होली के दिन, मम्मी की पूरी रातभर चुदाई की

होली के दिन, मम्मी की पूरी रातभर चुदाई की

दोस्तों मैं मनीष आप अभी के लिए एक और नई कहानी लेकर आया हूं। आप सभी ने मेरी पिछली कहनी पढ़ी ही होगी। कहानी:- दादी की भोसड़े और गांड में पोते की लंड की मुहर उस समय दादी ने मुझसे वादा किया था की वो मुझे मेरी मम्मी को चोदने में मेरी मदत करेंगी।

आपको पता ही होगा जब मेरी मम्मी और पापा गांव चले गए थे। तब कैसे मैंने अपनी दादी को चोदा था। उसके कुछ दिन बाद मम्मी और पापा भोपाल वापस आ चुके थे। पापा को कुछ दिनों के बाद फिर से गांव के लिए निकालना था। क्योंकि गांव में घर का काम चल रहा था।

तो पापा ने डिसाइड किया की वो होली के पहले गांव चले जाएंगे उन्हें गांव की होली देखे काफी दिन हो गए थे। होली के चार दिन पहले पापा और मेरी छोटी बहन गांव चले गए। अब घर में मैं , दादी और मम्मी रह गए थे।

पापा के गांव चले जाने के एक दिन बाद दादी मुस्कुराती हुई मेरे पास आई और बोली अपने लंड की धार तेज करले! मैंने जैसा वादा किया था की तुझे तेरी मां की चुदाई करने में तेरी मदत्त करूंगी। मैंने कहा कैसे? तो दादी बोली तू बस आम खा गुठलियों की चिंता मत कर!

मुझे कुछ समझ नही आया की दादी क्या करने वाली है। मम्मी मुझे खुदसे अपनी चूत तो देने से रही। दादी आगे क्या करने वाली है उन्होने मुझे नही बताया। बस इतना कहती हुई चली गई की होली वाले दिन तू जी भर अपनी मां को चोदना।

मुझे भी लगा दादी कुछ न कुछ तो करेगी उससे मुझे क्या! मुझे मेरी मम्मी की चुदाई करने का मौका मिल रहा था इसी से मैं खुश था। 2 दिन बाद होली वाले दिन मैंने दादी से फिर से पूछा की दादी सच में मुझे मेरी मम्मी को चोदने में मेरी मदत करोगी। या फिर ऐसे ही बोल रही हो।

दादी ने कहा तू बस अपनी मां को हवस की नजरों से देख और सोच की तू इसे किस किस पोजीशन में चोदेगा आज ये तेरी होकर रहेगी। मैं मम्मी को हवस भरी निगाहों से देखने लगा। मम्मी घर के कामों में व्यस्त थी। मैं किसी न किसी बहाने से उनके पास जाकर उनकी बड़े आकार की गांड,और जब वो झुकती तो नाईटी के गले में से उनके लटकते हुए बड़े बड़े चूचे जो की उनकी नाईटी के अंदर झांकने से पूरे नंगे साफ दिख रहे थे।

मम्मी की मांसल चूतड़ के उभार और उनकी बड़ी बड़ी गोरी चूचियों को देखकर मेरा मन ललच रहा था और  मेरा लंड टाइट हो चुका था। मैंने अपने लंड को शांत करने के लिए दादी के पास गया और उनको पकड़कर छत पर ले गया। फिर मैंने खड़े खड़े ही दादी की चूत चोदनी शुरू कर दी 10 मिनट चोदने के बाद मैंने दादी की चूत में ही अपना माल झाड़ दिया।

उसके बाद मैं दिनभर अपने दोस्तों के साथ होली खेलता रहा करीब शाम 4 बजे मैं घर आया तो देखा मम्मी और दादी टीवी देख रही थी। मैं जब नहाधोकर आया तो शाम के 5 बज चुके थे। तभी दादी उठकर किचन में गई और अपने हाथ में मिठाई का डब्बा लेकर आई।

और मम्मी को देते हुए कहा ले मैंने और मनीष ने खा लिया है तेरे हिस्से का है तू खा ले। जब मैंने उस डिब्बे में से मिठाई लेनी चाही तो दादी ने मेरा हाथ झटकते हुए मुझे आंख मारते हुए इशारे में मिठाई खाने से मना किया।

मैंने अपने हाथ पीछे हटा लिए, फिर दादी ने हल्के से इशारे में मुझे समझाया की वो भांग वाली मिठाई है। अब जा के मुझे दादी का सारा खेल समझ आ गया। मैं मुस्कुराता हुआ दादी की चतुराई पर हंसने लगा।

मम्मी मिठाई देखते ही टूट पड़ी और करीब 5 मिनट में मिठाई का पूरा डिब्बा मम्मी ने खाली कर दिया और बैठकर टीवी देखती रही। करीब 15 मिनट बाद मम्मी की पलकें भारी होने लगी। मैं और दादी वहीं बैठे सब देख रहे थे। कुछ देर मम्मी ने अपने आप को जगाए रखने की बहुत कोशिश की पर भांग के तगड़े नशे के कारण वो पूरी तरह नींद की आगोश में आ गई।

मैंने और दादी ने थोड़ी देर और इंतेजार किया ताकि भांग का नशा अच्छे से मम्मी को चढ़ जाए। करीब आधे घंटे के बाद दादी ने मम्मी को हिला डुलाकर जागने की कोशिश की पर मम्मी को कोई असर नहीं हुआ। फिर दादी ने मम्मी की जांघ पर एक जोर की चिमटी काटी पर मम्मी को उससे भी कोई फरक नही पड़ा।

फिर दादी ने मम्मी की नाइटी में हाथ डालकर उनकी बुर में अपनी दो उंगली डाली तब भी मम्मी ने कोई हरकत नहीं दिखाई मम्मी बेहोश चुपचाप कुर्सी पर बैठी थी। अब शाम के करीब 6 बज चुके थे। तब दादी ने मुझसे कहा ले जा इसे अब जब तक तेरा जी न भरे तब तक इसको चोद अब इसे कल सुबह से पहले होश नही आयेगा।

इतना सुनते ही मैं खुशी से पागल हो गया मैंने तुंरत वहीं मम्मी की नाईटी को उपर उठाया और उनकी चूत को देखने लगा। फिर मैंने अपनी दो उंगलियां मम्मी की चूत में डाल दी। मम्मी की चूत एकदम गरम थी और उनकी चूत दादी के भोसड़े के मुकाबले टाईट थी।

मैं मम्मी की चूत में बैठे बैठे उंगली करने लगा। करीब 5 मिनट तक मैंने वहीं मम्मी की चूत में उंगली की तब दादी ने कहा कुत्ते तू यही सारा समय बरबाद मत कर ले जा इसे कमरे में और अच्छे से इसकी चुदाई करना। फिर मैं दादी की मदत से मम्मी को उनके कमरे में ले गया।

मैंने मम्मी को उनके कमरे में बिस्तर के किनारे पर पीठ के बल लेटा दिया और फिर मैंने मम्मी की दोनो मोटी मोटी जांघों पर से नाईटी हटाकर उनकी दोनों टांगों को फैला दिया। कुछ देर मैं मम्मी की मोटी मोटी जांघो को चूमता चटाता रहा। फिर मैं एक टेबल लेकर मम्मी की दोनों टांगों के बीच पलंग से सटकर बैठ गया।

फिर मैंने मम्मी की चूत पर हाथ फेरना शुरू किया क्या कमाल की चूत थी। मम्मी की मोटी मोटी जांघों के बीच छुपी चूत आज पहली बार दिखी थी। तो मैंने मम्मी के चूत के दाने को रगड़ना शुरु किया कुछ देर उनकी चूत को रगड़ने पर उनकी चूत से पानी आने लगा।

पहले तो मैं मम्मी की चूत का पानी देखकर डर गया की कही मम्मी जाग तो नही रही है। फिर जब मैंने उनकी तरफ देखा तो मम्मी बेसुध सोई हुई थी। अब मुझे मम्मी की चूत चाटने का मन कर रहा था तो मैंने मम्मी की दोनों जांघों को अपने हाथों से पकड़ लिया और उनके दोनों जांघों को फैलाकर अपनी जीभ मम्मी की चूत पर लगा दी।

जैसे ही मेरी जीभ मम्मी की चूत से सटी मुझे मम्मी की चूत से भीनी भीनी खुशबू आने लगी और मम्मी की चूत का नमकीन स्वाद मेरी जबान पर चढ़ गया। मैं मम्मी की चूत सुंघते हुए उनकी चूत को चाटने लगा। मैं किसी भूखे शेर की तरह उनकी चूत को चाटने लगा।

थोड़ी ही देर में मैंने मम्मी की चूत को अपने थूक से भर दिया और अपनी जीभ को उनकी चूत की छेद में डालकर जीभ को उनकी चूत के अंदर बाहर करने लगा। अपनी जीभ से मम्मी की चूत चोदते और चाटते हुए मेरा लंड खड़ा हो चुका था और पैंट में ही पानी छोड़ रहा था।

मैं आज जी भर मम्मी की चूत को खाना चाहता था तो मैंने ज्यादा जल्दबाजी नहीं की मैं मम्मी की चूत के बाहर लटकते दोनो ओर के चमड़े(लीबिया) को बारी – बारी से चुसने लगा। इतने में ही मम्मी की चूत ने सारा गाढ़ा माल मेरे मूंह में ही छोड़ दिया मैं मम्मी की चूत से निकले माल को चाट चाटकर खा गया।

मैंने जी भर मम्मी की चूत को चाटा मैंने मम्मी को बेहोशी में भी इतना गर्म कर दिया की वो दो बार झड़ चुकी थी। फिर मैंने मम्मी की नाईटी को बड़ी मशक्कत के बाद निकाल दिया मम्मी ने अंदर कुछ नही पहना था। नाईटी निकालते ही मम्मी पूरी नंगी हो गई

अब मेरी मम्मी का नंगा शरीर मेरी आंखों के सामने था। उनकी नाइटी उतारते ही मेरा ध्यान सीधा मम्मी की बड़ी बड़ी चूचियों पर गया। तो मैं उनके बगल में बैठ गया और उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को मसलने लगा। उनकी बड़ी बड़ी चूचियां मेरे हाथ में नही समा पा रही थी।

कुछ देर मैं उनकी चुचियों को मसलता रहा फिर मैं उनके ऊपर लेट गया और लेटकर उनकी चुचियों को चूसने लगा। मैं उनकी चुचियों से खेलता हुआ उनकी निप्पलों को खींच तानकर अपने होठों से मसलता हुआ चूस रहा था। काफी देर तक मैंने उनकी चुचियों को रगड़ा, मसला और चूसा जिससे उनकी गोरी गोरी चूचियां बिलकुल किसी लाल गेंद की तरह हो गई थी।

अब मेरा लंड बहुत सख्त हो गया था, इसे बिना मम्मी की चूत दिलाए शांत नहीं होने वाला था। तो मैं उठा और अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिल्कुल नंगा हो गया। मम्मी अभी भी बेहोसी में अपनी टांगें फैलाए बिस्तर पर पड़ी थी। मैं अपने कपड़े खोलते खोलते उन्हे ही देख रहा था।

तभी अचानक मेरी नजर मम्मी की गांड की छोटी सी भूरे रंग की छेद पर पड़ी जो मम्मी की टांगें फैली होने के कारण थोड़ी खुली हुई थी। मम्मी की गांड की छेद देखकर मेरा मन ललच गया। फिर मुझे एक खयाल आया की क्यों न मैं पहले मम्मी की गांड मार दूं।

तो मैंने मम्मी को खींचकर पलंग के बीचों बीच कर उनको पलटकर पेट के बल लेटा दिया। अब मम्मी की गांड उपर हो चुकी थी, और मैं मम्मी की मोटी मोटी जांघों पर बैठकर उनकी गांड के दोनों हिस्सों को फैला फैलाकर उनकी गांड से खेलने लगा। तभी मुझे मम्मी की गांड की छेद दिखी जो बिल्कुल 1 रूपये के सिक्के की व्यास जितनी लंबी थी।

उनकी गांड की सुर्ख भूरे रंग की छेद एकदम सिकुड़ी हुई थी। मेरा लंड मोटा था और उनकी गांड में इतनी आसानी से नही जाता तो मैंने इधर उधर नज़र दौड़ाई तो मुझे उनके कमरे में पड़ी वैसलीन की बोतल दिखी मैंने झट से वो बोतल उठाई और मम्मी की जांघो पर बैठकर थोड़ी सी वैसलीन अपने हाथ में ली और अच्छे से उसे अपने लंड पर मलने लगा।

कुछ ही देरी में मेरा लंड वैसलीन से चमक उठा था। तो फिर मैंने अपने दोनों हाथों से मम्मी की गांड के दोनों हिस्सों को अलग किया और अपने लंड को मम्मी की गांड की छेद पर अपने दोनों अंगूठों से दबाते हुए एक हल्का सा धक्का लगाया। जिससे मम्मी की गांड की छेद खुल गई और मेरे लंड का अगला भाग मम्मी की गांड में चला गया।

फिर से मैंने अपने दोनों अंगुठे से अपने लंड को रास्ता दिखाते हुए एक और धक्का लगाया जिससे मेरे लंड के सुपडे का पिछला हिस्सा 2 इंच और मम्मी की गांड में घुस गया। मम्मी की गांड की छेद थोड़ी टाईट थी। पर अब मेरे लंड ने सही रास्ता पकड़ लिया था। तो मैं विराम ले लेकर अपनी कमर को मम्मी की गांड पर दबाने लगा।

धीरे धीरे करके मेरा पूरा लंड मम्मी की गांड में चला गया उसके कुछ देर बाद मैं मम्मी की जांघों पर बैठे बैठे अपनी क़मर को आगे पीछे खींचने लगा और मेरा लंड मम्मी की गांड चोदता हुआ अंदर बाहर होने लगा। पहली बार मुझे किसी की गांड चोदने में मजा आ रहा था।

मैं अपनी मम्मी की टाइट गांड चोदते हुए उनकी गांड के दोनों हिस्सों को मसल, और हल्के हल्के हाथों से उनकी गांड पर चाटे लगा रहा था। जिससे मेरा जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। मैं मम्मी की गांड में धक्के पर धक्के मारे जा रहा था। मैं उत्शाह के मारे अपना लंड जड़ तक मम्मी की गांड में पेले जा रहा था।

और मैं अपनी कमर का पूरा भार मम्मी की गांड पर डालने लगा जिसे मेरा लंड उनकी गांड की गहराइयों में घुसकर उनकी गांड चोद रहा था। अब मुझे मम्मी की गांड चोदते हुए करीब आधा घंटा हो चुका था। अब मेरी मम्मी की गांड की छेद फैलकर बड़ी हो चुकी थी। मैंने बड़ी बेरहमी से उनकी गांड मारी थी। मैंने उनकी गांड की छेद को चोद चोदकर लाल कर दिया था।

मम्मी की गांड की छेद से हल्का सा खून आने लगा था। शायद आज मम्मी होश में होती तो पता नही कितनी रोती, चीखती पर अभी वो बेसुध लेटी पड़ी थी। तो मैं बड़े आराम से अनकी गांड चोद रहा था। अब मेरा निकलने वाला था तो मैंने मम्मी की गांड में धक्कों की गति तेज कर दी। और एक लंबी चैन की सांस लेता हुआ उनकी गांड में ही झड़ गया।

जब मैंने मम्मी की गांड से अपना लंड निकाला तो उनकी गांड की बडी हो चुकी छेद से सारा माल बहने लगा। मैं हफता हुआ उनके बगल में लेट गया और उनको पलटकर उनका चेहरा अपने आमने सामने कर दिया। फिर मैंने उनकी चूची चूसनी शुरु की और बड़े सुकून से उनकी बड़ी बडी चुचियों को चुसने लगा।

फिर मैंने मम्मी के होठों को किश करना शुरू किया और साथ ही उनके दोनों चूचियों को मसलने लगा। कुछ ही देरी में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मम्मी की चूत की और तनकर इशारा करने लगा। मम्मी मेरे सामने ऐसे लेटे हुए थी की हमारा चेहरा आमने सामने था। तो फिर क्या मैंने अपना शरीर मम्मी से चिपका लिया।

अब मम्मी का और मेरा पेट आपस में चिपक चुके थे। फिर मैंने मम्मी की एक टांग को उठाकर अपने कमर पर रख दिया और अपने लंड से उनकी चूत पर निशाना लगाते हुए अपनी कमर को आगे धकेल दिया जिससे मेरा लंड सरसराता हुआ मम्मी की गरम चूत में दाख़िल हो गया।

मैंने एक धक्के में ही मम्मी की चूत में अपना 3 इंच मोटा, 8 इंच लम्बा औजार घुसा दिया, फिर मैंने मम्मी की मैच्योर गरम चूत में अपना लंड धकेलते हुए अंदर बाहर करने लगा। मेरे धक्कों से मम्मी का पूरा शरीर हिल रहा था और उनकी चूचियां उछल उछालकर मेरे मूंह तक आ रही थी, और पूरे कमरे में ठप….ठप… ठप … की आवाज सुनाई दे रही थी।

मम्मी को उसी पोजिशन में चोदते चोदते मैंने उनको पलट दिया और उनको नीचे करके मैं उनके ऊपर चढ़ गया। फिर मैंने मम्मी के होठों पर अपने होठ रख दिए और उनके होठों को चूमता हुआ उनकी दोनों टांगों के बीच अपनी क़मर को उनकी चूत के उपर कस कसकर पटकने लगा।

मेरा लंड पूरी रफ़्तार के साथ उनकी चूत के अंदर बाहर होने लगा और उनकी चूत के धधकते भट्ठे को शांत करने में लग गया। आज मुझे पता चला खुद की मां को चोदने में जो मजा है और कहीं नहीं है! मम्मी की चूत दादी के भोंसड़े के मुकाबले ज्यादा स्वाद दे रही थी। मैंने मम्मी की चूत को गाज गाज कर दिया।

मम्मी की चूत से उनका रस छूट चुका था जिससे मेरा लंड उनकी चूत में और अंदर तक फिसलकर अब अपनी पूरी रफ़्तार के साथ उनकी बच्चें दानी को चोटे मारे जा रहा था। अब मैं भी झडने वाला था तो मेरी आख़िरी रफ़्तार बढ़ गई मम्मी भी अभी अभी झड़ी थी उनकी चूत मेरे लंड को ऐंठने लगी हो।

उस वक्त ऐसा लग रहा था की मम्मी की चूत फिर से झडने वाली है क्योंकि उनकी चूत सिकुड़ खुल रही थी और मेरे लंड को ऐठ रही थी। मैं भी अपने चरम सीमा पर आ चुका था। मैं अपना माल मम्मी nki चूत में नही छोड़ना चाहता था। पर मैं चाहकर भी अपने आप पर काबू न कर सका जैसे ही मैंने अपने लंड को मम्मी की चूत से बाहर खींचना चाहा

मेरे लंड ने मम्मी की चूत में ही माल की धार मार दी मैंने भी सोचा की अब मेरा माल मम्मी की चूत में निकल ही गया है तो अब लंड बाहर निकालने का क्या फायदा फिर मैं अपना लंड मम्मी की चूत में डाले हुए ही उनपर ढह गया, और उनकी चुचियों को दबाते हुए उनकी दोनों निप्पलों को बारी बारी से चुसने लगा।

कुछ देर बाद मैंने मम्मी की चूत से अपना लंड निकाला और एक कपड़े से मम्मी की चूत और गांड को भी साफ कर दिया। लेकिन लंड जब मैं अपना लंड साफ कर रहा था तो फिर से मेरे लंड में जान आने लगी। मेरा लंड फिर से एक बार चुदाई के लिए खड़ा हो गया। तो फिर क्या था मम्मी की नंगी चूत और गांड मेरे सामने नंगी होकर पड़ी थी।

फिर से मैं मम्मी के पास बिस्तर पर चला गया और इस बार मैंने उनको बाई करवट करके लेटा दिया और उनके दोनों घुटनों को मोड़कर उनके पेट से सटा दिया। अब पीछे से मम्मी की चूत और गांड दोनों का रास्ता साफ हो गया।

मैं मम्मी के पीछे सटकर लेट गया और अपना एक हाथ आगे बढाया और उनके चुचियों पर रखा दिया और अपने लंड को उनकी चूत के मुंह पर रखकर एक लंबा धक्का मारा जिससे मेरा लंड पूरा का पूरा एक बार में ही उनकी चूत में समा गया।

फिर मैंने एक हाथ से उनकी चुचियों को मसलता हुआ उनको अपने सीने की तरफ दबाने लगा और नीचे से अपने कमर आगे उछाल उछाल कर उनकी चूत की चुदाई करने लगा। उस बार मैंने उनकी चूत की चुदाई काफ़ी देर तक की पर मैं अभी तक झड़ा नहीं था। मम्मी एक बार फिर झड़ चुकी थी। क्योंकि उनकी चूत का गीलापन मुझे साफ समझ आ रहा था।

अब तक मैं अपनी दादी को चोद चोदकर इतना पक्का हो चुका हुं। अब मैं जल्दी नही झड़ता मैं इतना ट्रेंड हो चुका था की मैं किसी भी औरत को चोदकर उसके मुंह से बाप बाप निकलवा दू। लेकिन मैं अब मम्मी की चूत में धक्के लगा लगाकर थक चुका था। लेकिन मेरा पानी नहीं निकल रहा था। मैं जल्दी अपना पानी निकलवाना चाहता था।

तो मैंने अपना लंड अपनी मम्मी की चूत से निकालकर अपना लंड उनकी गांड की छेद पर रख दिया और फिर अपने दोनों हाथों से उनकी क़मर को पकड़कर उनकी गांड़ में लंड का एक जोर का धक्का मारा जिससे मेरा आधा लंड मम्मी की गांड में चला गया। कुछ देर मैं आधे लंड को ही मम्मी की गांड के अंदर बाहर खींचता धकेलता रहा।

कुछ देर बाद मम्मी की गांड की छेद फिर से फैल गई अब उनकी गांड मेरा पूरा लंड गटकने लगी मैंने करीब 15 मिनट तक उनकी गांड मारी उनकी टाइट गांड ने जल्द ही मेरे लंड का पानी झाड़ दिया मैंने अपना वीर्य मम्मी की गांड में ही छोड़ दिया।

मैंने उस रात कुछ कुछ घंटे आराम करके कई बार मम्मी के साथ सेक्स किया रात के दो बजे तक मैंने उनकी चोदा और उसके बाद मैंने उनकी चूत और गांड का हाल देखा तो मेरी आंखें फटी रह गई। मम्मी की गांड की छेद तो बिलकुल फैलकर भूरी से लाल हो गई थी।

उनकी चूत की हालत भी काफी खराब थी जहां तहां वीर्य के छोटे छोटे सूखे धब्बे लगे हुए थे उनकी झांटों पर भी वीर्य चिपका हुआ था जिससे उनकी झांटे आपस में गुत्थी हुई थी। शायद अभी तो नही लेकिन सुबह जब मम्मी जागेगी तो उन्हें गांड और चूत होने वाले दर्द से समझ आ जायेगा की रातभर उनकी चुदाई हुई है।

रात के दो बजे मैंने दादी को बुलाया और उनके साथ मिलकर मम्मी की गांड और चूत से बहते वीर्य को गीले कपडे से हमदोनो ने मिलकर साफ किया और फिर से मैंने और दादी ने मम्मी को उनकी नाईटी पहनाई और उन्हे बिस्तर पर ठीक से लिटा दिया।

फिर मैं और दादी आकार अपने अपने कमरे में सो गए। सुबह जा मम्मी उठी तो वो लंगड़ा लंगड़ा के चल रही थी। मैंने और दादी ने अंजान बनाकर जब मम्मी से पूछा की क्या हुआ है तो उन्होंने कहा कुछ नहीं बस पैर में चोट लगी है। सच बताऊं तो दोस्तों उनके चेहरे पर अजीब सा कंफ्यूजन था। वो सोच भी नही सकती थी की उनके सगे बेटे ने रातभर उनकी गांड और चूत जमकर चोदा था।

उम्मीद है दोस्तों आप सभी को मेरी ये कहानी पसंद आई होगी। कृपया कमेंट करके अपना बहुमूल्य सुझाव दें।

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