भिखारन औरत ने मेरी नियत बिगाड़ी

हैल्लो दोस्तों,आप सभी का स्वागत है। मेरी इस नई कहानी पर आज मैं आपको एक नई कहानी सुनाने जा रहा हूँ। ये घटना मेरे नए घर पर हुई जो अभी बन रहा था।

मैं थोड़ा अपने बारे में बताता हूँ। मेरा नाम रिषभ है, मेरी उम्र 21 साल की है। मैं अभी कॉलेज में पढ़ाई करता हूं। और B. sc 2nd year का student हूँ।

मेरे परिवार में 4 लोग ही है। मम्मी, पापा और मैं और मेरी एक बड़ी दीदी है। घर में सब नार्मल ही चल रहा था। मेरे पापा एक नया घर बनवा रहे थे। इस बात की मेरे परिवार में बहुत खुशी थी और हम अपने नए घर के लिए बहुत excited थे। हम जल्द से जल्द अपने नए घर में शिफ्ट होना चाहते थे।

आप सभी जानते ही होंगे किराये के मकान में रहने वालों को जब अपना खुद का घर मिलता है। तो वो खुशी कैसी होती होगी। कुल मिला कर सब अच्छा खासा चल रहा था। ये घटना 4 दिन पहले घटी जब मेरे नए घर का काम लगभग पूरा ही चुका था।

बस खिड़की दरवाज़े और पेंटिंग का काम बचा हुआ था। उसदिन शाम को पापा ने मुझसे कहा बेटा रिषभ क्या तुम आज की रात नए घर में रुक जाओगे? क्योंकि घर में अभी दरवाज़े खिड़किया नही लगी है। और ढेर सारा कीमती लोहे का सामान वैसे ही पड़ा हुआ है। मैंने भी हाँ कह दिया।

क्योंकी जहाँ हमारा नया घर बन रहा था वो एरिया बहुत सुनसान था। अभी तक वहाँ कोई नही रहता था। और भी लोगो के घर बन रहे थे। लेकिन अभी कोई वहाँ नही रहता था। मैं शाम को रात का खाना लेकर अपने नए घर पर चला गया। मैं छत पर चढ़कर दीवारों को पानी दे ही रह था। कि मुझे अपने घर के पीछे कोई दिखा!

मैं तुरंत ही छत से उतर कर घर के पीछे वाले दरवाज़े पर आया और तुरंत दरवाज़ा खोलकर देखा तो वहाँ एक भिखारी औरत जिसकी उम्र 50 साल के करीब होगी वो बैठी हुई थी। उस वक़्त लगभग अंधेरा हो रहा था। मैंने उस औरत से पूछा कि वो कौन है? और वहाँ क्या कर रही है। तो उसने जवाब दिया कि वो वहाँ सिर्फ बैठी हुई है।

मैंने उससे फिर पूछा कि वो क्या करती है? उसका घर कहाँ है? और इतने अंधेरे में क्यों बैठी हुई है। तो उसने जवाब दिया कि वो भीख मांग कर अपना गुजारा करती हूँ। और कहा मेरा कोई घर नही है। इतना जवाब देते हुए वो वहां से उठने लगी। उसे लगा कि मैं उसे वहाँ से जाने के लिए कह रहा हूँ। वो मायूसी में वहाँ से उठकर खड़ी हो गयी।

तभी मैंने उससे कहा कि आप यहाँ रुक सकती हो मुझे कोई आपत्ति नही है। बस आपको यहाँ पहली बार देखा तो पूछ लिया। मैंने दरवाज़े को खोलकर उससे बोला कि आप बाहर मत बैठो थोड़ा अंदर आकर ही बैठ जाओ शाम का समय है कीड़े मकोड़े होंगे।

वो मेरी नरम बात सुनकर धीरे-धीरे कदमों से अंदर दरवाज़े की चौकठ पर आकर बैठ गयी। मैं भी वहाँ खड़ा होकर उससे बातें करने लगा। वो भी मुझे अपनी जिंदगी के बारे में बताने लगी। कैसे वो अपनी जिंदगी बिताती है। जब मैं उससे बातें कर रहा था। तो मेरा ध्यान उसकी चुचियों ने अपनी ओर आकर्षित कर लिया।

वो देखने मे कुछ खास नही थी। पर उसकी बूढ़ी चुचियाँ बड़ी बड़ी थी। और उसके गले से उसकी चुचियों की गहराई नापने लायक थी। जब वो मुझसे बात करते करते हिलती तो उसकी चूचियाँ भी हिलकर आपस में टकरा जा रही थी। उसने सिर्फ ब्लाउज ही पहनी हुई थी। जिससे उसकी ब्लाउज में लटकती चुचियों के निप्पल भी दानों की तरह ब्लाउज के ऊपर से ही दिख रहे थे।

मैं जान बूझकर उसके करीब सट कर खड़ा हो गया। वो मेरे बगल में बैठी हुई थी। ऊपर से मैं अब आराम से उसकी चुचियों की गहराइयों को उसके ब्लाउज़ के गले से उसकी चुचियों की दरारों में झांक रहा था। ऊपर से मुझे उसकी निपल्लों तक मुझे उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों का साइज दिख रहा था।

मेरा लंड अब तक तूफान हो चुका था। लेकिन समझ नही आ रहा था। की अब क्या करूँ? लंड में कड़कपन के कारण मुझे पेसाब भी आ रहा था। तो मुझे एक आईडिया आया कि क्यों न इसके सामने ही पिसाब करू! मैंने वैसे ही किया मैं उसके बगल में जाकर घर से बाहर की ओर हो गया।

और उसके सामने ही अपना लंड निकाल कर पेसाब करने लगा। वो मेरे बगल में ही बैठी थी। मेरा लंड उससे एक हाथ की दूरी पर ही था। वो असहज होकर मेरे लंड को देख रही थी। और फिर अपनी नज़रे लंड से हटा कर जमीन की तरफ कर ले रही थी।

मेरे लंड से निकलता पेसाब जमीन से टकराने से आवाज कर रहा था। वो अभी भी चोरी छिपे मेरे लंड की ओर देख रही थी। जब मेरे लंड से पेसाब की बूंदे बनकर टपकने लगी तो मैंने अपने लंड के चमड़ी को आगे पीछे करके लंड को झाड़ने लगा। वो अब मेरे ही लंड को घूर रही थी।

इसी कारण पेसाब खत्म होने के बावजूद भी मैंने अपना लंड पैंट में नही डाला और वैसे ही अपना लंड पकड़कर उसके कंधे के पास सट गया। वो अब भी चोरी नज़रो से मेरे लंड को नाप रही थी। मैंने अपने लंड के चमड़ी को आगे पीछे करते हुए उसकी ओर देखा कुछ सेकेंड के लिए हमारी नज़रे आपस में मिली।

मैं समझ गया कि उसे कोई आपत्ति नही है। फिर मैंने अपने बाएं हाथ को उसके छाती पर फेरते हुए अपने हाथ को उसकी ब्लाउज में घुसा दिया। मेरा हाथ अब उसकी चुचियों की बीच वाली दरार में पहुंच गया फिर मैं बारी-बारी से उसके दोनों चुचियों को ब्लाउज में ही छूने लगा।

उसकी चुचियों पर मेरा हाथ लगते ही उसका पल्लू जो उसके कंधो को आधा ढके हुए था। वो पूरा का पूरा नीचे गिर गया। अब मुझे उसकी छाती साफ दिखाई देने लगी। उसकी नरम नरम चुचियों को छूते ही मेरा लंड और भी बड़ा होकर निखर गया।

फिर मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोल दिये और उसकी बड़ी-बड़ी चुचियों को आजाद कर दिया। अब मैं आजादी से उसकी दोंनो चुचियों को मसलते हुए मैंने अपना लंड उसके मुँह के पास कर दिया। वो भी मेरी इच्छा समझ गयी थी। उसने मासूमियत भरी अंदाज़ में मेरा लंड पकड़ा और मेरे लंड की चमड़ी को पीछे करके मेरे लंड पर अपने होठों को रगड़ने लगी।

उसकी नरम होंठो को छूते ही मेरा लंड तूफान हो गया। अब मैंने अपने लंड को छोड़ दिया वो ही मेरे लंड को पकड़े चूस रही थी। वो मेरे लंड पर धीरे-धीरे अपने होठों के जादू चलाने लगी। मैं मदहोश खड़ा होकर अब अपने दोनों हाथों से उसके चूचे दबाने लगा। कभी कभी मैं कस कस कर उसकी चुचियों को मिस दे रहा था।

मेरे चुचियाँ कस कर मिसने पर वो इस्स.. इस्स उम्म… कर रही थी। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में पूरा भर लिया था। बीच बीच में मैं भी उत्सुक होकर ज़ोर से अपना लंड उसके मुँह में ठेल दे रहा था। अब मैंने उसे अच्छी तरह अपना लंड चूसने दिया। पहले से ही मेरे लंड टोपे के पीछे दही जैसा जो सूखा हुआ धात लगा हुआ था। वो अब उसके चेहरे पर और उसके होंठो पर लगा दिखने लगा।

अब मुझसे रहा नही गया तो मैंने उसके पैरों के बीच से साड़ी को पकड़ा और धीरे-धीरे करके उसकी साड़ी को ऊपर चढ़ाने लगा मैंने उसकी साड़ी को उसके घुटनों तक चढ़ा दिया। उसकी टाँगों पर बाल ही बाल थे, वो बैठी हुई थी इस वजह से मैं उसकी साड़ी और ऊपर नही कर पाया। वो अब भी मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसकर खड़ा कर रही थी।

फिर मैंने उसे अंदर लेट जाने को कहा वो लेट गयी। फिर मैंने दरवाजा बंद करके कमरे की लाइट ऑन कर दी। वो लेटकर चुदने को तैयार पड़ी थी। फिर मैंने अपनी पैंट और बाकी के सारे कपड़े उतार दिए और उसके पल्लू को उसके सीने से हटाते हुए मैंने उसकी कमर के पास से साड़ी को खोल दिया।

कुछ ही पलों में वो बिना साड़ी के मेरे सामने सिर्फ पेटीकोट में पड़ी थी। और उसका बड़ा सा पेट पेटीकोट के फांके से बाहर झांक रहा था। और उसके पेटिकोट के फांक से उसके पेट के नीचे की झांट भी दिखाई दे रही थी।

मैं वो सब देखकर बेकाबू हो गया। और उसके पेटीकोट को बिना खोले ही मैंने उसके पेटीकोट के फांके में हाथ डालकर उसकी बूर को टटोलने लगा। जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी पेटीकोट में डाला ऐसा लगा कि मेरे हाथ में बालों का गुच्छा आ गया हो। अंदर से मुझे बहुत खुशी हो रही थी। मेरी सालों से तम्मना थी कि मैं किसी झांटो से भरी बूर को चोदू।

मैं उसकी जाँघों पर बैठ गया और उसके पेट को सहलाते हुए और उसकी नाभि को जीभ से चाटते हुए मैंने आहिस्ते से उसके पेटीकोट की डोरी को खोल दिया। मेरा ये सब करना उसे आनंद से भर रहा था। उसके पेटीकोट की डोरी खोलते ही वो अपने पैरों को आपस में दबाने लगी ऐसा लग रहा था की अब उसकी बूर बस लंड की भूखी हो।

मैंने उसके पेटीकोट को उसकी कमर से पकड़ कर उसके कमर से नीचे करके पूरा निकाल दिया। फिर मैंने उसके पैरों को खोलकर फ़ैला दिया और उसकी बूर की बड़ी बड़ी होंठो पर अपनी उंगलियों को फेरने लगा। उसकी बूर की दोनों होंठो के बीच से पानी आ रहा था। मैंने जैसे ही अपनी उंगली उसकी बूर के दोनों होठों के बीच लगाई।

मेरी उंगली एकदम से फिसलकर उसकी बूर में घुस गई और उसकी बूर का छेद खुलकर माल छोड़ने लगा। मुझे अंदाज नही था कि वो इतनी गरम हो चुकी थी। अंदर ही अंदर मुझे बहुत खुशि हो रही थी पहली बार मैंने अनजाने में ही किसी औरत को इतना गरम कर दिया था।

अब मैं सब कुछ जल्दी करना चाहता था। तो मैं उसकी बूर की छेद के पास से झांटो को हटाकर बूर का रास्ता साफ करने लगा। झांट हटने के बाद मुझे उसकी बूर का सारा हिस्सा साफ नजर आने लगा। उसकी बूर से लटकती हुई काली नरम सी चमड़ी जो सिंघाड़े की आकर में थी और बड़ी लचीली सी थी

मैंने अपना लंड उसकी बूर के पास कर के उसके बूर को ऊपर से नीचे तक रगड़ने लगा। जैसे ही मैंने अपना लंड उसकी बूर पे ऊपर से रगड़ता हुआ नीचे तक ले गया। उसकी बूर की वो काली लचीली चमड़ी दो भागों में बट गयी और बूर के दोनों ओर बराबर हिस्सों में बट कर फैल गयी और मेरा लंड सरकता हुआ उसकी बूर की छेद पर आकर रुक गया।

अब चुदाई का समय आ चुका था। और लंड उसकी बूर की छेद पर अपने आप ही सेट हो चुका था। मैंने अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरा और अपनी गांड को दबाते हुए अपना लंड उसकी बूर में उतार दिया। लंड उसकी बूर में दाखिल हो चुका था। मैंने धीरे धीरे अपनी गांड को दबाते हुए लंड को पूरा अंदर तक पहुँचा दिया।

अब मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी बूर में जा चुका था। तो मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधों के पास जमा दिए और धीरे धीरे अपनी गांड लहराते हुए मैं अपना लंड उसकी बूर में अंदर बाहर करके चोदने लगा। मैं उसकी बूर में धक्के मारता हुआ उसकी दोनों निपल्लों को चूस रहा था। मैंने चुदाई की रफ्तार तेज कर दी थी।

उसकी बूर से हर धक्के के साथ माल की पिचकारी बाहर आ रही थी साथ ही चुदाई करने पर उसकी बूर से भुच्च.. भुच्च…भचच… की आवाज आ रही थी। मेरा लंड अंदर घुसकर उसकी बूर की हवा बाहर निकाल रहा था। वो आह!! आह!! उईई ई..!! कर रही थी मुझे उतना ही मज़ा आ रहा था।

मैं लंबे लंबे धक्के मार कर अपने लंड का अंतिम छोर तक उसकी बूर की छेद में डाल रहा था। मेरा पूरा लंड खाकर उसकी बूर के दोनों तरफ के होठ फूलकर निखर जा रहे थे। वो मचल मचल कर मेरा लंड खाये जा रही थी। ऐसे ही लंबे लंबे झटको के साथ मैं उसकी बूर चोदता रहा मेरा लंड और उसकी बूर का हिस्सा एकदम चिपचिपे गाढ़े माल से लिपट चुका था।

कुछ देर बाद वो लंबी गहरी गहरी साँसे लेने लगी और उसकी बूर में कड़कपन आने लगा। जिससे मुझे अंदर धेकेलने और बाहर खींचने में ज्यादा ताकत लगानी पड़ रही थी। और फिर उसने एक गहरी सांस ली और मुझे अपने ऊपर खींचते अपनी बाँहों में जकड़ती हुई बूर से निकलती फररर… फररर…की आवाज के साथ उसने अपना माल छोड़ दिया।

मैंने भी उसकी बूर में अपना लंड पेलता रहा कुछ देर बाद मैंने अपना माल भी उसकी बूर में ही छोड़ दिया। उसकी झांट तो गाढ़े माल से आपस में चिपककर सट गयी थी। मैं भी झड़ चुका था पर मेरा लंड अभी भी सख्त था ढीला नही पड़ा था। तो मैं अपने घुटनों के बल बैठ गया और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर मैं अपने घुटनों के बल सीधा खड़ा हो गया।

अब उसकी गांड हवा में थी और उसकी बूर ठीक मेरे लंड पर रगड़ खा रही थी। मैंने हवा में लहराती गांड उसकी गांड और बूर पर फिर अपना लंड रगड़ने लगा। फिर मैं अपने लंड को उसकी बूर पे दबाते हुए अपना लंड उसकी बूर में पेल दिया। लंड भी बड़ी आसानी से उसकी बूर में उतर गया।

अब उसकी गांड मेरी जाँघों से चिपक चुकी थी। और मेरा लंड पूरा उसकी बूर में उतर चुका था। मैं अपने जांघो से उसकी गांड को उछालने लगा जिससे उसकी बूर में मेरा लंड अंदर बाहर होने लगा। मेरा लंड उसकी बूर में अपना पूरा जोर लगाकर उसकी बूर को चोदने लगा। ऐसे ही मैंने हवा में उसकी गांड लटकाकर उसकी बूर की जमकर चुदाई की।

15 मिनट तक अच्छे से मैंने उसकी बूर की अपने लंड से सिंचाई की उसके बाद मैं बूर में ही झड़ गया। और उसके बाद वो उठकर जल्दी से आंगन में मूतने बैठ गयी। उसके मूत की धार मेरे कानों तक पहुँच रही थी। मूतने के बाद उसने पानी से अपनी बूर को साफ किया। और फिर थोड़ी देर बाद वो फिर से मेरे बगल में आकर लेट गयी।

मुझे लगा था कि वो चुदाई होने के बाद चली जायेगी। पर वो अब भी नंगी मेरे बगल में आकर लेट गयी। अभी तो रात के 8 ही बजे थे। मैंने भी सोचा कि अभी तो पूरी रात बाकी है। अच्छा हुआ ये नही गयी। मैं मन ही मन सोचा कि आज की रात मैं इसे अपनी इच्छा भर चोदूगां।

कुछ ही देर बाद जब मैंने उसकी तरफ करवट ली तो मेरा लंड उसकी गांड को छू गया। फिर क्या!! मैंने जमकर उसकी गांड भी मारी और उसकी गांड की छेद को फैला कर ढीला कर दिया। उस रात उसकी गदरेल रजाई जैसी गांड पर उछल उछल कर मैंने दो बार उसकी गांड मारी और उसकी बूर को सुझने तक चोदा आधी रात में उसकी बूर के दोनों होंठ फूलकर मोटे हो चुके थे। और मेरा लंड भी लगातार घिसाई से छिल चुका था।

तो दोस्तों उम्मीद है आप लोगों को मेरी ये कहानी पसंद आई होगी। मेरी पिछली कहानी। ट्रैन में रात को अम्मी की चुदाई को पढ़े।

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