मुंशी की लालची बीवी की चुदाई।

मैं एक जमींदार का बेटा हूँ। मेरे पिता हमारे गाँव के सबसे बड़े आदमी है। हमारे यहाँ खाते के हिसाब किताब की देखरेख के लिए एक मुंशी है। जो काफी सालों से हमारे यहाँ काम करता था।

रोज़ मुंसी की बीवी दोपहर का खाना लेकर आती थी। जब वो खा लेता था। तब उसकी बीवी टिफिन लेकर घर वापस चली जाती थी। जब वो आती थी। तो उसकी नज़रे क़ीमती सामान पर टिकी रहती थी।

वो काफी लालची किस्म की औरत थी। वो थोड़ी सांवली सी नाटी और थोड़ी मोटी पर देखने मे मस्त थी। वो करीब 45 साल के आस पास की होगी। उसकी हाईट 5 फुट मोटी उभरी हुई गाँड़ जो उसके चलने पर ऊपर नीचे लचकते थे।

वो मुझसे भी उधार लिया करती थी। लेकिन कभी उधार वापस नही लौटती। एक दिन दोपहर में जब मुंशी खाना खा रहा था। तो वो मेरे पास आई और बोली मालिक कुछ पैसे चाहिए। मैंने उसे पैसे दे दिये लेकिन वो उधार वाली बात मुंशी को बताने के लिए मना करती थी।

मैं भी उसे अपने पास बैठा कर रखता था। और देरी से उसे पैसे देता था। तब तक मैं उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को देखकर मज़े लेता था। जब वो बैठी रहती थी। तो उसकी चुचियों की दरारें ब्लाउज के ऊपर से ही दिखती रहती थी। मुंशी अब बूढा हो चुका था। और मुंशी में उसकी बीवी को चोदने का दम नही रह था।

मुंशी की बीवी गदराई हुई औरत थी। मेरे यहाँ काम करने वाले लोग भी उसपे गंदी नज़र रखते थे। मैं भी उस पर गंदी नज़र से उसके बदन को घूरता रहता था। और सोचता था। काश मेरे लंड को इसकी नरम बूर का भोग लग जाये।

उसदिन मैंने उसे पैसे देते हुए कहा तूने मुझसे पहले भी पैसे लिए है। तू अपना उधार कब चुकायेगी। मैंने कहा कि जल्दी तू सारा उधार चुका देना नही तो मुझे मुंशी से बात करनी पड़ेगी। तो वो कुछ बोलने वाली थी! लेकिन तभी वहाँ मुंशी पहुँच गया।

वो टिफीन लेकर अपने घर चली गई। अगले दिन जब वो टिफिन लेकर आई। तो मैंने उसे देखा लेकिन मैंने कुछ कहा नही। वो भी अपने घर चली गयी। कुछ घंटों बाद उसने मुझे फोन किया और मुझे खेत में बुलाया।

शाम के करीब 4 बजे मैं खेत मे पहुँच गया। वो वहाँ पहले से ही खड़ी थी। वो मुझे देखते ही बोली मालिक कही और बात करते है। यहाँ लोग आ जा रहे है। खेत के पास ही मेरा गोदाम था। वहां कोई नही आता जाता था। गोदाम की चाभी मेरे पास थी। तो मैं उसे वहीं ले गया।

गोदाम में मैं खटिये पर बैठते हुए उससे पूछने लगा कि क्या बात है? मुझे यहाँ बात करने के लिए यहाँ क्यों बुलाया? तो मुंशी की बीवी घबराती हुई बोली मालिक मेरे पास आपके उधार चुकाने के लिए पैसे नही है। मैं थोड़ा चौक कर बोला क्या? तो वो मेरा घुटना पकड़ते हुए बैठ गयी बोली आप मेरे पति को ये बात मत बताना।

वो गिड़गिड़ाने लगी उसने कहा और किसी तरह मैं आपका कर्ज चुका सकू तो बताइए? ये सुनते ही मेरे दिमाग में एक आईडिया आया मैंने उससे खटिये पर बैठने को कहा पहले तो वो हिचकिचा रही थी। फिर मेरे बगल में खटिये पर बैठ गयी।

उसने कहाँ मेरा पति मुझे पैसे नही देता मैं अपने शौख पूरी करने के लिए आपसे पैसे लेती हूँ। मैंने उससे कहा तू कर्ज चुकाएगी कैसे? तो वो बोली आप बताओ मैं कैसे आपका कर्ज उतारू? मैं उसकी आँखों में अपनी वासना भारी निग़ाहों से देखता रहा। वो भी मुझे देखकर बीच में अपना चेहरा नीचे करती। और फिर देखती।।।।

मैंने तुरंत अपना एक हाथ उसकी कमर पर रख दिया। वो थोड़ी हैरानी से मुझे और मेरे हाथ को देखने लगी। पर उसने कोई आपत्ति नही जताई। फिर मैंने उसको अपनी ओर खींच कर बैठा लिया।। अब उसकी जांघ मेरे जांघ से सट गयी थी।

फिर मैं उसके चेहरे को देखने लगा। और अपने हाथ से उसकी कमर को सहलाने लगा। और एक हाथ को उसके कंधे पर रख उसके कंधे को दबाने लगा। वो चुप थी। और अभी तक सब आराम से हो रहा था। जब मैं उसके होंठो को चूमने ही वाला था। तो वो कहने लगी मालिक ये सब गलत है।

मैं शादी शुदा हूँ। मेरे पति को जब मालूम पड़ेगा तो क्या होगा? मैंने कहा क्या पता चलेगा। वो बोली जो आप मेरे साथ करना चाहते है। वो! मैंने कहा तेरे पति को तब पता चलेगा जब तू उसे बताएगी।

वो शर्माते हुई बोली मैं नही बताऊंगी। पर ये सब अच्छा नही लगता। आप मेरे बच्चों की उम्र के हो। मैंने कहा कि तू बस एक औरत है और मैं एक मर्द हूँ। ये कहते हुए मैंने उसे खींचते हुए अपने से चिपका लिया। फिर उसकी पीठ सहलाते हुए। अपना एक हाथ उसके गले मे लगा कर उसके होंठो पर अपने होठों को चिपका दिया।

करीब 5 मिनट तक उसकी होठो को चूसता रहा। उसने मुझे धकेलते हुए अपने होठों से मेरे होंठो को अलग कर लिया। बोली मालिक यहाँ कोई देख लेगा। तो मैंने उसे कहा कि यहाँ कोई नही आने वाला है। तू बस मुझे करने दे। ये कहते हुए मैंने उसके साड़ी के पल्लू को उसके सीने पर से खींच दिया।

उसकी चुचियों की गहराइयों को देख मेरा पारा चढ़ गया। मैं फिर से उसके होंठो पर टूट गया। और देर तक उसकी होंठो को चूसने लगा। मैं उसे अपनी गोद मे बिठा कर खूब उसकी चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा। फिर मैंने उसकी गाँड़ को मसलने लगा

और उसकी साड़ी को ऊपर उठाकर उसकी नंगी गाँड़ को अपनी हाथों से मसलने लगा। मैंने कभी ऐसी बड़ी गाँड़ नही देखी थी। मैं उसकी ब्लाउज को खोलकर उसकी चुचियों को आपस मे टकराने लगा। और ज़ोर ज़ोर से मसलने लगा। वो आईशहह उस्स इस्स अहह आआआह कर उछलने लगी।

मैं उसकी आवज सुनकर पागल हो चुका था। मैं ज़ोर ज़ोर से उसकी चुचियों को चूसने लगा। जब मैं उसकी चुचियों को पी रहा था। तब उसने मेरा चेहरा ऊपर किया। और उसने अपने होठों में मेरे होठो को भर लिया। वो और भी जोश में मेरे होठो को पीने लग गयी।

वो मेरी गोद मे बैठे ही मेरे होंठो को अपने नशीले अंदाज में चूसे जा रही थी। इतने में मैंने उसकी साड़ी को खोल दिया। और उसको खटिये पर पटक कर उसके ऊपर चढ़ गया। अब मैं उसकी नंगी पीठ को चुम रहा था। वो सेक्सी आवाज में आह आह आ आ आ उफ्फ अहह करने लगी।

मैं उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी गाँड़ पर आ गया। और उसकी गाँड़ पर अपने दांतों को गड़ा दिया। वो मस्त होकर आआआह आआआह…… करने लगी। मैं भी उसकी सांवली बड़ी सी गाँड़ देखकर उत्तेजित हो रहा था। मैंने झट से अपने कपड़े उतारकर फेंक दिया।

और अपना नंगा शरीर लेकर उसपर लेट गया। और उसकी पीठ से अपने सीने को चिपकाए उसके गालो और होंठो को चूमने लगा। और अपनी कमर को उसकी गाँड़ पर पटकने लगा। मैंने बिना लंड गाँड़ में घुसाये उसकी गाँड़ मारने लगा।

आआआह आआआह मा आआआह अहह….. करने लगी। उसे भी ऐसा करने से ज्यादा मज़ा आ रहा था। जब मेरी कमर उसकी गाँड़ पर गिरती तब ठाप्प ठाप्प ठप ठप की आवाज आती। मेरा लंड भी उसकी नरम गाँड़ से टकरा कर अपने सही 4″ मोटे और 8″ लंबे आकार में आ गया था।

उसकी बूर भी अब गीली होने लगी थी। फिर मैंने उसकी गीली काली बूर में अपनी उंगली घुसा कर उसके बूर में उंगली मारने लगा। वो उछल कर मेरी उंगली अपनी बूर में लेने लगी। मैंने सोचा कि पहले इसकी मस्त सेक्सी गाँड़ मरूँगा। फिर इसकी बूर की आग को सांत करूँगा। वो शादी शुदा थी। तो मैंने बिना कंडोम के ही उसको चोदने का सोचा।

फिर मैं उठकर उसकी जाँघों पर बैठकर उसकी चूतड़ों के दोनों हिस्सो के बीच मे अपनी उंगली फेरने लगा। जब मेरी उंगली उसकी गाँड़ की छेद पर लगी। तब मैंने महसूस किया कि उसकी गाँड़ की छेद छोटी और अनछुई लग रहा थी। उसके पति मुंशी ने कभी उसकी गाँड़ नही मारी थी।

मैंने उससे पूछा कि क्या तेरे पति ने कभी तेरी गाँड़ नही मारी तो वो बोली उनको गाँड़ में लंड डालने में घिन्न आती थी। मैंने पूछा कि तेरा कभी गाँड़ मरवाने को मनन नही करता तो वो बोली करता है। जब भी कोई औरत बताती है कि उसका पति कैसे जम कर उसकी गाँड़ मरता है। तब मुझे भी गाँड़ मरवाने का मन करता है।

मैंने कहा आज मैं तेरी गाँड़ मरवाने की मुराद पूरी करूँगा। तो वो मुस्कुराते हुए अपना चेहरा खटिये पर दबा ली। फिर मैं उसकी चूतड़ों के दोनों फांकों को चीरते हुए अलग करके उनकी गाँड़ की छेद बाहर की और ढेर सारा अपना गर्म थूक छेद पर लगा दिया।

फिर मैं अपना लंड उसकी गाँड़ में घुसाने को तैयार था। फिर मैंने अपना तन हुआ लंड उनकी गाँड़ की छेद पर तान दिया। और अपने हाथों से लंड पकड़े उसके गाँड़ में लंड घुसाने की कोशिश करने लगा। वो पहली बार गाँड़ मरवा रही थी। जब मेरा लंड उसकी गाँड़ की छेद पर दबाव लगा रहा था। वो छटपटा रही थी। उसकी गाँड़ किसी नई नवेली दुल्हन की तरह बिल्कुल कोरी थी।

मैंने एक ज़ोर का धक्का मार और लंड फिसलकर 2 इंच उसकी गाँड़ में घुस गया। वो दर्द से रोने लगी। चिल्लाती हुई आआआह आआआह माहहहह आई रे रे अब नही आआआह मांहहहह अहह अहह… कर रोने लगी। पर मैं जबरन उसकी छोटी सी गाँड़ की छेद में अपना 4 इंच मोटा लौड़ा डालने पर तुला था।

मैंने फिर एक ज़ोर का धक्का मारा और आधे से ज्यादा लंड उसकी गाँड़ की छेद को चीरता हुआ। उसकी गाँड़ में समा गया। वो दर्द से कराहने लगी। आआआह उम्मह उम्मह हहह आह अहहह नही रे निकाल लीजिए मालिक बर्दास्त नही हो रहा है। आह आह मर गई ई ई अरे बआआप रे….

मैं उसके ऊपर लेटकर उसके होठो को अपने होठों से दबा कर चूसने लगा। अब उसकी चींखें बाहर नही आ रही थीं। अब फिर से मैं उसके गाँड़ में धक्का मारने को तैयार था। मैं उसको चूमते हुए उसकी गाँड़ में आधा लंड घुसाये उसके ऊपर लेटा हुआ था। मेरे पैर उसके पैरो पर थे।

फिर मैंने उसकी टाँगो को अपनी टाँगो से फैलाकर खोला दर्द के कारण उसने अपनी दोनों टाँगो को चिपका लिया था। अब मैंने उसकी टाँगो को खोलकर फैला दिया था। अब मेरे पैर उसके दोनों पैरों के बीच थे। मैंने फिर से अपनी कमर हवा में उठा ली। वो भी समझ गयी कि मैं उसकी गाँड़ मारने वाला हूँ।

इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने एक ज़ोर का धक्का मारते हुए अपनी कमर को उसकी गाँड़ पर चिपका दिया। इसबार मेरा लंड पूरा उसकी गाँड़ में धस चुका था। वो चुप थी। पर उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे। अब उसकी गाँड़ फट चुकी थी। मैं धक्काधक…. उसकी गाँड़ चोदने लगा। वो हर झटके पर मां ह ह ह ह… आआआह… उम्मह ह ह ह… अहह ह ह ह… कर कराह रही थी।

साथ ही खटिये की चरमराने की आवाज के साथ उसके मुँह से कराहने की आवाज निकल रही थी। मैं उठकर उसके गाँड़ पर बैठ गया। और उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर आगे पीछे करके उसकी गाँड़ में लंड पेलने लगा। उसकी गाँड़ में घुसता हुआ लंड मस्त लग रहा था।

मैं अब उसकी गाँड़ पर बैठे हुए अपना पूरा लंड उसकी गाँड़ में चोदने लगा। करीब 15 मिनट मैंने वैसे ही उसकी गाँड़ मारी अब मैं झड़ने वाला था। तो मैंने अपना लंड उसकी गाँड़ से निकाल लिया। अब उसकी गाँड़ की वो छोटी सी छेद फट कर 4 इंच की गुफा बन गयी थी।

मैं उसकी गाँड़ की फैली हुई छेद को देखकर लंड की मुठ मारने लगा। तुरंत मेरे लंड ने अपना सारा गाढ़ा गर्म माल बाहर फेंक दिया। मैंने अपने लंड से निकले गाढ़े गर्म वीर्य को उसकी गाँड़ की बड़ी छेद में भर दिया। मैं थक गया था। मैं भी उसके बगल में लेट कर तेज़ी से सांसे लेने लगा।

वो बार बार अपनी गाँड़ पर हाथ लगा रही थी। शायद अभी अभी उसकी गाँड़ की सील टूटने से उसकी गाँड़ में दर्द हो रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने फिर से एक बार उसके चुचियों को दबाने लगा। वो भी अब पीठ के बल लेट गयी थी। और मेरे हाथों पर अपने हाथ रखकर अपनी चुचियाँ दबवाने लगी।

मैं उसकी चुचियों को दबाते हुए उसके होंठो को किस कर रहा था। उसकी सांसे उखड़ रही थी। फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी बूर पर रख दिया। और उसकी जांघो को फैलाकर जब मैंने उसकी बूर को छुआ तो उसकी बूर पानी से लबालब हो चुकी थी। उसकी बूर पर मेरा हाथ लगते ही वो गर्म तेज़ सांसे छोड़ने लगी।

मैं समझ गया कि इसकी चुदाई की प्यास कई सालों से बुझी नही है। मैंने अपनी दो उंगलियाँ उसकी बूर में डाल दी। और ज़ोर ज़ोर से उसके बूर में उंगली करने लगा। वो आआआह अहह उम्मह उम्मह ह ह ह आ आ आ आह करने लगी। फच्च फच्च कि आवाज के साथ मेरी उंगली उसकी बूर में और अंदर तक घुसने लगी।

तभी उसके बूर से पानी की फुहारें बाहर आने लगीं। जब मैं अपनी उंगलियों को उसकी बूर में घुसा कर निकालता तब उसकी बूर से फ़ र र र करती हुई पानी बाहर फेंकती। वो बहुत गर्म होचुकी थी। फिर मैंने अपना लंड उसकी हाथों में दे दिया। वो भी मेरे लंड को हिलाकर खड़ा करने लगी।

अब मेरा 4 इंच मोटा और 8 इंच मोटा लौड़ा उसकी बूर की खुदाई करने को तैयार था। मैं उसकी टाँगो के बीच बैठ गया। और उसके दोनों पैरों को फैलाते हुए खटिये के दोनों तरफ कर दिया। अब उसकी काली बूर की गुलाबी छेद खुल गयी थी। और उसके बूर की काली झाँटो के बीच छिपी हुई थी।

मैं अपना लंड पकड़ कर उसके टाँगो के बीच घुटनों के बल बैठ गया। और अपना लंड उसकी बूर की ग़ुलाबी छेद पर लगाने लगा। मेरा लंड उसकी काली झाँटो को हटाता हुआ उसकी बूर के गुलाबी छेद को चूमने लगा। फिर मैंने अपने दोनों हाथों को उसके सीने के दोनों तरफ रख दिया।

और अपना लंड उसकी बूर में दबाने लगा। जैसे ही लंड का अगला भाग एक इंच बूर में घुस गया। मैंने एक धक्का मार और मेरा लंड उसकी बूर में आधा उतर गया। उसकी बूर में अंदर घुसे लंड के हिस्से पर उसकी बूर अपना कसाव कसने लगी। वो कहने लगी मालिक आपका लंड इतना मोटा कैसे है। मैंने कहा क्यों क्या हुआ?

वो बोली इतनी चुदी हुई बूर में भी आपका लंड कसा हुआ (टाइट) घुस रहा है। मैंने कहा तुझे भी मज़ा आएगा जब इतना मोटा लंड तेरी बूर दुबारा फ़ाडेगा। ये सुनकर वो मुस्कुरा दी। फिर मैंने दुबारा उसकी बूर में धक्का मार दिया। अब उसकी बूर में लंड पूरा घुस गया। वो अरे रे ह ह ह ह… मां अ ह ह ह… मार डाला आ आ चींखने लगी। शायद लंड उसकी बच्चेदानी में लग गया था।

उसे शांत करने के लिए मैं उसकी बड़ी बड़ी चुचियों को चूसने लगा। मैंने खूब उसकी चुचियों को निचोड़ने लगा। जब मैं उसकी चुचियों को अपने दाँतो से काटता तब वो आन्ह आन्ह की हल्की सी आवाज निकालती। फिर मैंने उसकी बूर में लंड चलाना शुरू किया।

एक ही धक्के में लंड पूरा अंदर बाहर करने लगा। मैं उसकी बूर में लगातार धक्के मार रहा था। वो लेटी हुई अपनी बूर में मेरे 8 इंच के लौड़े से अपनी बूर चुदवा रही थी। मेरे धक्कों से उसकी चुचियाँ ऊपर नीचे उछल रही थी। लगातार चुदाई से उसकी बूर में चिकनाहट होने लगी। और फिर उसकी बूर ने पानी(वीर्य) छोड़ दिया।

पर मेरा लंड उसकी बूर के पानी को बाहर नही आने दे रहा था। मैं तेज़ी से अपना लंड उसकी बूर में पेल रहा था। लंड उसके बूर के पानी को उसकी बूर में ही मथ कर झाग बना रहा था। उसके बूर के पानी से बना हुआ झाग उसके बूर के अगल बगल और मेरे लंड पर फैल गया था।

मैं करीब 20 मिनट से अपने लंड से उसकी बूर की गहराई को नाप रहा था। आखिर में मेरा भी पानी निकलने वाला था। तो मैंने भी उसे कस के अपनी बाँहों में जकड़ लिया। उसने भी अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर अपनी बूर पर दबा दिया। इतने में मेरे लंड ने उसकी बूर में फुहार मार दी।

उसकी बूर मेरे वीर्य से भर गई थी। वो भी मेरे गर्म वीर्य को अपनी बूर में लेकर वीर्य की गर्मी का आनंद ले रही थी। मेरा लंड धीरे धीरे फुहार मारकर उसकी बूर को पूरा भर चुका था। मैंने उसे कहा तू अब ऐसे ही मेरा कर्ज उतारती रहना।

उसके बाद मैं लगभग हर दूसरे दिन उसकी चुदाई करने लगा। मुंशी तो दिनभर हमारे यहाँ काम करता था। और उसकी बेटी कॉलेज चली जाती थी। मैं उसके घर जाकर दिनभर उसको चोदता रहता था। मैंने उसकी गाँड़ चोद चोदकर फैला दी थी। मुझे उसकी बूर में अपना वीर्य निकालने की आदत सी पड़ चुकी थी। उसका नतीजा ये हुआ कि एक बार उसके पेट में मेरा बच्चा ठहर गया।

फिर मैंने उसका बच्चा गिरवाया और उसको गर्भ रोकने की दवा खिलाकर अभी तक उसको चोदता रहता हूँ। तो कैसी लगी आप सब को मेरी ये कहानी उम्मीद है। अच्छी लगी हो मैंने मुंशी की बेटी को भी पटा कर चोदा वो कहानी फिर कभी बताऊँगा।

Like, share and comment करे!

error: Content is protected !!