस पूरा का पूरा 8 इंच का लंड दादी की चुत में पेल दिया।

दादी इस धक्के के दर्द से कराह उठी आ…आ..आह….. अ रे… बाप..पपप.. अ… मर…गईई ..ई आह..मा  मैंने कस कस के ऐसे ही कई धक्के दादी की चुत में पेल दिया। अब दादी की चुत बची खुची सख्ती भी खतम हो गई थी। उनकी चुत ऐसे कुछ धक्कों से ही ढ़ीली हो गई थी।

अब मैंने दादी की दोनों टांगों को पकड़ा और और उनके घुटनों को उनकी चुचियों पर दबाते हुए उनके उपर लेट गया। अब मैंने दादी की असली चुदाई शुरू की मुझमें जितनी ताक़त थी उतनी ताक़त लगाकर और तेज रफ़्तार से दादी की चुत में अपना लंड पेलने लगा। दादी मेरे हर धक्के पर चींखती चिल्लाती आह…आह…. छोड़ दे….अब बक्श दे आह… मा आ आ….मार डाला आ आ….

मेरी हवस रुकने वाली नही थी मैं खींच खींचकर दादी की चुत में अपना लंड पेलता रहा। तभी मुझे दादी की चुत के अकड़ने का आभास होने लगा। उनकी चुत की अंदरूनी दिवारे मेरे लंड को कसती ही जा रही थी। जिससे मेरी रफ़्तार कम हो गई और मुझे मेरी गोटियों पर गीलापन महसूस हुआ।

जब मैंने मेरे गोटियों को छूकर अपने हाथ को देखा तो उसमे वीर्य लगा हुआ था। मैं अभी झड़ा नहीं था। तो ये पक्का था की दादी झड़ गई थी। मैंने मुस्कुराते हुए कहा दादी झूठ मुठ का क्यों चिल्ला रही हो मजा तो तुम्हें भी आ रहा है न? देखो तुम्हारी चुत मेरा लंड खाकर झड़ गई है।

मेरी बातें सुनकर दादी दंग रह गई उसके बाद से उनके मुंह से कोई आवाज नहीं निकली मैं चाहें कितनी भी जोर का धक्का मारा रहा था। उन्हे अपनी लुटती असमत का दुख था जो उनका चेहरा देखकर समझ आ रहा था। मैंने दादी की पवित्रता नस्ट कर दी थी।

कुछ ही देर में मैं झडने की सीमा पर पहुंच गया मेरा वीर्य दादी की चुत में ही निकल गया उनकी चुत मेरे गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई थी। जैसे ही मैंने अपना लंड उनकी चुत से निकाला तो उन्होंने अपनी जांघों को बंद करना चाहा पर मैंने फिर से उनके दोनों पैर फैला दिए।

मैं उनकी टांगों को फैलाकर उनकी चुत को देखने लगा उनकी चुत का छेद मेरे लंड की मोटाई जितना फैलकर 5 इंच का हो गया था। उनकी चुत से वीर्य रिस रहा था। उनकी सेक्सी चुत को देखकर मेरे हाथ फिर से मेरे लंड पर चला गया।

मैं दादी की चुत को देखते हुए फिर से अपने लंड की मुट्ठ मारने लगा। कुछ ही देर में मेरा वीर्य निकलने वाला था। तो मैंने अपना लंड दादी की चुत में डाल दिया और उनके उपर लेटकर अपना शरीर उनके बदन के उपर उपर नीचे घसीटने लगा। फिर से मेरा वीर्य दादी की चुत में छूट गया।

उस दिन मैंने तीन बार अपनी सगी दादी की चुत का बलात/ कार किया। उस दिन दादी की चुत फाड़ चुदाई चलती रही आखिरी बार वाली चुदाई में आखिरकार दादी ने मेरा साथ दे ही दिया। वो अपने आप को ज्यादा देर नहीं रोक पाई। जब मैं उनकी चुत में धक्के लगा रहा था तब वो कभी मेरी पीठ सहला रही थी। तो कभी अपने दोनों हाथों से मेरी गांड सहला रही थी।

दादी की इस तरकीब से मैं जल्दी से उनकी चुत में ही झड़ गया। दादी के साथ देने के कारण मैं सैटिस्फाइड हो गया। उसके बाद मैंने उनकी चुत से लंड निकाला और उनके सारे बदन और चुत को साफ करने लगा। उसके बाद मैंने सारी घटना दादी को बताई की मैं ना चाहते हुए भी उनके साथ ये सब करने को कैसे विवश हुआ और मैंने माफी मांगी।

उस वक्त दादी ने कोई जवाब नही दिया पर उस घटना को बीते अब 3 साल हो चुके है। उसके बाद न तो कभी मेरे और दादी के बीच चुदाई हुई और न ही कभी दादी ने इस बात का जिक्र मेरे साथ या किसी और के साथ किया। ये बात अभी तक हम दोनों के बीच गुप्त है।

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