माँ की गलती का राज

हेलो दोस्तों.. मेरा नाम निखिल है और मेरी उम्र 22 साल है. दोस्तों.. आज मैं बहुत खुश हूँ क्योंकि मुझे अपनी एक सच्ची घटना आप सभी के सामने लाने का मौका मिला और मैं आप सभी को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ..

क्योंकि आप सभी इन कहानियों को अपना कीमती समय देकर पढ़ते है. मैं भी आपकी तरह ही इस वेबसाइट सेक्सी कहानी पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता हूँ.

दोस्तों अब मैं अपने घर के लोगों के बारे में बताता हूँ।. मैं एक छोटे से गाँव में रहता हूँ और मेरा घर खेतों के बीच में बना हुआ है. मेरे घर में हम तीन लोग मैं, माँ और मेरे पिताजी रहते है।
मैं B.sc का फाईनल एग्जाम दे चुका हूँ और अब पढ़ाई पूरी होने की वजह से अपने घर पर ही रहता हूँ।

मेरे पिता जी 50 साल के है और वो हमेशा बहुत बीमार रहते है जिस कारण वो बहुत कमजोर है. मेरी माँ की उम्र 45 साल है और वो दिखने में बहुत सुंदर दिखती है.. मेरी माँ का रंग गोरा है और मेरी माँ का फिगर बहुत कमाल का है।

उनके बूब्स बड़े बड़े और गोल आकार के है और मेरी माँ के बूब्स उनकी ब्लाउज से बाहर झांकते रहते है.. क्योंकि वो ब्रा में पूरी तरह नहीं समाते. मेरी माँ घर का सारा काम खुद ही करती है जिससे मेरी माँ का शरीर कसा हुआ और गठीला है।

मेरे पिता जी के पास बहुत सारी ज़मीन है जिसकी वजह से घर के आर्थिक हालत बहुत अच्छी है.. हमारा घर बहुत बड़ा है. जिसमे 3 बेडरूम ड्राइंग-रूम और सभी के अलग बाथरूम है। और हम तीनों ही अलग अलग रूम में सोते है.

दोस्तों.. अब मैं आप सभी को अपने साथ हुई एक सच्ची घटना बताने जा रहा हूँ.. जो शायद 2 महीने पहले मेरी माँ के साथ घटी थी.

एक दिन अचानक मेरे मामा जी के बड़े लड़के की मौत हो गई.. मेरे मामा जी हमारे गावं से कुछ किलोमीटर की दूरी पर ही रहते है. हम तीनों को वहाँ पर जाना पड़ा.. लेकिन मेरे पिताजी की तबीयत भी थोड़ी ठीक नहीं थी.. इस वजह से मैं और पिता जी उसी दिन शाम को अंतिम संस्कार के बाद अपने घर पर वापस आ गये।

मेरी माँ वहाँ पर कुछ दिनों के लिए रुक गयी और फिर मेरी माँ एक महीने बाद घर पर वापस आई. तो सब कुछ पहले जैसा ठीक ठाक हो गया.. करीब माँ को मामा के यहाँ से आये एक महीना हो चुका था।

माँ मुझसे बोली कि निखिल बेटा मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है. मैं झट से बोला कि बताओ माँ क्या बात है? तो माँ मुझसे बोली कि राहुल मैं तुम्हे क्या बताऊँ मुझे बहुत शर्म आ रही है? तो मैंने कहा कि माँ मुझसे क्या शर्म और मैं यह बात किसी को नहीं बताऊंगा।

फिर माँ ने मुझे अपनी कसम दी कि मैं यह बात किसी को ना बताऊँ. मैंने हाँ कर दी मेरे पिता जी उस समय घर पर नहीं थे वो अपने ईलाज के लिए शहर गये हुए थे.

माँ मुझसे बोली कि राहुल मुझे पिछले दो महीने से मेरी माहवारी नहीं आई है. मैं यह बात सुनकर बहुत हैरान रह गया था कि क्या माँ कभी मुझसे ऐसी बात भी कर सकती है?

मैं अब बड़ा हो गया था और सेक्स के बारे में सब कुछ जानता था क्योंकि मेरी सेक्स में बहुत रूचि थी. तो मैंने माँ की बात सुनकर कहा कि माँ अब मैं क्या कर सकता हूँ? तो माँ बोली कि बेटा मुझे लगता है कि मैं प्रेग्नेंट हो गई हूँ

तुम मेरे लिए शहर से बच्चा गिराने की दवाई ला दो. मैंने माँ से कहा कि तुम पिता जी को बोल दो वो ले आएगे. माँ मुझसे बोली कि बेटा मुझे तुम्हारे पिता के साथ सेक्स किए हुए 2 साल हो गये है और अगर उन्हे पता चल गया तो वो मुझे घर से निकाल देंगे।

माँ की यह बात सुनकर मुझे बहुत बड़ा धक्का लगा उतने ही देर में मैं माँ के बारे में क्या से क्या सोचने लगा। पर मैं कुछ ना बोल सका और फिर मेरी माँ मेरे सामने गिड़गिड़ाने लग गई.. तो मैंने उन्हे संभाला और उनसे सारी बात बताने को कहा।

तो माँ ने मुझे बताया कि मेरे मामा का छोटा लड़का जो 25 साल का है.. उसने मेरी माँ को ज़बरदस्ती चोदा माँ के मना करने पर भी वो नही माना और उसने माँ को लगातार एक हफ़्ते तक रात में चोदा और माँ शर्म के मारे किसी को कुछ भी नहीं बता पाई।

माँ उसी दौरान प्रेग्नेंट हो गयी थी। तो मुझे अपने मामा के लड़के पर बहुत गुस्सा आया.. लेकिन माँ ने मुझसे कहा कि बेटा तुम कुछ मत करना नहीं तो बहुत बदनामी होगी. फिर मैं उस दिन रात को सो भी नहीं पाया और सुबह उठकर माँ के लिए शहर से दवाई ले आया.

फिर उस दवाई को खाने के एक दिन बाद माँ को महावारी आ गयी तो माँ ने मुझसे धन्यवाद कहा और कुछ दिन ऐसे ही गुजर गये और एक दिन मैं अपने रूम में बैठा था।
तो माँ मेरे रूम में सफाई के लिए आ गयी और जब वो झुकी तो उसके बूब्स साफ साफ दिखने लगे और माँ के बूब्स देखकर मेरे मन में हलचल मच गई.. माँ झाडू लगाने के बाद चली गयी।

मैंने उठकर बाथरूम में जाकर माँ के नाम की मुठ मारने लगा। मुठ मारते हुए मैं सपना देखने लगा कि मैंने अपने लंड का माल माँ के बूब्स पर ही छोड़ दिया है। आप ये कहानी सेक्सी कहानी की वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

मुझे बहुत मज़ा आया और उस दिन से मेरे मन में माँ के प्रति गलत विचार आने लगे और मैं माँ को चोदने के बारे में सोचने लगा. फिर एक दिन मैं हिम्मत करके रात के 12 बजे माँ के रूम में चला गया. तो माँ मुझे देखकर उठ गयी और बोली कि निखिल बेटा क्या काम है?

मैं बोला कि माँ मुझे तुम से कुछ जरूरी बात करनी है.. माँ बोली ठीक है। बताओ क्या बात है? मैंने माँ से कहा कि माँ मैं तुम्हे चोदना चाहता हूँ. तभी माँ मेरी यह बात सुनकर बहुत हैरान हो गयी और बोली कि बेटा तुम यह क्या कह रहे हो? मैं तुम्हारी माँ हूँ.. यह कैसे हो सकता है?

मैंने माँ से कहा कि मैंने भी तो तुम्हारी मदद की थी और वो बात किसी को भी नहीं बताई.. तो यह क्यों नहीं हो सकता?

फिर मेरी बात सुनकर माँ बोली कि निखिल ठीक है.. लेकिन यह बात किसी को भी पता नहीं चलनी चाहिए. मैंने हाँ कर दी तो माँ ने मुझे रूम का लॉक लगाने को कहा तो मैंने लॉक लगा दिया. फिर में माँ के करीब आया और उन्हे बाहों में ले लिया और उसके होंठो पर किस करने लगा.

मेरा लंड अब धीरे-धीरे अपना सर उठाकर खड़ा हो रहा था। जिसे माँ ऊपर से अपना एक हाथ रखकर सहला रही थी। जिससे मेरा लंड जल्द ही तनकर मोटा तगड़ा आकार ले चुका था।
फिर थोड़ी देर मैंने माँ के होंठो को किस करने का बाद मैंने माँ से कपड़े निकालने को कहा. तो माँ झट से अपने पूरे कपड़े निकाल कर नंगी हो गयी माँ के नंगे बदन को देखकर मेरे तो होश ही उड़ गये..

माँ के बूब्स तने हुए टाइट और बहुत बड़े थे और उन पर काले कलर की निप्पल बड़ी ही आकर्षक और सुंदर लग रही थी. फिर मैंने झट से उनके दोनों बूब्स को पकड़ लिया उनको सहलाने और दबाने लगा।

माँ के दोनों बूब्स मेरे दोनों हाथों में समा नहीं रहे थे और अब माँ मुझसे लिपट रही थी और मेरे बूब्स दबाने पर आअह्ह्ह्ह.. ऊहहह.. की आवाज़े निकाल रही थी. फिर मैंने भी अपने पूरे कपड़े उतार दिए और माँ मेरे नंगे शरीर और तगड़े मोटे लंड को देख कर कहने लगी कि!

बेटा तुम तो अब पूरे आदमी बन गये हो और कहकर माँ ने मेरे लंड को अपनी हाथों के गिरफत में कर लिया और अपने हाथ से मेरे लंड के ऊपर की चमड़ी को आगे पीछे सरकाते हुए मेरे लंड के फुले हुए और गोल सुपड़े को जांचने लगी.

माँ ने मेरे लंड को मुहं में लिया और अपने दांतों को मेरे लंड के सुपड़े पर गड़ाने लगी और चूसने लगी और थोड़ी देर ऐसे ही चूसने, चूमने, चाटने के बाद माँ बोली कि बेटा अब और देर मत कर जल्दी से इसे मेरी चूत में डाल दे.. मुझसे अब और रहा नहीं जाता.

मैं समझ गया कि माँ अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है फिर माँ नीचे लेट गयी और माँ ने अपनी दोनों टाँगे फैला ली जिससे माँ की चूत मुझे साफ साफ नज़र आने लगी.. जिस पर काली काली घुंघराली झांटे थी. मैंने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर चूत को खोलकर देखा तो वो अंदर से एकदम गुलाबी थी।

और बहुत कामुक लग रही थी.. फिर मैं दोनों पैरों के बीच में आ गया और अपने लंड को माँ की चूत पर रखा जो बहुत गीली थी और मैंने लंड को चुत की छेद पर निशाने पर रखकर एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरा पूरा लंड एक बार में ही चूत के अंदर चला गया।

लंड माँ की चुत में घुसते ही माँ के मुहं से हल्की सी चीख निकली आन्ह आआआह… फिर थोड़ी देर बाद मैंने ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने शुरू किए तो माँ भी अपने चूतड़ उठा उठाकर अपनी चुत मुझे खुलकर देने लगी और हम दोनों के मुहं से आहह उईईइ की आवाज़े आ रही थी.

फिर 20 मिनट चोदने के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गये और उस रात मैंने माँ को तीन बार और चोदा और उस दिन के बाद मैं और माँ हर रात चुदाई करते है. मेरी माँ ने अब कॉपर-टी लगवा ली है जिससे हमे कोई भी ख़तरा नहीं है और अब हम निडर होकर अपनी चुदाई में लगे रहते है।

माँ को मैं काफी दिनों से चोद रहा था। मैंने चोद चोदकर माँ की चुत को फाड़ कर ढीला कर दिया था। मेरे लंड की जबरदस्त चुदाई से माँ की चुत तार-तार हो चुकी थी। माँ की चुत अब पहले जैसी टाइट नही थी। लगातार चुदने से उनकी चुत की भगोष्ठ (चुत के होंठ) बड़ी हो चुकी थी।

मैं माँ को उनकी चुत फिर से टाइट करवाने के लिए शहर के डॉक्टर के पास ले गया। सर्जरी के बाद माँ की चुत फिर से किसी नई नवेली दुल्हन की तरह टाइट हो गयी थी। अब मुझे उनकी कसी हुई चुत मारने में बहुत मज़ा आता है।

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