दादी की भोसड़े और गांड में पोते के लंड की मुहर

हैलो, दोस्तों आज मै आप सभी के साथ अपनी एक सेक्स स्टोरी जो एक हकीकत की घटना है। दादी की भोसड़े और गांड में पोते के लंड की मुहर आप सभी को बताने जा रहा हूँ। ये सब मेरे साथ अचानक से हो गया था, मुझे या मेरी दादी को कभी ऐसा होगा या होने की उम्मीद नही होगी, और जवानी के जोश में मैं अपने आप को संभाल नही पाया और मैंने अपनी सगी दादी की चुदाई कर दी।

दादी की भोसड़े और गांड में पोते के लंड की मुहर

मेरा नाम मनीष है। मै और मेरा परिवार भोपाल में रहते है। अभी-अभी मैंने अपने बचपने से जवानी में कदम रखा था। कुछ दिनों पहले ही मेरा 18 वा जन्मदिन बीता था, आप सभी को पता ही होगा इस उम्र मे जवानी चरम सीमा पर रहती है। सही गलत का ज्ञान नही रहता। मेरे परिवार मे दादी, मम्मी पापा छोटी बहन और मै हैं। 

तो मैं अपने फ़ोन पर हमेशा पोर्न, और सेक्स सटोरी पढ़कर मुठ मारा करता था, मूठ मार मार कर मेरा लंड मोटा और लम्बा हो चुका था, शरीर से भी मैं हट्टा कट्टा जवान गोरा लड़का हूँ।

बात गर्मियों के दिन के है गर्मी के दिन थे। हमारे गाँव के घर की मरम्मत के लिए मम्मी पापा गाँव जा रहे थे, पापा का मन था की पूरा परिवार गाँव चले इसी बहाने सब गाँव घूम कर भी आ जायेंगे।

पर सामने मेरी और बहन की परीक्षा थी। इसी लिये मैं दादी और बहन गाँव नही गये। हमारा ध्यान रखने के लिए दादी हमारे साथ रुक गयी। मेरी दादी की उम्र 65 साल की होगी। उनका शरीर थोड़ा हट्टा कट्टा था। उनकी चुतड़ों का साइज भी बड़ा है। एक दिन मैं और मेरी बहन को दोपहर का खाना खाने के लिये दादी ने आवाज़ लगाई।

दादी ने हम दोनो को खाना परोसा और खुद ठीक मेरे सामने कुर्सी पर अपनी टाँगे उपर करके बैठ गयी। और अखबार पढ़ने लगी। जब खाना खाते वक़्त मेरी नज़र दादी की तरफ गयी तो मुझे तेज़ झटका लगा पहली बार तो मैंने शर्म से अपनी नज़रे नीचे करली। पर दादी को नही पता था कि मुझे सीधे दादी का भोसड़ा दिखाई दे रहा है। फिर मेरे अंदर के शैतान ने मेरी नज़रो को दादी के भोसड़े की तरफ देखने को विवश कर दिया।

अब मैं भी चोरी-चोरी निगाहों से अपनी दादी के फुले हुए भोसड़े को देखने लगा। मेरा लंड टाइट होने लगा। जैसे तैसे मैंने अपने लंड को अपने हाथों से दबाया और खाते-खाते दादी के भोसड़े के नज़ारे लेने लगा। मेरे मन मे एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी थी। मेरा लंड पैंट में ही पानी छोड़ने और पसीजने लगा था।

दादी के पैर उपर करके बैठने की वजह से नीचे से उनकी साडी लटक कर नीचे हो गयी थी। जिससे उनका काली काली झांटो से घिरा हुआ भोसड़ा मुझे पुरा दिखाई दे रहा था। इतनी उम्र में उनकी चूत में कड़ापन नही था उनकी बूर ढीली और लचीली हो चुकी थी, अब उनकी चुत का भोसड़ा बन चुका था। उनके भोसड़े के फांकों मे से थोड़ी गुलाबी छेद भी खुल कर साफ दिखाई दे रही थी।

मेरा लंड अपनी दादी के भोसड़े को देखकर ललच गया था। जब तक खाना खतम नही हुआ तब तक मैं बीच बीच मे मैं दादी के भोसड़े को निहारता रहा। मेरा लंड पैंट के अंदर ही पानी पानी हो रहा था। और मन मे एक अजीब सी गुदगुदी के साथ वो एहसास ऐसा था, की मानो अभी ही मैं दादी को पटक कर चोद दु।

मैं खाना खा कर तुरंत बाथरूम मे गया और नंगा होकर अपने लंड को सहलाने लगा। मेरे दिमाग मे बस दादी की भोसड़े के नज़ारे आ रहे थे। मेरा लंड भी अपना पानी निकालने को बेकरार हो रहा था। मेरा लंड तनकर सीधा होकर नसे फुला चुका था, तभी मुझे बॉथरूम में पड़े गंदे कपड़ो की ढेर में मेरी माँ की चड्डी दिखी उस वक़्त मेरे मन में माँ के लिए भी हवस आने लगी, लेकिन अभी वो थी नही तो अभी मेरी दादी के भोसड़े ने मेरे दिमाग पर अपना कब्जा जमाया हुआ था, मैंने अपने लंड को कसकर मुट्ठी में पकड़ा और मुठ मारने लग गया,

मैंने अपनी माँ की चड्डी उठाई और माँ की चड्डी को सूंघने लगा माँ की चड्डी से उनकी बुर की मदमस्त भीनी-भीनी खुशबू आ रही थी। मैं चड्डी सूंघते हुए इतना उत्तेजित हो गया कि मैंने माँ की चड्डी के बीच वाले पट्टे जिससे चुत ढकती है उसी पर अपना माल निकाल दिया माँ की चड्डी मेरे माल से गीली हो गयी थी। मेरे लंड से इतनी तेज धार से माल गिरा की माँ की चड्डी से छलक कर थोड़ा माल जमीन पर फैल गया। मैं झड़ कर सांत हो चुका था। तो मैंने माँ की चड्डी को गंदे कपड़ो के बीच लपेट कर रख दिया और बाहर आ गया।

अब मुझे अपनी दादी के भोसड़े की चुदाई करने का मन करने लग गया था। पर मेरी दादी इस बात को राजी नही होती तो मैं दादी को चोदने के नए तरीके सोंचने लगा। रात को हमलोगो ने खाना खाया और सोने चले गये। मैं और बहन अपने अपने कमरे मे चले गये। और दादी हॉल मे सो गयी। मैं अपने कमरे में दादी को चोदने के तरीक़े सोंचकर अपने फोन पर Sex story पढ़ रहा था। कि तभी मुझे इस website पर ये कहानी- नींद में पड़ोसी दादी की बूर चुदाई का खेल कहानी पढ़ी तभी मुझे दादी को नींद में चोदने का ख्याल आया।

मेरा लंड उत्तेजित हो कर खडा हो चुका था। मुझे अपनी दादी के भोसड़े की याद आई मुझे दादी की बुर देखने का मन करने लगा। काफी रात हो चुकी थी मैंने सोचा एक बार दादी को देख आउ मैं उठा और दादी के पास चला गया।

दादी गहरी नींद मे सो रही थी। नींद मे दादी की दोनों टाँगे फैली हुई थी। हॉल मे हल्की सी रोशनी थी, पर साफ कुछ नही दिख रहा था। मैंने अपनी फोन के टॉर्च को चालू किया और धीरे धीरे करके दादी की साडी के नीचे से फोन को उनके साड़ी के अंदर घुसा दिया। और उनके पैरों के पास बैठ गया।

अब धीरे धीरे मैंने अपने फोन को उनके भोसड़े की तरफ बढ़ाने लगा। थोड़ी देर में मुझे उनकी वो मस्त छोटी झांटो से भरी भोसड़ा दिखने लगा। आहहह…..! क्या मस्त चूत थी। उनकी चूत के उपर की झांटे बड़ी बड़ी थी और उनकी चूत के किनारों के बाल काफी छोटे छोटे थे। दादी की चुत दिखते ही मेरा लंड टावर की तरह खड़ा हो गया मैं दादी के भोसड़े को चोद कर उसपर अपने लौड़े जवान कड़क लंड की मोहर लगाना चाहता था।

ये सब सोचना आसान था, पर उनकी चुदाई करने में मुझे काफी डर लग रहा था। कही दादी जाग गयी तो क्या करेगी यही सोच कर मैं रूक गया। लेकिन मौका हाथ से निकलने का डर भी था, तो मैंने हिम्मत करके उनकी साडी को धीरे-धीरे कर पुरा उनकी कमर तक उठा दिया और अब मुझे उनकी नंगी चूत के साथ उनकी गाँड़ की सिकुडी हुई छेद भी दिखाई देने लगी। अब मुझसे नही रहा गया। मैं उनके पैरों के बीच मे आ गया और अपनी पैंट सरका कर अपनी जांघों पर कर दी। 

मैं दादी के खूलेआम भोसड़े को देख कर मुठ मारने लगा। देखते ही देखते मेरे लंड से गाढ़े माल की पिचकारी निकलने लगी। मैंने अपना सारा माल दादी के भोसड़े पर निकाल दिया 5 मिनट तक मेरे लंड से वीर्य की धार बून्द बून्द में निकल कर दादी के भोसड़े को नहला रही थी। मेरा माल सीधे दादी के भोसड़े पर टपक रहा था।

मेरा वीर्य उनकी भोसड़े के फांको के दरारों से होता हुआ उनकी गाँड़ से नीचे टपक रहा था। मुझे ये करके बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मेरी हिम्मत बढ़ चुकी थी, मैंने आज ठान लिया था कि मैं दादी के भोसड़े की चुदाई करके रहूँगा। फिर मैं उनके टांगों के बीच लेट गया और ढेर सारा थूक उनके चूत पर लगा दिया। उनकी चुत तो पहले से ही चिपचिपी थी ही एक उंगली से उनकी चुत में थोड़ा ज़ोर लगाया तो उँगली सट से उनके भोसड़े के अंदर चली गयी।

मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा और मेरी साँसे भी तेज हो गयी। थोड़ी घबराहट के साथ मन में अजीब सी गुदगुदी होने लगी साथ ही दादी के भोसड़े की गर्माहट ने मेरी उँगली और शरीर दोनों को मस्त कर दिया। लेकिन मैंने खुद को हिम्मत दी और धीरे-धीरे मैं अपनी उंगली उनके भोसड़े मे अंदर बाहर ठेलने लगा। मेरी उंगली दादी की चूत की गर्माहट महसूस कर रही थी। मेरा लंड फिर से तन कर तैयार हो गया था।

थोड़ा डरते हुए मैंने अपनी पैंट पूरी उतार दी। और अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर दादी के ऊपर अपने हाथों के सहारे सीधा हो गया अब मेरा लंड दादी के भोसड़े के नजदीक आ गया और उनके चुत के दाने पर लगने लगा। शायद दादी को इससे गुदगुदी हुई और वो थोड़ा सा हिली जिससे मेरा लंड घप्प से दादी की चुत में घुस गया। अचानक लंड उनकी चुत में जाने से मुझमे करंट दौड़ गया।

उनके भोसड़े के गरम भट्ठे ने मेरे लंड को अपनी आग़ोश में ले लिया था। कुछ देर मैंने वैसे ही इंतज़ार किया जब दादी ने कोई हरकत नही की तो मेरी जान में जान आयी वैसे दादी के भोसड़े को मेरे मोटे लंड से भी कुछ फर्क नही पड़ता क्योंकि दादी ने न जाने कितनी बार लंड खाया था अब तो उनकी चुत का भोसड़ा बन चुका था।

अब मैं दादी की चुत में लंड हिलाने लगा जब लगा कि सब ठीक है तो मैंने दादी के भोसड़े में अपना लंड अंदर बाहर करके ठेलने लगा मैं एक बार लंड अंदर बाहर करने में 4-5 सेकेंड का वक़्त ले रहा था। जिससे मुझे चरम सुख मिल रहा था। यानी मैं दादी के भोसड़े को softcore के हिसाब से चोद रहा था। चोदते-चोदते दादी के भोसड़े में ही मेरा पानी निकल गया। और कुछ देर बाद जब मैं अपना लंड उनकी चुत के अंदर बाहर निकलता तो लंड के साथ साथ दादी के लचीले भोसड़े से वीर्य के छोटे-छोटे बुलबुले निकलने लगे और उनकी चुत से वीर्य बाहर बहने लगा।

थोड़ी देर बाद मैंने थोड़े तेज झटके लगाने शुरू किये। मुझे दुबारा चरम सिमा का सुख मिल रहा था। मैंने उत्तेजना मे दादी के एक जांघ को अपनी बाँहो मे भर कर ऊपर उठा लिया और दादी की चुत में तेज झटके देने लगा। मेरा लंड दादी के भोसड़े में तेज़ी से चोट मारने लगा जिससे से पलंग से चर्च्चराने की आवाज़ आने लगी। दादी भी हरकत करने लगी दादी नींद में ही आ..आ..ई..ह..ह करने लगी पर मैं इतना उत्तेजित था कि मैं किसी अंजाम के बारे में नही सोंच रहा था। बस अपने लंड से उनके भोसड़े में चोट कर रहा था।

एक तेज़ धक्के से दादी की नींद खुल गयी वो पूरे होश में आ गयी। उनकी सीधी नजर मुझपर गयी, मुझे उनकी चूत चोदते हुआ देख। दादी घिसट कर पीछे हुई मेरा लंड उनकी चुत से बाहर आ गया। उसके बाद दादी ने गुस्से से ऊंची आवाज में कहा ये क्या कर रहा है?? मैं डर से सहम सा गया वो गुस्से से मेरी तरफ देख रही थी। मेरा लंड डर के मारे सिकुड़ कर छोटा हो गया था। फिर दादी अपने माथे पर हाथ रख अपने भोसड़े की हालत देखने लगी। और अपना भोसड़ा पोछते हुए मुझे डांटती फटकारती रही थी।

मैं चुपचाप उनकी डांट सुनता रहा वो मुझे खरी खोटी सुनाती रही मैं कुछ नही बोल रहा था बस अपनी नज़रे नीचे झुकाए बैठा रहा नज़रे उठाने की हिम्मत ही नही हो रही थी। अचानक से कमरे में चुप्पी साध गयी। दादी एकदम चुप सी हो गयी।

दादी अधनंगी हालत मे बिस्तर पर लेट गयी और मैं भी अपना मन छोटा करके उनके पैरों के पास पड़ा था। तब दादी थोड़े गुस्से में बोली ये सब किसी को बताना मत वरना तेरी और मेरी बदनामी हो जाएगी।मैंने भी हम्म् करके जवाब दिया। तब अचानक दादी ने जो कहा मुझे उनकी बात पर बिश्वास नही हुआ। दादी बोली “तेरा मन भरा या नही” पहले तो मुझे कुछ समझ नही आया की दादी क्या बोल रही है। मैं चुप ही था।

फिर से दादी ने पूछा “कि तेरा मन भरा या नही और करना चाहता है?? मैंने हिम्मत से हाँ में सर हिलाया!! “दादी बोली मेरी बूर का तो सत्यानाश कर ही चुका है अब मन भरने तक बाकी जो करना है वो करले किसी को नही बोलूँगी।”

मैंने पक्का करने के लिए की दादी मानी है या नाटक तो नही कर रही ” मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ उनके जांघ पर रखा और उनके जांघ को थोड़ा दबाया और जब दादी ने कुछ नही कहा तो मेरी हिम्मत बढ गयी मैं दादी की जांघ को चाटने लगा और फिर मैंने दादी की दोनों जांघो को पकड़ा और उनकी जांघो को फैलाकर अपना सर उनकी दोनों जांघो के बीच उनके पेट के नीचे उनके भोसड़े पर लगाकर उनकी चुत को चाटने लगा।

जिससे दादी भी अपनी तरफ से बढ़ावा देने लगी। वो भी उम्ह उम्ह आऊह आऊह ओह्ह कर मेरे सर को अपने चुत पर दबाते हुए मेरे सर को सहलाने लगी। फिर मैंने उनकी दोनों टांगों को फैला दिया। और अपना मोटा तगड़ा लंड लेकर उनके उपर चढ़ गया। मैंने अपना लंड उनके भोसड़े की छेद पर लगाया और एक ही धक्के मे जड़ तक लंड उनके भोसड़े मे घुसा दिया।

इस ज़ोरदार धक्के से दादी के मुँह से उम्मह..आ उम्मह..आ उई मआआह निकल गयी। मैं उनके भोसड़े को तेज धक्के दे कर चोदने लगा। दादी मुझे गालियाँ देने लगी धीरे से कर मादररचोद…. इतनी तेजी से तू अपनी रंडी माँ को चोदना कुत्ते आराम से कर ये तेरी माँ की जवान चुत नही तेरी दादी की बूढ़ी चुत है रे आरआरम से.. कर

मैं उनकी गालियों से और उत्तेजित हो गया और मैं उनके भोसड़े को तेज धक्के दे कर चोदने लगा। पुरे हॉल मे पलंग की चर्चराहट और उनके भोसड़े में तेज़ी से लंड जाने की घापा घप्प…. घप्प… फच्च फच्च… की आवाजें गूंजने लगी। मेरा पानी निकलने वाला था। तो मैंने दादी से पूछा अंदर निकाल दूँ। तो दादी ने हाँ मे इशारा किया। फिर मैंने दादी को ज़ोर से अपनी बाहों मे भर लिया और अपनी कमर को तेज़ी से हिला हिला कर लंड को उनके भोसड़ मे पेलने लगा।

3–4 धक्कों मे मेरे लौड़े ने सारा वीर्य दादी के भोसड़े मे निकाल दिया। फिर मैंने अपने लंड को उनकी चूत से निकाल लिया। और दादी उठकर अपने भोसड़े को साफ करने लगी।

जब उनकी नज़र मेरे माल से सने मोटे लौड़े पर गयी तो दादी ने मुस्कुराते हुए कहा तेरा लंड तो काफी तंदरुस्त है। वो मेरे लंड को अपने हाथ मे ले कर उसे निहारने लगी। मैं भी बैठकर उनकी गांड के पीछे हाथ लगा दिया और दादी की बड़ी सी गांड को सहलाने लगा। तब मैंने अपनी एक उंगली दादी गांड की छेद मे डालने की कोसिस करने लगा। पर दादी ने मेरा हाथ झटक कर हटा दिया। बोली नही यहाँ नही दर्द करता है। मैंने कहा बस एक बाद दे दो। 

तो दादी हस्ते हुए बोली जा अपनी माँ की गांड चोद बहुत बड़ी गांड है रंडी की उसे जा के चोद मैंने कहा कि वो मुझे चोदने देगी?? तो दादी ने कहा कि मुझे जैसे चोदा उसे भी वैसे चोद मैंने कहा मन तो करता है पर पापा को बोल देगी। दादी बोली वो क्या बोलेगी उसे बस मोटा तगड़ा लंड चाहिए वो तेरी माँ एक नंबर की चुदक्कड़ है। मैंने दादी से कहा कि दादी आप मेरी मदत करोगी माँ को चोदने में तो दादी चुप हो गयी।

फिर कुछ देर बाद बोली उसे गाँव से आने दे और जब तेरा बाप काम के सिलसिले में बाहर जाएगा तब उसे देख लेंगे। दादी और माँ में ज्यादा नही बनती वो दोनों आपस में झगड़ते रहते थे। मैं खुश हो गया कि दादी मुझे मेरी माँ की चुत दिलवाएगी। बातें करते हुए मैं दादी की गांड को सहलाता रहा और उनकी गांड की छेद में उँगली मारकर बोला दादी बस एक बार दे दो

मैं बोला!! आपका भोसड़ा तो ढीला है मज़ा नही आया। कम से कम बस एक बार अपनी टाइट गांड मारने दो। फिर कभी नही माँगूंगा। बहुत देर पटाने के बाद दादी मान गयी। दादी ने कहा बस थोड़ी देर मैंने भी हाँ ठीक है कहा। उसके बाद मैंने दादी की साडी और पेटीकोट उतार दी। और उनको पेट के बल लेटा दिया जिससे उनकी बड़ी गांड उपर की तरफ हो गयी।

फिर मैं उनके बगल मे 69 पोजिसंन् मे लेट गया और दादी को अपना लंड खडा करने को कहा। दादी मेरे लंड को अच्छे से तैयार करने लगी। और मैं अपने दोनों हाथों से उनके बड़े चुतड़ों के भागों को फैला कर उनकी गांड की छेद पर थूक लगाने लगा। करीब 10 मिनट मे मेरा लंड खडा हो चुका था। फिर मैंने अपने लंड को दादी के चुतड़ों के बीच रगड़ते हुए उनकी गांड की छेद पर सेट किया और दादी के उपर लेट गया। जब मेरे शरीर के वजन से मेरा लंड जबरदस्ती दादी की गांड मे घुसा तब दादी का दर्द के मारे चीखें निकल गयी।

दादी हाय माआह ह ह मर गई रे अरे बाप रे निकाल इसे मेरी गांड मे बहुत दर्द हो रहा है। मेरे लंड ने दादी की कसी हुई गांड फाड़ दी थी। ऐसा सालों बाद उनकी गांड की चुदाई होने के कारण हो रहा था जब तक मेरा लंड पुरा अंदर नही गया तब तक मैं उनकी गांड पर अपने कमर का दबाव डाल रहा था। थोड़ी देर बाद दादी सांत हो गयी। फिर मैंने अपने एक हाथ को उनके सीने के नीचे डाल कर उनको अपने सीने पर दबा रहा था। 

एक हाथ से मैं दादी के भोसड़े के दाने और चुत के पट्टो को सहला रहा था। मैं अपनी कमर को तेज गति मे उछाल कर उनकी गांड चोद रहा था। वो आ आ आ आ ह ह ह ह ह कर चिला रही थी। मैं अपना लंड उनकी गांड से निकाल कर एक धक्के मे ही पुरा का पुरा लंड उनकी गांड मे डाल रहा था। वो चित लेटी हुई अपनी गांड में मेरा लंड खाये जा रही थी, जब मैं दादी की चौड़ी गांड पर अपनी कमर पटक रहा था,

तब तब दादी के मुँह से कराहें आह..आह…आ निकल रही थी, और उनकी गांड पर जब मेरी कमर टकरा रही थी तब तब उनकी गांड दबकर और भी चौड़ी हो रही थी, और पूरे कमरे में गांड से कमर टकराने की ठप,ठप, ठप की आवाज एक लय में निकल रही थी।

मैं दादी की गांड चोदते-चोदते मैं आह.. आह… करते हुए तेज फुहारें के साथ उनकी गांड मे ही झड़ गया। और एक घंटे तक मैंने दादी की गांड में लंड डाले हुए दादी को अपने नीचे लिटाये रखा मेरा लंड जड़ तक दादी की गांड में धसा हुआ था, जब मैंने अपनी दादी की गांड से अपना लंड निकाला तो देखा दादी की गांड की छेद फैल चुकी थी और उनकी गांड के अंदर की लाल गुद्दा और मेरे लंड का माल दिख रहा था।

अब मेरी दादी के भोसड़े और गांड पर मेरे लंड ने अपनी छाप छोड़कर अपने जीत की मुहर लगा दी, अब दादी की गांड और चुत को मेरे लंड की नज़र लग चुकी थी, मैं शुरू के दिनों में रोज दादी को चोदने लगा, जब भी दादी अकेली दिखती तो मैं उनको चोद देता भले ही 5 मिनट के लिए मैं उनको छत पर ले जाकर खड़े-खड़े ही उनकी चुत और गांड चोद लेता हूँ। ये थी दादी की भोसड़े और गांड में पोते के लंड की मुहर और एक बात मेरी मम्मी को मेरी दादी ने सारी रात चुदवाया और मेरी मम्मी को पता भी नही चला

तो दोस्तों कैसी लगी आपको मेरी ये कहानी उम्मीद है आपको अच्छी लगेगी। कहानी थोड़ी लंबी है पर आप सभी को मज़ा आएगा। अगली कहानी में बताऊँगा की कैसे मैंने दादी की मदत से अपनी मम्मी को चोदा।