चाची की चुदाई

नमस्कार दोस्तों मैं आप सभी का अपनी इस कहानी में दिल से स्वागत करता हूं। मेरा नाम अशोक है। मैं बिहार का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 25 साल है। दोस्तों इस कहानी के माध्यम से मैं आप सभी को मेरे और मेरी पड़ोस की एक चाची के साथ संयोग वश घटी चुदाई की घटना के बारे में बताने जा रहा हूं।

चाची की चुदाई

जो मेरे पड़ोस की चाची है। वो दिखने में कुछ खास नहीं है उनकी उम्र करीब 50 साल के आस पास होगी। सांवली और खेतों में काम करने वाली एक गांव की गवार औरत है। उनमें न साफ सुथरा रहने और न सही ढंग से कपड़े पहनने का सलीका है। वो पुरे गांव में कभी उस इस खेत तो कभी उस खेत में अपनी बकरियों के साथ घूमती हैं और खेत में काम करती हैं।

वो गांव में अपने आधे ढके स्तन के साथ घूमती है। उनका पल्लू हमेशा उनके स्तनों के साइड में होता है। उनके स्तन ब्लाउज़ में से कितने भी बाहर दिख रहें हो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। वो इसी तरह हर जगह घूमती है। शायद उम्र होने के कारण न अब उनको लाज आती है और न ही उनका रूप देखकर किसी के मन में उनके लिए गंदे ख्याल आते होंगे।

मेरे मन में भी उनके लिए कोई गंदे ख्याल नही थे। हालांकि मैं भी रोज उनके स्तनों के दर्शन करता था। लेकिन उनके स्तनों का वो हिस्सा दिखना आम बात थी। उनके स्तनों का वो नज़ारा देख कर भी मेरे मन में कोई ऐसा वैसा कुछ नही था। मैंने तो कभी अपने सपने में भी नही सोचा था की हमारे बीच कभी ऐसा कुछ होगा।

एक दिन घर में मेरे शादी की बात चल रही थी। उसके कुछ दिन बाद मेरे घर वाले मेरे लिए लड़की देखने चले गए। उस दिन मैं घर में अकेला था। मुझे कुछ सूझ नही रहा था और पूरी आज़ादी थी। तो मैंने अपने फ़ोन में ब्लू फिल्म चला दी और देखने लगा। मैं ब्लू फिल्म देखते हुए इतना गर्म हो चुका था की पता नही कब मेरा हाथ मेरे लंड पर चला गया। जो की मेरी पैंट में तंबू बनाकर बिलकुल किसी लोहे की रॉड जैसा टाईट और सीधा हो गया था।

मैंने लेटे हुए ही अपनी पैंट नीचे सरकाई और एक हाथ में फ़ोन पकड़े दूसरे हाथ से अपने लंड को मसलते हुए मुट्ठ मारने लगा। ब्लू फिल्म में जब लड़का लड़की की गांड़ और बुर में अपना मोटा हथियार डाल रहा था और लड़की मादक आवाजें निकाल रही थी। वो देखकर मेरा जोश और बढ़ जा रहा था। अब मेरे लंड ने बेरंग पानी छोड़ना शुरू कर दिया था। मैं और जोश में आ गया मैंने फ़ोन की वॉल्यूम थोड़ी बढ़ाई।

मैं आवाज के साथ ब्लू फिल्म देखकर बहुत जोश और तेज़ी में अपना लंड हिलाने लगा। उस वक्त मैं ऐसी सीमा पर था की दुनियां से मेरा ध्यान उठ गया था। अब मैं चरम सीमा पर आने वाला ही था शायद 3 से 4 मुट्ठी भरने पर मेरा माल निकल जाता। लेकिन तभी अचानक से मेरे कमरे का दरवाज़ा खुला मैंने जैसे तैसे अपना लंड छुपाने की कोशिश की लेकिन तब तक वो चाची मेरे कमरे में घूस आई।

कमरे में घुसते ही मेरी नजर और चाची की नजर कुछ छन के लिए मिली। लेकिन फिर उनकी नजर मेरे लंड पर गई। जो मैं उनसे छिपाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन मेरी पैंट पूरी तरह से मेरे लंड को ढक नही पाई। अभी भी मेरे लंड का सूपड़ा मेरी पैंट के इलास्टिक के बाहर निकल कर मेरी नाभि तक चढ़ा हुआ था। उस वक्त न ही मैंने शर्ट पहनी थी जो मैं उससे अपने लंड को छुपा लेता।

वो तिरछी नजर से अभी भी मेरे लंड को देख रही थी और उन्होंने अपना चेहरा मेरी तरफ रखा था। पता नही उसी वक्त क्या हुआ मेरा लंड फुफकारते हुए झडने लगा। वो मेरे लंड से निकलते वीर्य की फुहार को देख रहीं थीं। मुझे उस वक्त इतनी शर्मिंदगी हुई की मैं बता नहीं सकता। तभी उन्होंने मुझसे पूछा तुम्हारी मां कहा है।

मैंने कहा चाची मां और सभी घर वाले लड़की देखने गए है। वो बोली अच्छा। इस दरमियान वो तिरछी नजर से मेरे लंड को और मेरे पेट पर फैले वीर्य को देख रही थीं। तभी उन्होंने मजाक उड़ाते हुए कहा की अरे तेरी शादी के बाद तुझे ये सब नहीं करना पड़ेगा। मैं उनकी बातों को समझ गया और शर्म से एक मुस्कान दी।

तभी चाची मेरे बेड पर आकर बैठ गई और कहा तू अपनी कीमती चीज़ ऐसे बर्बाद क्यों कर रहा है। मैं बोला कीमती चीज़ मतलब? तभी चाची ने मेरे लंड और पेट पर लगे वीर्य को अपनी ऊंगली में लिया और मुझे दिखाती हुई बोली ये बहुत कीमती चीज़ है इसे ऐसे बर्बाद मत कर।

मैं उनकी ये हरकत देखकर सन्न हो गया। वो मेरे बगल में बैठकर कभी मेरे लंड को और कभी मेरे चेहरे को देख रही थी। मुझे उस समय ऐसी शर्म आ रही थी कि मैं बता नहीं सकता। चाची ने कहा अब साफ करले नही तो तेरी पैंट भी गंदी हो जाएगी। मैंने हम्म… कहकर जवाब दिया। लेकिन शर्म से मेरी हिम्मत नही हो रही थी की मैं उनके सामने अपने लंड को साफ करूं और वो हटने का नाम नहीं ले रही थी।

मैं कुछ देर वैसे ही सर झुकाए पड़ा रहा। वो भी बैठी रही तभी उन्होंने कहा ला मैं साफ कर देती हूं। मैं उनको मना करने ही वाला था की तब तक उन्होंने मेरी पैंट को इलास्टिक नीचे किया और मेरे लंड को मेरी पैंट से पूरा बाहर निकाल दिया। अब मेरा लंड उनके हाथ में था। चाची बोली अरे बाप रे … तेरा लंड तो काफ़ी हट्टा कट्टा है।

मैं शर्माता हुआ अपना चेहरा उनसे छिपा रहा था। उन्होंने कहा की तूने अब तक इसे सही जगह पर इस्तेमाल किया है भी या नहीं मैंने थोड़ा सोच समझ के कहा नही। चाची अपने साड़ी के पल्लू से मेरे लंड और पेट पर फैले वीर्य को साफ करने लगी। जब उन्होंने अपना पल्लू नीचे किया और झुककर मेरे लंड को पोंछ रही थी।

तब मुझे उनकी दोनों चुचियां उनके ब्लाउज के ढीले गले से साफ साफ अंदर तक दिखने लगी। पता नही उस वक्त मुझे उनकी चुचियों को देखकर क्या हुआ। मेरी नियत थोड़ी खराब होने लगी और आधी आग उनके हाथ ने लगा दी। चाची अपने पल्लू से मेरे वीर्य को पोंछती हुई। एक हाथ से मेरे लंड को पकड़कर हल्के हल्के मेरी चमड़ी को ऊपर नीचे कर रही थी।

उनके हाथ का स्पर्श पाकर और उनकी चुचियों को देखकर मेरा लंड उनकी मुट्ठी में ही ताव में आने लगा। जिसे चाची तूरंत समझ गई। अब उनकी भी बोल चाल बदल चुकी थी। अब चाची लंबी लंबी और गहरी सांसे लेने लगी। ऐसा लग रहा था की बिना दौड़े उनकी सांसें तेज़ गति में हो गई है।

अब मेरे लंड उनकी मुट्ठी में ही टाईट हो चुका था। पहली बार मेरे लंड पर इतना ताव आया था की मेरे मन कर रहा था की मैं अभी चाची को पटककर उनकी चुत को चोद चोदकर फाड़ दूं। लेकिन मैंने अपने आप पर काबू किया। तभी चाची ने एक गरम आवाज में कहा अशोक तूने कभी औरतों को नंगा देखा है।

मैंने ना में सर हिलाया। तो उन्होंने कहा की तू अगर किसी को न कहने की कसम खायेगा। तो मैं तुझे अपना सब कुछ कपड़े खोलकर दिखाऊंगी। मैंने हां में सर हिलाया। चाची मेरे मुंह से हां सुनते ही झटके से उठकर खड़ी हो गई और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया।

चाची तिरछी नजर से मेरे लंड को देखते हुए। अपने कपड़े उतार रही थी। एक एक करके चाची ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बिलकुल नंगी मेरे सामने खड़ी हो गई। एक तो वो काली करलूठी थी उनके सारे अंग काले सांवले थे। लेकिन वो बिना कपड़ो के मुझे उस समय कोई अप्सरा लग रही थी।

अब मेरी भी सारी शर्म हवा में उड़ गई थी। जैसे ही चाची ने अपने सारे कपड़े उतारे मैं उनके नंगे बदन को हर जगह से छुने लगा। कभी मैं उनकी बड़ी काली गांड को दबाता तो कभी मैं उनकी चूचियों को मसलता और कभी अपनी दो उंगलियों को उनकी जांघों के बीच घुसाकर उनकी काली चुत को रगड़ता। मैं जैसे कोई बच्चा खिलौने से खेलता है ठीक उसी तरह उनके बदन से खेल रहा था।

तभी चाची ने अपने एक हाथ में मेरे लंड को पकड़ लिया और मेरी तरफ किसी लालच से लार टपकाते हुए बच्चे की तरह देखने लगी। मैं उनके अंदाज से ही समझ गया की ये मुझसे कुछ मांग रही है। मैंने तभी अपनी दो उंगलियां अचानक से उनकी चुत में डाल दी। मैंने भी पहली बार किसी औरत की चुत में उंगली डाली थी। उनकी चुत एक दम गरम थी और उनकी चुत गीली थी।

मैं दनादन अपनी दो उंगलियों से उनकी चुत को चोदने लगा। अब मुझसे शबर नही हो रहा था। मैंने तुरन्त खड़ा हुआ और अपनी पैंट और चड्डी एक साथ उतार कर नंगा हो गया। फिर मैंने उनको उल्टा घुमाकर पेट के बल बिस्तर पर धक्का दिया। वो अब पेट के बल बिस्तर पे थी।

मैं चाची के गांड़ के दोनों हिस्सों को अपने दोनों हाथों से पकड़कर दबाने लगा। मैं उनके चूतड़ के दोनों हिस्सों को फैलाकर उनकी गांड़ की छेद और चुत पर उपर से नीचे अपनी जीभ लगाने लगा। चाची अब गरम हो गई थी। मैं उनकी गांड़ को खूब मसल रहा था और फिर मैंने उनको चोदने का फैसला किया।

मैंने चाची की दोनों टांगें फैलाई और अपने घुटनों के सहारे उनकी दोनों जांघों के बीच बैठ गया। अब अधिक ताव में आकर मेरा लंड अब उपर मेरी नाभि तक पहुंच गया था। मैंने अपना लंड पकड़कर चाची की चुत पर लगाया और धक्का मारने की जगह मैं उन्हपर लेटने लगा। जिससे मेरा लंड उनकी चुत पर से हटकर उपर उठ गया और उनकी गांड़ की छेद पर आकर रुक गया।

मैंने चुदाई के उतावलेपन में ध्यान नहीं दिया। मैं तब तक चाची के उपर लेट चुका था और मैंने ज़ोर से अपनी कमर को चाची के गांड़ पर दबा दिया। जिससे मेरे लंड ने चाची के गांड़ में घुसने की कोशिश की। चाची अचानक से चिल्लाई अशोक.. अशोक… आह… रुक … रुक… तेरा लंड मेरी गांड़ में जा रहा है।

मैं उस वक्त उनकी जो हालत हुई लिखकर बता नहीं सकता न ही उनके दर्द को शब्दों में बयां कर सकता हूं। वो मानो रो ही पड़ी। मैंने अपनी कमर उठाई तभी चाची ने मेरे लंड को पकड़कर खुद ही अपनी चुत पर लगाया और मेरे लंड को उसी पोजिशन में पकड़े रखा।

मेरे लंड को पकड़े हुए चाची ने कहा चल अब दबा मैंने अपनी क़मर को चाची की गांड़ पर दबा दिया। मेरा लंड उनकी चुत की अगल बगल वाली चमड़ी को ठोकते दबाते हुए उनकी चुत में घुस गया। तभी चाची के मुंह से दबी हुई आह..ह. आआआह्हह की चीख निकली। अब चाची लंड निकालने को बोल रही थी।

चाची : आह. आह्ह्ह्ह्ह… निकाल नही हो पाएगा मुझसे मोटा लंड है तेरा नही ले पाऊंगी अशोक निकाल मेरी चुत से। उनके मुंह से ये सुनते ही गुस्से से मेरी झांटों में मानो आग लग गई।

मैं मन ही मन उनको गालियां देने लगा। साली रण्डी को बीच में ही ऐसा करना था तो मेरे अंदर वासना की आग क्यों भड़काई इस मादरचोद ने… पर मैंने अपने गुस्से पर काबू किया और धीरे धीरे अपनी कमर को उनकी गांड़ पर दबाने लगा। आधा लंड घुसते ही मादरचोद रोने लगी वो लगातार रो रो कर अपनी चुत से मेरा लंड निकालने को कहने लगी।

अब चाची के रोने और गिड़गिड़ाने से मेरा पर चढ़ चुका था। तभी मैंने अपने एक हाथ से कसकर उनके मुंह को दबा लिया और एक तेज के धक्के से अपना मोटा 8 इंच लंबा लंड उनकी चुत में पूरा धकेल दिया। वो रोने लगीं और दर्द से कराह कर आह्ह्ह्ह्ह आह्ह अरे अशोक निकाल मेरी चुत से मुझसे बर्दास्त नही हो रहा है तेरा मोटा लंड।

चाची की आंखों से आंसू आ रहे थे। मैंने फिर से कसकर उनका मुंह दबा दिया और अब अपनी कमर को कसकर उनकी गांड़ पर पटक पटककर उनकी चुत को अपने मोटे लंड से जमकर चोदने लगा। मेरे धक्कों से उनकी चुत ढ़ीली होती जा रही थी और उनकी चींखे तेज़ होती जा रही थी। अब मुझे वो गलियां देने लगी उनकी आवाज मैंने अपने हाथ से दबा रखी थी। लेकिन मुझे उनकी बात साफ समझ आ रही थी।

वो मुझे गंदी गंदी गालियां देने लगी। जिसे सुनकर मेरे दिमाग़ का पारा चढ़ गया। मैं अपनी पूरी ताकत झोंककर चाची की चुत में अपने मोटे लंड की बौछार करने लगा। शायद उनकी गालियां सुनकर मेरे अंदर की थोड़ी बहुत रहम भी ख़त्म हो गई थी। मैं तेज़ गति में अपने लंड को उनकी चुत के अंदर बाहर करने लगा।

अब पूरे कमरे में उनकी घूटी हुई दर्द की कराह और चुदाई की चट.. चट… आवाजें आ रही थी। मैं ज़ोर ज़ोर से उनकी चुत में अपने लंड का वार करता रहा। अचानक उनके चुत से मूत की फुहारें निकलने लगी। ऐसी जबर्दस्त चुदाई कर रहा था की चाची का पेशाब निकल गया। फिर मैंने कहा रण्डी चाची कुतिया साली एक तो तूने ही मेरे दिल में अपनी चुत चुदवाने की चाहत जगाई और अब गालियां दे रही है।

तभी चाची एक दम से पलट गई मैं तेरे घर वालों को बोल दूंगी। तूने मुझे कमरे में बंद करके जबर्दस्ती मेरे साथ चुदाई की। ये सुनते ही मेरे गुस्सा और तेज हो गया। मैं उसके मुंह को और कसकर दबा लिया और फिर से अपनी पूरी ताकत के साथ उसकी चुत को अपने मोटे लंड से चोदने लगा।

करीब और 15 मिनट तक उसको ऐसे ही चोदते हुए मैं उसकी चुत में ही झड़ गया। मैंने अपने लंड का सारा वीर्य चाची की चुत में भर दिया। कुछ देर मैं चाची की चुत लंड डाले उसके उपर लेटा रहा। फिर मैंने अपनी कमर उपर उठाई जिससे मेरा लंड एक आवाज़ के साथ चाची की चुत से बाहर निकल गया।

मैं बैठ गया चाची लेटे हुए ही अपने आंसू पोंछने लगी। मैंने चाची की चुत को देखा तो अब चाची की चुत के दोनों फुल जैसे पट्टे लाल हो गए थे। चाची की चुत से सफ़ेद माल बाहर निकलने ही वाला था। तभी चाची ने कहा आने दे तेरे घर वालों को कह दूंगी की तूने मुझे कमरे में बन्द करके जबर्दस्ती मेरे कपड़े उतारे और मुझे घंटों तक रौंद रौंदकर मुझे चोदा।

ये सुनते ही मेरा दिमाग खराब हो गया। मैंने कहा की मैं अपने घर में था। आप खुद मेरे पास आई और बेशर्म की तरह मेरा लंड पकड़कर मुझे अपनी मर्जी से चुदाई के लिए उकसाया और आप खुद अपने कपड़े उतारकर मेरे सामने नंगी हुई। मुझे नहीं पता की अचानक आपको बीच में क्या हुआ। जो आप मुझे उल्टा सीधा बोल रही हो। काफी देर तक हमारे बीच बहस चली।

लेकिन वो मादरचोद बार बार मेरे घर वालों को बताने की धमकी दे रही थी। फिर से मुझे गुस्सा आया मैंने कहा जब बदनामी झेलनी ही है। तो चल फिर सही से तेरा इलाज करता हूं। मैंने उस मादरचोद चाची को पकड़ा और खींचकर उसे भंड़ार घर के अंदर ले गया। जहा अब उसकी चीख किसी को सुनाई नही देती।

मैंने चाची को गेंहू के बोरों पर पटक दिया और भंड़ार घर के कमरे के दरवाज़े को बंद कर दिया। वो उठकर भागने को हुई लेकिन मैं तुरंत उसके पास पहुंच गया। हमारी आपस में धक्का धक्की चालु हो गई। मैंने उसे फिर से पेट के बल बोरों पर धकेल दिया। मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाकर बीच में जगह बनाई।

मैंने एक हाथ से ताकत से उसके सर को बोरे पर दबा दिया और एक हाथ से अपने मुंह से थूक निकालकर अपने लंड पर मलने लगा। अब मैंने अपने लंड को पकड़ा और चाची की गांड़ के छेद पर लगा दिया। अब मैं फिर धीरे धीरे उसके उपर लेटने लगा। जिससे मेरा लंड उसकी गांड़ की छेद पर दबने लगा।

दर्द के मारे उस वक्त चाची की सारी हवाबाजी उनकी गांड़ में घुस गई । वो दर्द से चीखने चिल्लाने लगी। आह्ह्ह्ह्ह…. आआह्ह्ह्ह्… आ… माआअ… माआआ.. अशोक अशोक नही… नही .. आह… मर जाऊंगी रे अशोक छोड़… आआआह्हह्ह… मैं अपनी ताकत और अपने कमर का पूरा वजन उसकी गांड़ पर लगा रहा था।

मैंने इतनी ताक़त से अपनें लंड को उसकी गांड़ की छेद पर दबा रखा था की जैसे ही उसकी गांड़ की छेद थोड़ी सी खुली मेरे मोटे लंड ने जगह बना ली और सट से एक झटके में ही उसकी गांड़ में घुस गया। उसकी गांड़ में लंड घुसते ही एक बार वो जोर से चिल्लाई और फिर बेहोश हो गई।

मैं अपनी कमर उठा उठाकर चाची की गांड़ में अपना मोटा लंड डालने लगा। मैं पूरी ताकत से अपनी कमर चाची की गांड़ पर पटक पटककर अपना लंड उसकी गांड़ में डाल रहा था। जिससे चाची का सारा बदन थरथरा रहा था। गांड़ मारते मारते बीच में ही चाची होश में आने लगी और कराह कराह कर रोने लगी।

वो फिर अपनी गांड़ से लंड निकालने को कहने लगी। लेकिन मैं आधा काम करके रुकने वाला कहां था। मैंने कहा चाची तूने ही मुझे तेरी गांड़ मारने को विवश किया है। अब तू झेल जब तक मेरा लंड का पानी तेरी गांड़ को भर न दे। वो मुझसे माफ़ी मांगने लगी बोली गलती हो गई। मैंने ही तुझे उकसाया था और तुझे फंसाने के लिए तुझे धमकी दे रही थी।

मैं 20 मिनट तक चाची की गांड़ को रौंदता रहा और फिर मैंने उसकी गांड़ में ही अपना वीर्य छोड़ दिया और उसकी गांड़ भर दी। उतनी ही देर में मुझे समझ आ गया की उसकी चुत से ज्यादा मजा उसकी गांड़ में था। मैंने कुछ देर आराम के बाद फिर से अपने लंड उसकी गांड़ में डाल दिया।

इसबार बीच में रुक रुककर मैं घण्टे भर उसकी गांड़ मारता रहा। फिर मैंने चाची की गांड़ में अपना लंड झाड़ दिया। चाची की सचमुच गांड़ फट गई थी। उनकी गांड़ का छेद काफी देर तक खुला हुआ था। उसकी गांड़ की छेद का साइज़ 4 इंच गोल हो चुका था।

मैंने चाची को कहा चाची अगर तुम बीच में पलटती नही तो सब प्यार से हो जाता। पहले तो तुमने ही मुझे उकसाया मैं तो अपने घर में अकेले ही मुट्ठ मार रहा था। तुमने ही बात को आगे बढ़ाया और खुद अपने कपड़े उतार कर चुदने को तैयार हो गई। तो मैं भला क्या करता मेरा भी मन डोल गया।

दरअसल बात ये थी। चाची वैसे तो हमारे घर आती जाती थी। लेकिन वो अंदर ही अंदर मेरे घर वालों और मुझसे जलती थी। उपर के मन से बातचीत करती थी। वो हमें नीचा दिखाने का मौका खोजती रहती थी। आज मुझे बदनाम करके उसे सुकून आता। इसलिए उसने ये सब कुछ किया।

मैंने चाची को कहा चाची अगर अभी भी तुम्हारे मन में मेरे घर वालों से मेरी शिकायत करनी है तो बोलो अभी मेरे घर वालों को आने में रात तक का टाईम है। तब तक तुम्हारी गांड़ और चुत की चुदाई रुकेगी नही। वो मेरी बात सुनते ही चुदाई के डर से अपनी गांड़ बचाती हुई पहले वाले कमरे में लंगड़ाती हुई भागकर आई।

फिर अपने कपड़े पहनकर मेरे घर से ऐसे गायब हुई जैसे गधे से सिर से सिंघ। वो अपनी जिंदगी में आज की ऐसी चुदाई को भूल नही पाएगी। अगले दिन मुझे मालूम चला की उस रण्डी चाची को बुखार आ गया है। मैं समझ गया की कल जिस तरीक़े से मैंने उसकी गांड़ की ठुकाई की थी उसी वजह से उसे बुखार आया था।

तो दोस्तों कैसी लगी आप सभी को मेरी चाची की चुदाई की कहानी उम्मीद करता हूं पसंद आई होगी।

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