छोटे भाई के लंड से जमकर अपनी बूर चुदवाई

मेरा नाम सविता है। मेरी उम्र 28 साल की है। हमारा परिवार एक गरीब परिवार हैं। मेरे परिवार मे मैं मेरी माँ और बापू और एक छोटा भाई है। मेरे भाई की उम्र 22 साल हैं। मेरे बापू मेरी शादी को लेकर बहुत परेसान रहते थे। 

क्यों मेरे बापू के पास दहेज देने के लिये पैसे नही थे। इसीलिये मेरी शादी नही हो पा रही थी। मेरी उम्र की सारी लड़कियों की शादी हो चुकी थी।

एक दिन मेरे लिये रिश्ता आया वो बहुत पैसे वाले थे। और उन्हें दहेज नही चाहिये था। मेरे बापू ने भी उस रिश्ते के लिए हाँ कर दी। जब मुझे पता चला की मेरा होने वाला दुल्हा एक 50 साल का बुड्ढा था। मेरे सारी खुशी ही चली गयी मैं फूट फूट कर रोने लगी।

मेरे बापू ने मुझे समझाया की वो दहेज दे कर मेरी शादी नही करवा सकते क्यों की हमारी दहेज देने की हैसियत नही थी। मैंने भी अपनी किस्मत पर रोते हुए शादी के लिये मान गयी। शादी करने के बाद मै अपने ससुराल चली गई। लेकिन मै अपनी शादी से खुश नही थी।

मेरी सुहागरात वाले रात को जब मेरे पति ने जब मेरा घूँघट उठाया और मुझे चूमने चाटने लगे तभी थोड़ी देर बाद मै भी उनका साथ देने लगी। भला मै कब तक अपने आप को रोक पाती। धीरे धीरे मेरे पति ने मेरे सारे कपड़े उतार दिया। और मेरे चुचियों को मसल कर चूसने लगे मै भी ऊतेजना से भर गयी।

वो मेरी चुतड़ों और मेरे जांघों के बीच मे हाथ डाल कर सहलाने लगे मै चरम सीमा पर पहुँच चुकी थी। बस यही सोच रही थी कि कब वो अपने लंड से मेरी बूर के नथ को तोड़ कर अपना लंड अंदर डालेंगे। मैं लंड लेने के लिए तड़प रही थी।

उस वक़्त मै हमारे उम्र के बीच के अंतर को भुला चुकी थी। उन्होंने अपना पजामा निकाल दिया। जैसे ही मेरी नज़र उनके लंड पर पड़ी मेरी सारी उम्मीद चूर हो गयी। इतनी देर मुझे चूमने चाटने के बाद भी उनका लंड एकदम ढीला था।

उनकी झांटे भी सफेद हो चुकी थी। फिर उन्होंने अपना लंड मेरी बूर मे सेट किया और 2–3 धक्कों मे ही मुझे मेरी बूर पर चिपचिपा पानी महसूस हुआ। मैंने सोचा चलो बूढ़ा ही सही पर लंड तो घुसेगा मेरी चुत में पर मेरी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया, वो मेरी चुत के दरवाज़े पर ही अपना लंड पटक रहे थे, मैंने देखा की उनके लंड से पानी निकल रहा था। और वो बुरी तरह हांफ रहे थे। उसके बाद वो मेरे बगल मे लेट कर सो गये।

मेरी सारी उम्मीद टूट गयी मेरी शादी ऐसे इंसान से हो चुकी थी। जो मुझे शारीरिक सुख भी नही दे सकता था। अभी तक उसका लंड ठीक से मेरी बूर मे घुसा भी नही था की उसका पानी निकल गया। मैं पूरी रात बिस्तर पर पूरी नंगी लेटी अपनी किस्मत को कोसते हुए आँसू बहा रही थी।

करीब 6 महीनों तक वो मुझे बस इतना ही चोदते मेरी बूर मे उनका लंड दाखिल होने से पहले ही उनका पानी निकल जाता था। और मै चुदाई की आग मे हमेशा तड़पती रहती। ज़ाहिर है की वो मुझे औलाद का भी सुख नही दे पा रहे थे।

एक दिन मुझे अपने माइके से बुलावा आया। मेरे पति ने भी मुझे मेरे माइके से घूम आने को कहा और मै अपने माइके चली गयी। मेरे मन मे भी गुस्सा भरा हुआ था। मै जब अपने घर पहुंची तो अपने पिता से खूब झगड़ी और बोली की ऐसी शादी से तो मै सारी उम्र कुवारी रहती तो अच्छा होता।

बापू चुप चाप मेरी खरी खोटी बातें सुन रहे थे। जब मै रात को दुखी मन से गुम सुम बैठी थी, तभी मेरा छोटा भाई आया और मुझे दुखी देख मुझे चुटकुले सुना कर खुश करने की कोशिश करने लगा। पर मेरा दुख उसकी चुटकुलों से खतम नही होने वाला था।

जब मैंने उसकी मुझे खुश करने लगातार कोसिस को देखा तो मै उसकी तरफ देख कर थोड़ा मुस्कुरा दी। पर अंदर से तो मेरी आत्मा दुखी थी, और चुदाई के आग में जल रही थी।

तभी हमारे पास माँ आई और बोली की तुम दोनो भाई बहन एक साथ कमरे मे सो जाना जैसे पहले सोते थे, हमारे झोपड़ी मे सिर्फ दो ही कमरे है। इसी लिए एक मे माँ- बापू और दूसरे कमरे मे हम दोनो सोने चले गये।

हम दोनो एक ही बिस्तर पर लेट गये। अभी तक मेरे मन मे मेरे भाई के लिये कोई वैसे ख्याल नही थे। सोने से पहले हम दोनो ने इधर उधर की बातें की उसके बाद भाई सो गया। मैंने भी दूसरी तरफ करवट ली और सोने की कोशिश करने लगी पर बार — बार मुझे चुदाई के ख्याल आने लगे।

मेरी बूर और चुचियाँ जैसे भट्ठी में जल रही हो मैं चुदाई के आग में अपनी होठों को चबाती हुई अपनी छातियों और बूर को धीरे-धीरे मसलने लगी। मेरे मन में बेचैनी होने लगी। मै सोचने लगी काश कोई जमकर मेरी चुदाई करता। मेरे अंदर वासना जाग रही थी। मेरे हाथ मेरी छातियों को मसलने लगे। मै अपने होंठों को अपनी दांतों से दबाने लगी। 

फिर मैंने अपने एक हाथ से अपनी साडी उपर सरका कर अपने एक हाथ से अपनी बूर मे उंगली करने लगी। जब बीच मे मैंने अपने भाई की तरफ मुड़ कर देखा तो वो सो रहा था। पर जब मेरी नज़र उसके लंड पर गयी तो मै डर गयी, की कही वो मुझे सब करता देख तो नही रह था। उसका लंड उसकी पैंट मे ही किसी मोटे केले की तरह फुल टाइट और खड़ा हुआ था।

उसके लंड की हालत देख कोई भी समझ जाता कि उसकी पैंट में क्या हो रहा था,किसी को भी पता चल जाता की उसका लंड खडा हुआ है। मुझे शक हुआ की कही वो जाग कर मुझे अपनी बूर मे उंगली करते हुए तो नही देख रहा था। मुझे शर्म सी होने लगी। पर मैंने उसे धीमे से आवाज़ दे कर और उसे चिमटी काट कर देखा तो ये पक्का हुआ की वो सो रहा है।

शायद वो भी चुदाई के सपने देख रहा होगा जिससे उसका लंड खडा हो चुका था। अब मुझमे जान आई की भाई ने मेरी करतूत नही देखी लेकिन अब मुझे मेरे भाई के लंड का नशा चढ गया था। मेरी नियत डगमगा गयी थी। मैं अपने भाई का मोटा तगड़ा लंड अपनी बूर मे डालना चाहती थी। पर मुझे डर लगता की कही भाई मेरे बारे मे क्या सोचेगा। 

अब मुझसे बर्दाशत नही हो पा रहा था, मेरे भाई ने पतली सी पैंट पहनी थी वो अभी तक अंदर चड्डी नही पहनता था। जिससे उसका मोटा सा लंड उसकी पैंट मे से साफ झलक रहा था। मैं उसके लंड की गर्मी लेना चाहती थी। उसके लंड की गर्माहट को अपने बूर पर महसूस करना चाहती थी।

तभी मुझे एक ख्याल आया। मेरा भाई पीठ के बल गहरी नींद मे सोया हुआ था। और उसका खड़ा लंड आसमान की ओर पैंट में तंबू बनाये खड़ा था, जिससे मुझे उसके लंड के मजे लेने में और आसानी हुई। मैंने भी करवट बदल कर अपनी भाई की तरफ मुँह करके लेट गयी। 

और धीरे से अपनी एक टाँग पर से साडी को अपनी जांघ तक हटा लिया जिससे मेरी एक टाँग पूरी नंगी हो गयी अब मैंने अपनी नंगी टांग को अपने भाई के कमर के दूसरी तरफ रखा और अपनी कमर को उसकी कमर पर आधा चढ़ा दिया, जिससे मेरे भाई का लंड ठीक मेरी बूर के नीचे आ गया।

मुझे शर्म भी आ रही थी और डर लग रहा था पर उस वक़्त मैं वासना में चूर थी। अब मेरी एक पूरी नंगी टांग मेरे भाई के शरीर पर थी। और मैं अपनी बूर को अपने भाई के लंड के सीध मे ला कर उसके लंड पर अपनी बूर को दबाने लगी।

थोड़ी देर तक जब भाई ने कोई हरकत नही की तो मेरी हिम्मत और बढ़ी और अब मैंने अपने भाई के सीने पर सर रख कर उसे अपने बाँहो मे भर लिया। और अपनी बूर को उसके मोटे और गरम लंड पर रगड़ने लगी उसके लंड के गर्माहट से मेरी बूर ने पानी छोड़ दिया, मेरी बूर से लार बहने लगा।

उसका लंड एक दम कड़क और गरम लोहे की तरह मेरी बूर को जला रहा था। मुझमे और बर्दास्त करने की छमता नही रही। मुझे उसके मोटे लंड को अपने हाथ मे लेकर उसके लंड को देखना था।

मैं उठ कर बैठ गयी और आहिस्ते से उसके पैंट को खींच कर नीचे कर दिया। देखते ही देखते उसका मोटा सा काला लंड जो घनी झांटो से घिरा हुआ था। वो मेरी नज़रों के सामने था। डर के मारे मेरा गला सुख रहा था। 

मैंने हिम्मत करके उसके लंड को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और लंड के उपर के चमड़े को उपर नीचे करने लगी। भाई के लंड मे से भीनी भीनी मदहोस करने वाली खुशबू आ रही थी। उसका लंड मोटा होने के कारण मेरी मुट्ठी मे नही समा रहा था। उसका लंड देखते ही मेरी आँखों मे चमक आ गयी मैंने पहले कभी इतना मोटा लंड नही देखा था,

फिर मैंने उसके लंड पर अपना ढेर सारा थूक उगल दिया और उसके लंड की चमड़ी ऊपर नीचे खिसका के लंड की मुठ मारने लगी मैं ये सब धीरे धीरे कर रही थी। ताकि भाई की नींद ना खुल जाये। करीब 15–20 बार चमड़ी खिसकते ही उसके लंड ने ढेर सारा गाढ़ा चिप चिपा वीर्य मेरी मुठ्ठी में ही छोड़ दिया। मेरी मुट्ठी उसके माल से भर गई थी,

मैंने उसके सारे वीर्य को अपनी बूर पर लपेट लिया और उसके उसके वीर्य से अपनी बूर की मालिश करने लगी 15 मिनट मैं उसके वीर्य से चिकनी उंगलियों को अपनी बूर में घुसाती रही फिर मेरी बूर ने भी पानी छोड़ दिया।

फिर मैं अपने और अपने भाई के कपड़े ठीक करके सो गयी। अगली सुबह जब मैं उठी तब से मुझे मेरे मन मे अपने भाई के लंड के ख्याल आने लगे। मेरा भाई मुझसे पहले की तरह ही बातें कर रहा था। उसको रात को जो भी हुआ उसके बारे मे पता नही चला था।

मैं उसके लंड से अपनी बूर की चुदाई की चाहत पूरी करना चाहती थी। मैंने निस्चय किया की आज की रात मैं भाई के लंड से अपनी बूर चुदवा कर रहूँगी। चाहे जो भी हो। रात हुई सब ने खाना खाया और अपने अपने कमरे मे चले गये। 

मैं और भाई भी अपने कमरे मे चले गये। थोड़ी देर हमने हँसी मजाक किया और भाई सो गया करीब 2 घण्टे बाँध रात के 12 बजे मैंने फिर से अपनी एक टाँग से साड़ी हटा दिया। जिससे मेरी एक टाँग पूरी कमर तक नंगी हो गयी।

मेरी बूर की झांटे भी आधी दिखने लगी। फिर मैंने अपनी पैर को उसके पैरो पर ऐसे रखा की मेरी जांघ उसके कमर पर रहे और मेरी बूर ठीक उसके लंड पर रहे। और ऐसा नाटक किया की अगर भाई जाग जाए तो उसे लगे की मैं नींद मे हूँ।

मैं वैसे ही लेट कर अपनी बूर की गर्मी उसके लंड पर डाल रही थी। और उसका लंड भी धीरे धीरे खडा और बड़ा होने लगा था। मुझे सब महसूस हो रहा था। पर मैं उसके लंड के पूरे विकृत रूप मे आने का इंतज़ार कर रही थी। आज जान बुझ कर मैंने अंदर ब्रा नही पहनी थी। 

मैंने अपने ब्लाउस के उपर के 2–3 हूक को खोल दिया जिससे मेरी ब्लाउज मेरी चुचियों को संभालने में असफल हो जाये मेरी बड़ी-बड़ी चुचियाँ भी बाहर आने को बेकाबू हो रही थी। मैं अपनी छातियों को भाई के कंधे पर दबाने लगी।

अब तक मेरे भाई के लंड ने अपना बड़ा आकार ले लिया था। अब इंतेज़ार खतम करने का सही समय आ चुका था। मुझे ये सब करते हुए डर लग रहा था। लेकिन मेरी हवस के आगे डर कुछ नही था, मैंने अपने हाथ से उसकी पैंट खींच कर नीचे कर दी।

जिससे उसका लंड अब आजाद हो चुका था। मैंने अपने हाथ मे अपना थूक लिया और अपनी बूर पर लगा दिया। मैंने उसके लंड को पकड़ कर अपनी बूर के छेद पर लगाया। और थोड़ा पीछे खिसक कर अपनी बूर मे उसका लंड घुसाने की कोशिश करने लगी। जब बहुत कोशिशों के बाद भी लंड मेरी बूर के अंदर नही गया। तो मेरी सब्र का बांध टूट गया।

मैं बिस्तर से उतर कर खड़ी हो गयी। और अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई। फिर मैं अपने भाई के लंड के पास बैठे उसके लंड को निहारने लगी। मैंने उसका लंड अपने हाथों मे लिया और उसके लंड को चूसने लगी। उसका लंड मेरे मुँह मे नही समा पा रहा था।

जब मैं उसके लंड को से चूसने लगी। जब मेरी थूक से लिपटा उसका लंड जब मेरे मुँह के अंदर हो रहा था तो मेरे मुँह से फअच् फअच् फच् फच् की आवाज़ आने लगी। मेरा मुँह उसके लंड के नमकीन पानी और मेरी थूक से भर चुका था। मुझे अपने भाई का लंड चूसने मे मज़ा आ रहा था। अब उसका लंड एक दम कड़क हो चुका था।

मुझे उम्मीद थी कि मेरा भाई जाग जाएगा पर मैं ठान चुकी थी कि अगर वो जाग भी गया तो मैं खुलकर उसे मेरी बूर चोदने को कहूंगी। मुझे ऐसा बिस्वास भी था कि मर्द मर्द होता है जब उसके सामने औरत की मर्जी से नंगी चुत का प्रसाद हो तो वो चोदेगा ही।

पर अभी भी उसकी आँखें बंद थी वो अब भी शायद नींद मे था। अब मेरी बूर भी चुदाई के लिए तैयार थी। मैंने थूक से अपनी बूर गीली की और अपने भाई के लंड को एक हाथ से पकड़ कर अपनी बूर के फांकों मे रगड़ते हुए छेद मे डाला जैसे ही लंड का आगे का थोड़ा हिस्सा बूर मे घुसा तो दर्द से मेरी हालत बिगड़ने लगी मुझे बहुत दर्द हुआ ऐसा लगा मानो कोई मेरी चमड़ी चीर रहा हो। 

मेरे भाई का लंड मेरे उस बूढ़े पति से ढाई गुना मोटा था। दर्द के कारण मैं उतने मे ही रुक गयी। जब मेरा दर्द कम हुआ तब मैंने लंड को थोड़ा और अपनी बूर मे दबाया थोड़ा थोड़ा करके उसका लंड मेरी बूर की दीवारों को चीरते हुए मेरी बूर मे धस चुका था।

मेरे बूर की सील और फैल गयी थी और मेरी बूर में थोड़ी जलन हो रही थी, उसका गरम लंड मेरी बूर की जलन और भी बढ़ा रहा था, उस वक़्त उसका लंड किसी गरम लोहे जैसा महसूस हो रहा था। कुछ देर बाद मेरी बूर का दर्द खत्म हो गया, अब मैं धीरे धीरे उसके लंड पर उठने बैठने लगी। मेरी हर एक बैठक के साथ उसका गठीला लंड मेरी बूर मे और अंदर तक समा रहा था। 10–15 बार की उठ बैठा के बाद मेरी बूर ने अपना माल निकाल दिया।, मैं भी झड़ते वक़्त उसके लंड को अपनी बूर में ऐंठने लगी।

झड़ने साथ ही मेरी बूर ढीली हो गयी। मैं और जोश मे अपनी गाँड़ उछाल उछाल कर अपनी बूर मे उसका लंड लेने लगी। मेरी मुँह से सिसकरियाँ निकलने लगी पर मैंने अपनी आवाज को अपने अपने होठों से दबा लिया। 

मेरी बूर पानी छोड़ने के बाद गीली होने की वजह से जब भी भाई का लंड मेरी बूर मे अंदर बाहर होता। तब मेरी बूर से हवा निकलने की फच्च फच्च.. फूच फच्.. फच् फर र फर र.. की तेज़ आवाज निकलने लगी। मैं इतनी गरम हो चुकी थी कि मैं उन बातों पर ध्यान ही नही दे रही थी, बस मैं अपनी बूर में घुसते लंड को ही ताक कर अपनी हवस मिटा रही थी,

तभी भाई की नींद भी खुल गयी। उसने अपना लंड पकड़ा और खींचकर मेरी बूर से निकाल दिया, और मुझे अपने उपर से झटक कर हटा दिया। और बिना कुछ बोले अचंभित नज़रो से मुझे देखता रहा।

मैंने उसका लंड फिर से अपने हाथ मे पकड़ लिया और चूसने लगी। वो हैरानी भरी निगाहों से मुझे देख रहा था। मैंने उसे बिस्तर पर पटक कर उसके उपर चढ़ गयी। मैं उससे थोड़ी देर की खुशी मांगने लगी। और मैं उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी मैं किसी भी तरह से उसके लंड को अपना बनाना चाहती थी।

वो चुप चाप लेट गया मैं उसके होंठों को चूमने लगी पर वो कोई हरकत नही कर रहा था न ही मुझे रोक रहा था। मैंने फिर से उसके लंड को चूस चूस कर खडा किया। फिर मैंने उसके मोटे लंड को अपने बूर की छेद पर लगाया। और धीरे धीरे अपनी कमर को उसके लंड पर दबाने लगी जिससे उसका लंड फिर से मेरी बूर की गिरफ्त मे आ गया।

लंड बूर में जाते ही मेरे भाई के मुँह से आंनद भारी आवाज निकली आह ह ह ह…. मैं भी समझ गयी कि उसे भी मज़ा आया। मेरे बूर मे भी दर्द हो रहा था। फिर मैंने अपनी बड़ी बड़ी चुचियों को उसके मुँह मे दबाने लगी। और एक तरफ अपनी गांड उछाल कर लंड को बूर के अंदर बाहर करने लगी।

मैं ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर उछलने लगी अब मुझे कोई डर शर्म नही थी, शायद पहली बार उसका लंड किसी औरत की बूर चुदाई कर रहा था। मेरे ज़ोर-ज़ोर से उछलने के कारण उसके लंड की चमड़ी पलट गई उसके लंड की सील खुल गयी थी। जिससे उसको दर्द हो रहा था। पर उसकी चींख को मैंने अपनी चुचियों से दबा दिया। हमारी चुदाई से पूरे कमरे मे ठप ठप फच् फच् की आवाज़ भर गयी।

मैं मस्ती से अपने भाई के लंड से चुद रही थी। थोड़ी देर बाद उसका सारा पानी मेरी बूर मे ही निकल गया। मैं भी अभी तक तीन बार झड़ चुकी थी। हम थक चुके थे। पर मेरी इतने दिनों की चुदाई की आग अभी भी सांत नही हुई थी। रात के करीब 2 बजे थे मैं फिर से उसके लंड पर अपने हाथ फेरने लगी। 

थोड़ी देर उसके लंड को चूसने के बाद उसका लंड फिर मेरी बूर को चोदने के लिए तैयार था। मैं फिर उसके उपर चढ़ गयी और पूरे जोश मे अपनी गांड उछाल उछाल कर अपनी बूर मे उसका लंड लेने लगी। करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद उसके लंड ने पानी छोड़ दिया मैंने उसका सारा माल अपनी बूर मे ही निकलवाया।

उसके बाद मैं उसके बगल मे लेट गयी। वो मुझे घिन्न भरी नज़रों से देख रहा था। मैंने उसको समझाते हुए अपनी पति की कहानी बताई, अब हम दोनो के बीच ना चाहते हुए भी पति पत्नी वाला संबंध बन चुका था। इसी लिए मैंने खुल कर अपने पति के बारे मे उसको बताया। अगली सुबह वो मुझसे रोजाना की तरह मुझसे बात कर रहा था। ऐसा लग रहा था कि मानो हम दोनों के बीच कुछ हुआ ही नही हो।

उम्मीद है दोस्तों की आप सभी को मेरी ये कहानी:-छोटे भाई के लंड से जमकर अपनी बूर चुदवाई, आप सभी को पसंद आई होगी। लड़कियों क्या आपने भी अपने भाई के लंड को अपनी चुत में लेने के बारे में सोचा है, या चुदी हो??