भाड़ेदार बुजुर्ग औरत की चुत चुदाई-1

मैं आज आप सभी के लिए एक नई कहानी पेश कर रहा हूँ। इस कहानी में मैं आप सभी को मेरी और मेरी बुजुर्ग भाड़ेदार औरत की धमाकेदार चुदाई के बारे में बताने जा रहा हूँ। कि कैसे मैंने उस औरत को पटा कर उसकी चुदाई की और उसकी चुदने चाहत पूरी की।

मैं राज दिल्ली में रहता हूँ। मैं यहाँ एक अच्छी सी कंपनी में काम करता हूँ। मैं बचपन से ही किताबी कीड़ा रहा था। जिससे मुझे फायदा ही हुआ पढ़ लिखकर मुझे अच्छी नौकरी और सैलेरी तो मिल गयी। पर मैंने कभी कोई गर्लफ्रेंड नही बनाई या सच कहूँ तो कभी कोई बनी ही नही।

जब मैं अपने गाँव में था तो एक बार मैंने एक औरत के साथ 2 मिनट के लिए सेक्स किया था, या मानो न के बराबर ही बस मेरा जल्दी से गिर गया और वो पैसे लेकर चलती बनी।

मैं जब से दिल्ली आया तब से मुझे वहाँ की औरतों और लड़कियों को देखकर सेक्स करने की इच्छा होती थी। पर काम और थोड़ा संकोची स्वभाव का होने के कारण कभी बात नही बनी, तो मैं अपने हाथ से ही अपने लौड़े को सांत करता था,

मैं दिल्ली में अकेला रहता हूँ, कुछ दिनों पहले मैंने एक घर ख़रीदा था जिसमे मैं अकेला रहता था, घर बहुत बड़ा था तो मुझे साफ सफाई या अन्य रख रखाव में बहुत परेशानी होती थी। घर में दो तीन कमरे ऐसे ही खाली पड़े थे।

तो मैंने सोचा कि क्यों ना रूम को किराए पर लगाया जाए, जिससे पैसे भी आ जाएंगे और लोगो के कारण मन भी लगा रहेगा। तो मैंने रूम रेंट पर देने के लिए ऑनलाइन ऐड दे दी।

2 दिनों बाद मुझे एक कॉल आया और उसने अपना नाम उमेश बताया रूम के किराए के लिए मुझसे बात की उसने कहा “राज ” मुझे रूम मेरे मम्मी पापा के लिए चाहिए। मेरे पापा का इलाज दिल्ली में चलेगा। तब तक वो आपके मकान में रहेंगे। मैंने कहा ठीक है।

फिर उसने कहा कि कल वो आपके यहाँ शिफ्ट हो जाएंगे। मैंने उससे नम्रता के साथ कहा जी ठीक है।

अगले दिन मैं आफिस से आकर करीब 3 बजे खा कर लेटा हुआ था। बाहर बारिश हो रही थी। तभी एक टेम्पो मेरे घर के सामने आकर रुका जिसमे थोड़ा बहुत ज़रूरी सामान और एक मरियल सा आदमी और एक लगभग 50 साल हट्टी कट्टी औरत उतरे ।

मैं झट से दरवाज़े की तरफ आया और दरवाज़ा खोला तो टेम्पो वाले ने मुझसे एडरेस कन्फर्म किया और टेम्पो में से सामान लेकर घर के अंदर करने लगा।

वो औरत भी टेम्पो वाले के साथ समान अंदर करने में लग गयी बारिश बहुत तेज़ थी। और उस औरत का जो बीमार पति था वो एक कोने में चुपचाप खड़ा था।

समान उतरवाने में वो औरत पूरी गीली हो चुकी थी। उसके कपड़े पूरी तरह से गीले हो चुके थे, और उसके कपड़ो से पानी टपक रहा था। उसका पल्लू गीला होकर उसके सीने पर चिपक गया था। जिससे उसके ब्लाउज में कैद बड़ी-बड़ी चुचि और दोनों चुचियों के बीच की गहरी रेखा साफ-साफ दिखाई पड़ रही थी।

मेरा तो मन ही डोल गया मैं उसके और करीब जाकर खड़ा हो गया और उसके गीली चुचियों को ताड़ने लगा तभी मेरा ध्यान उसके गोरे चिट्टे पेट पर गया। क्या मखमली पेट थी, गहरी नाभि में फंसी पानी की बूंदे उसके पेट की सोभा में चार चांद लगा रही थी।

उसकी गीली साड़ी उसकी बड़ी सी गांड पर चिपक कर उसके गांड के आकार को दिखा रही थी। मेरा तो मानो पानी निकलने को आ गया।

ऐसा लग रहा था कि मानो रेगिस्तान में पानी मिल गया हो। फिर मैंने उसके सामान को उसके कमरे में रखने में मदद की और उसका सारा सामान उसके कमरे में रख कर मैं अपने कमरे में वापस लौट आया।

मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था अचानक मुझे ज़ोरो से पिसाब लगी तो मैं उठकर बॉथरूम की तरफ गया। मुझे जरा भी ख्याल नही था कि घर मे अब और भी कोई है, मैं बेखबर बाथरूम में घुस गया।

वो औरत बॉथरूम में नहा रही थी, और दरवाजा भी खुला हुआ था, मैं पेसाब की हड़बड़ी में एकदम से बाथरूम के अन्दर पहुंच गया, देखा वो औरत ऊपर से पूरी नंगी थी, उसकी बड़ी-बड़ी चुचियाँ साबुन से लिपटी हवा में झूल रही थी, और उसका पेटीकोट पीछे से उसकी गांड से हटकर नीचे हो चुका था, और वो झुककर अपनी जाँघों पर साबुन मल रही थी।

मुझे उसकी बड़ी नंगी गांड मेरी आँखों के सामने दिख गयी, उसकी गांड की गहराई “वाह” इतनी की उसकी गांड 8″ लंबा लौड़ा ऐसे ही लील जाए। अचानक हमारी नज़रे मिली और वो चौंक गयी। उसने मुझे देख अपनी चुचियों को अपने हाथों से और अपनी गांड को पेटीकोट से ढक लिया।

मैं तुरंत वहाँ से बाहर निकल आया तो उसने पीछ से आवाज लगाई क्या हुआ बेटा…??

मैंने कहा कुछ नही बस टॉयलेट जाना था, तो उसने कहा कि अंदर आ जाओ मैं ढक लेती हूँ। मैंने कहा नही आंटी आप नहा लीजिए। मैं थोड़ी देर बाद चला जाऊँगा।

शाम के करीब 6 बजे थे, वो औरत थोड़ा संकोच करते हुए मेरे कमरे के पास आई और बोली बेटा मुझे कुछ दवाइयाँ खरीदनी थी, लेकिन मैं यहाँ नई हूँ। तो मुझे यहाँ की दुकान नही मालूम है, मैंने तुरंत कहा आंटी दीजिए मैं ले आता हूँ। कुछ देर बाद जब मैं दावा लेकर आया तो मैं उसके कमरे में गया

देखा उसका पति बिस्तर पर सोया हुआ था, और वो खाना बना रही थी, जब मैंने उसे दावा दी तो उसने मुझे धन्यवाद कहा और बैठने को कहा मैंने कहा नही आंटी आप खाना बनाओ मैं चलता हूँ।

उसके कुछ देर बाद वो फिर से मेरे कमरे के बाहर आकर मुझे आवाज देने लगी। मैं जब दरवाजे के पास गया तो देखा कि उसके हाथ में चाय की कप थी। उसने मुझे वो कप दी कहा बेटा चाय पी लो तुमने मेरी इतनी मदत की है।

मैंने उसकी बात का मान रखने के लिए चाय ले ली। और उससे अंदर आने का आग्रह किया वो मेरे कमरे में आ गयी। मैंने उसे बैठने को कहा और मैं भी बैठकर चाय पीने लगा।

थोड़ी बहुत बात चीत चालू हो गयी। उसने पूछा बेटा आप अकेले रहते हो तो मैंने कहा जी आंटी मैं अकेले रहता हूँ। तो उसने कहा अकेले रहने में दिक्कत तो होती होगी। मैंने कहा जी आंटी होती तो है अब कर भी क्या सकते है।

मैं उससे बात करते करते बॉथरूम वाले सीन को याद कर उसके बदन को घूर रहा था, वो मेरे अस्त व्यस्त पड़े कमरे को देख रही थी। मैंने देखा वो बार बार मेरी v शेप वाली चड्डी जो दरवाजे के कोर से टंगी सुख रही थी उसे देखे जा रही थी,

तभी मैंने उससे उसके बारे में पूछा तो वो थोड़ी भावुक सी हो गयी उसने कहा मेरी सारी जिंदगी तो मेरे बीमार पति की सेवा में निकल गयी। जिंदगी के सारे सुख से वंचित रह गयी, और भी ढेर सारी बातें कही आखिर में उसके आंखों से आँसू आने लगे। तो वो अपनी साड़ी के पल्लू से अपने आँसू पोंछने लगी।

तो मेरी नजर उसके सीने पर पड़ी क्योंकि वो एकदम आजाद हो चुकी थी, उसे थोड़ा भी शक नही था कि मैं कहाँ अपनी नज़रे गड़ाए हुए था। उसके बड़े गले वाले ब्लाउज के गले से उसकी दोनों बड़ी-बड़ी चुचियों के उभार ऊपर निकले हुए थे, और दोनों चुचियों के बीच की रेखा इतनी तंग थी, उसके दोनों चुचे आपस में सटे हुए थे।

ऐसा लग रहा था, की उसने अपनी चुचियों के साइज के हिसाब से छोटी साइज के ब्लाउज में जबरदस्ती अपनी चुचियों को कैद किया हुआ था। मेरा लंड तो चड्डी में ही टाइट हो चुका था, और चिप चिप हो चुका था, मैंने उसे भावुक होता देख उसे चुप कराने लगा मैंने उसे दिलाशा दिया कि सब ठीक हो जाएगा।

फिर जाकर वो थोड़ी नार्मल हुई और अपनी लाल लाल आंखों से मेरे कमरे और मेरी चड्डी को ताकने लगी। पर मैं ये नही समझ पाया कि वो जान बूझकर मेरी चड्डी को देख रही है या फिर ऐसे ही उसकी नज़र पड़ जा रही है।

कुछ देर बाद वो कमरे से चली गयी और मैं अपने कमरे में बैठकर उसके नंगे बदन के बारे में ही सोच रहा था, की मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। तो इस बार मैंने अपनी पैंट उतारी और बिस्तर पर लेटकर अपनी आँखें बंद करके उस औरत की नंगी गांड और बड़ी बड़ी चुचियों के सपने देखते देखते मुठ मारने लगा।

मुझे इतना आनंद कभी नही आया मैं कामुकता में लीन अपने लंड को हिलाए जा रहा था, मेरा लंड झड़ने ही वाला था, की तभी फिर से उस औरत ने कमरे के बाहर से आवाज लगाई, मैं झट से उठा और जल्दी से टॉवल लपेट कर खड़ा हो गया। इतने में वो अंदर आ गयी और खाना लेकर मेरे सामने खड़ी हो गयी।

मेरा लंड टॉवल के अंदर से थोड़ा उठा हुआ था, लेकिन उसका ध्यान वहाँ नही था, वो हाथ में खाना लेकर मेरे सामने खड़ी थी, तभी मेरे लंड ने टॉवल में ही पिचकारी छोड़ दी। मेरे लंड से निकला वीर्य जमीन पर गिरने लगा। जमीन पर कुछ टपकने की आवाज आई तो उसका ध्यान नीचे गया। तब तक मेरे लंड का वीर्य जमीन पर फैल चुका था, और मेरे लंड से बार बार वीर्य की पिचकारी निकल रही थी।

पहली बार मेरे लंड से इतना सारा वीर्य निकला था। जिससे देख वो थोड़ी शर्मा गयी और अपना मुँह दूसरी तरफ मोड़ लिया। मेरे लंड से वीर्य बून्द बून्द करके निकल रहा था।

फिर उसने मुझे खाना दिया और वहाँ से चली गयी। मैं भी शर्म के मारे अपने आप को कोसने लगा। उस दिन शर्म से मैं कमरे से बाहर तक नही निकला।

रात हो चुकी थी मैंने देखा उसके कमरे की लाइट ऑफ है तो मैं बॉथरूम में पिसाब करने गया तो देखा कि उस औरत ने पहने हुए कपड़े धोने को रखे हुए थे, मैंने झट से उसकी ब्लाउज उठाई और अपने कमरे में ले आया और उसके ब्लाउज की खुशबू सूंघने लगा, जिसमे उसके बदन के पसीने की मादक खुसबू आ रही थी,

उसके ब्लाउज के गोलों के साइज से ही पता चल रहा था, की उसके गोले कितने बड़े होंगे और उसके गोलो को मसलने में कितना मज़ा आएगा, मैं पागलों की तरह उसकी ब्लाउज को सूंघे जा रहा था। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। तो मैंने अपने लंड को हिलाना चालू कर दिया और अपने लंड का सारा माल उसके ब्लाउज के दोनों तरफ के कटोरों में भर दिया।

उसकी ब्लाउज वीर्य से पूरी तरह लस फस हो चुकी थी, जब मैं झड़ कर सांत हो गया तो मुझे समझ नही आ रहा था, की जब उसे ये पता चलेगा कि मैंने उसकी ब्लाउज में अपना बीज निकाला है, तो वो क्या सोचेगी, मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था, जोश-जोश में मैंने उसकी ब्लाउज तो खराब कर ही दी थी, पर अब मेरी फट रही थी।

मैं जल्दी से उसकी ब्लाउज को बाथरूम में लेकर गया और पानी डालकर धोने लगा। वीर्य तो उसकी ब्लाउज से बहकर निकल गया लेकिन उसके ब्लाउज के कटोरों में अभी भी थोड़ा वीर्य का चिकनापन लगा हुआ था। तो मैंने घबराहट में उसकी ब्लाउज को बाथरूम की जमीन पर गिराकर छोड़ दिया। ताकि उसे लगे कि बाथरूम के पानी से गिला हुआ है।

और फिर अपने कमरे में आ गया अभी भी मेरा लंड खड़ा था, मैं बिस्तर पर नंगा लेट गया और फिर उस औरत के बारे में सोचकर मुठ मारनी शुरू कर दी। कुछ समय बाद मेरे लंड से वीर्य की फुहार निकली जिससे मेरी मुट्ठी और मेरी झाँटे भर गई। मैंने अपने हाथ और लंड को साफ किया लेकिन झांटो में लगी वीर्य साफ नही हो रही थी।

काफी घनी झाँटे थी तो मैंने उसकी वक़्त रेज़र से अपनी झाँटे साफ की झाँटे साफ करने के बाद लंड का साइज और भी ज्यादा दिखने लगा। उसके बाद मैं सो गया। और अगली सुबह मैं उठकर ऑफिस चला गया।

उस दिन मैं दिन भर ऑफिस में रहा और बीती सारी बातों को याद करता रहा, उस औरत के बारे में सोंच-सोंचकर मेरा लंड बार बार उठता रहा। दोस्तों आगे की कहानी मैं आप सभी को कहानी के अगले भाग- भाड़ेदार बुजुर्ग औरत की चुत चुदाई-2 जल्द ही आप सभी के लिए लेकर आऊँगा उम्मीद है आप सब कहानी के दूसरे भाग को पढ़ कर उस औरत की चुदाई के मज़े लेंगे।