तलाक़शुदा बहन की बूर की आग शान्त की।

दोस्तों मैं रमेश एक छोटे से शहर का रहने वाला हूँ। मै एक मिडिल क्लास फैमिली से हूँ। ये कहानी मेरी चुदाई के लिए तड़पती तलाक़शुदा बहन की है।

मेरी बहन की शादी 1 साल पहले ही हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही मेरी बहन और उसके पति के बीच अन बन होने लगी। हमारे बहुत समझाने पर भी उनदोनों के बीच कुछ सही नही हो रहा था।

सभी इन बातों से परेशान थे। पर आखिर में उनदोनों ने अलग होने का फ़ैसला कर लिया। कुछ दिनों बाद मेरी दीदी और उसके पति के बीच तलाक हो गया। मुझे अपनी बड़ी बहन की शादी टूटने से बहुत बुरा लग रहा था।

तलाक के बाद दीदी हमारे घर आ कर रहने लगी। वो मुझसे 8 साल बड़ी थी। घर का माहौल दुःखद हो चुका था। माँ, पापा को भी दुख था। पर वो और कर भी क्या सकते थे। बस अपना दुखः छुपा रहे थे।

इधर दीदी भी चुप रहा करती थी। कभी कभार अकेले कमरे में रोती भी थी। ऐसे ही एक महीना हो गया। घर का माहौल ठीक होने लगा था। पर दीदी की हरकतें थोड़ी अजीब होने लगी थी।

मैं भी काफी बदमाश किस्म का लड़का था। हमेशा लड़कियों को ताड़ता रहता था। औरतों की और लड़कियों की गांड और चुचियों को घूरा करता था। और अकेले में अपने मूसल जैसे लंड को पकड़ हिलाया करता था।

मैं अपने कमरे में नंगा होकर सेक्सी लड़कियों और आंटियों के सपने देखकर मुठ मार करता था। लेकिन अब ये सब बंद हो चुका था। क्योंकि दीदी भी मेरे ही कमरे में दूसरे बिस्तर पर सोती थी।

दीदी अजीब हरकतें कर रही थी। गुम शूम रहा करती थी उनमें चिड़चिड़ापन आने लगा था। सभी से घर मे चिड़चिड़ा कर बात कर रहीं थीं। एक दिन वो किचन में बैठकर खाना बना रही थी। मैं हॉल में बैठकर दीदी को ही देख रहा था।

मैंने देखा दीदी सब्जियों की टोकरी में कुछ ढूंढ रही थी। उनको नही पता था कि मैं उनको देख रहा हूँ। दीदी ने सब्जी की टोकरी में से एक पतली और लंबी बैगन को चुराते हुए। सीधे बॉथरूम में चली गई।

मुझे सब कुछ समझ आ गया था। इतने दिनों से दीदी की बूर की चुदाई नही हुई थी। अब उनके बूर में चुदाई की आग भड़क गई थी। और दीदी अपनी बूर को बैगन से चोदकर सांत करने वाली थी।

आप ये कहानी सेक्सी कहानी पर पढ़ रहे है। दीदी के बारे में ये सब सोचने से मेरे लंड में हलचल होने लगी। दीदी काफी देर बाद बॉथरूम से बाहर आयी। उनका चेहरा थोड़ा खुश लग रहा था। सभी एक साथ खाना खाने बैठ गए।

9 बजे तक हम खाना खाकर अपने कमरे में चले गए। अभी भी मैं दीदी के बारे में ही सोच रहा था। जब दीदी खाना खाने बैठी थी। तब मैं उनकी चुचियों की दरारों को निहार रहा था। एकदम गोरी गोरी चुचियों के उभार उनके ब्लाउज के गले के बाहर से ही दिख रहे थे।

ऐसा पहली बार हो रहा था। कि मैं अपनी दीदी को ऐसी नज़रो से देख रहा था। मुझे अपने आप पे गुस्सा भी आ रहा था। पर मैं कुछ भी करू बार बार दीदी की बूर की तड़प मेरी कल्पना से हट ही नही रही थी।

दीदी थोड़ी देर बाद कमरे में आ गयी। मेरा लंड अभी भी सख़्त होकर खड़ा था। दीदी के कमरे में आते ही मैं दीवार की तरफ मुँह करके सो गया। और अपना हाथ पैंट में डालकर लंड को दबा कर छुपाने की कोशिश करने लगा।

पर मेरा लंड पहले कभी ऐसा नही हुआ था। मेरे लंड की नसें फूल गयी थी। मेरा लंड फूलकर मोटा और लंबा हो गया और दर्द से फटने को तैयार था। मेरे लंड की नसें खींचने लगी थी। और बार बार दीदी की बूर दिमाग में आने लगी थी।

इसी असमंजस में 2 घंटे बीत गए। दीदी भी गहरी नींद में सो चुकी थी। मैं अपने बिस्तर पर लेट कर बस दीदी को देखे जा रहा था। उनकी पीठ मेरी तरफ थी। मैं दीदी की बड़ी गोल गांड को देखकर अपना हाथ पैंट में डालकर पैंट में ही मुट्ठ मार रहा था।

फिर मेरे मन मे आया कि दीदी की गांड को और नजदीक से देखूं फिर मैं उठकर दबे पांव दीदी के पीछे खड़ा हो गया। और अपनी पैंट नीचे करके लंड बाहर निकाला और धीरे धीरे लंड की चमड़ी को आगे पीछे करके लंड हिलाने लगा।

मेरा लंड अब ढीला हो गया था। पर मेरे लंड की मोटाई काम नही हुई थी। मेरा लंड मेरी मुठी में भी नही अट रहा था। सरलशब्द में मेरा लंड किसी दानव की तरह था। फिर मेरी हिम्मत बढ़ी मैंने अपने काँपते हुए हाथ अपनी दीदी की गांड पर रख दी।

दीदी की गांड पर हाथ रखते ही मेरे लंड और पूरे शरीर मे करंट दौड़ गयी। मेरा लंड टाइट हो गया। मुझे अपनी दीदी की गांड को छूकर जो मज़ा आ रहा था। मैं शब्दों में नही बता सकता दीदी अभी भी नींद में सोई थी।

मेरी धड़कने तेज़ हो गयी थी। साथ मे डर भी लग रहा था। पर उस मजे के आगे सब डर निकल गया। फिर मैं हल्के हाथों से दीदी की गांड को साड़ी के ऊपर से ही मसलने और दबाने लगा। मेरे लंड से पानी बाहर आने लगा।

फिर मैंने अपनी उँगलियों को दीदी की गांड के फांकों के बीच में फंसाकर दीदी की दोनों चूतड़ों को मसलने लगा। उनकी गांड बहुत बड़ी थी। क्योंकि मेरी सभी उँगलिया उनके गांड की दरार में पूरी घुस पा रही थी।

अचानक मुझे दीदी की बूर देखने का नशा चढ़ने लगा। पर ये करना मुश्किल था। पर मेरा लंड अलग ही जोश में था। मैंने धीरे धीरे करके उनको सीधा करके पीठ के बल लेटा दिया।

और उनकी टाँगो को सीधा करके फैला दिया। और थोड़ी देर इंतेज़ार करने लगा। और पक्का करने लगा कि दीदी नींद में है या नही। फिर मैं धीरे धीरे दीदी की साड़ी को उठाने लगा। जैसे जैसे उनकी साड़ी ऊपर जाती।

मुझे उनकी गोरी गोरी टाँगे दिखने लगी। अब साड़ी उनकी जांघो तक उठ गई थी। उनकी सुंदर गोरी और भरी भरी जाँघे दिखने लगी।। मैं दीदी की साड़ी को उनकी कमर तक उठा चुका था।

मुझे उनकी नीली चड्डी दिखने लगी। उनकी चड्डी को देख मैं हड़बड़ा गया और तेज़ी से सांसे लेने लगा। मैं उनके बगल में बैठ उनकी चड्डी के अंदर फूली हुई बूर को नज़रों से नापते हुए। अपने लंड को मसलता हुआ कांप रहा था।

तब ही मुझे कुछ अजीब सा देखने को मिला दीदी की चड्डी में से कुछ नुकीली सी उभार दिखी मुझे कुछ समझ नही आया। तो मैंने धीरे से दीदी के टाँगो को घुटनों से मोड़ कर फैला दिया। फिर कुछ देर वैसे ही बैठकर ये पक्का किया कि दीदी अभी भी सोई ही हो।

फिर मैंने अपना हाथ दीदी की चड्डी की नुकीली उभार पर रखा और थोड़ा दबाया तो देखा वो चीज हाथ से दबाने पर दीदी की चड्डी की उभार कम होने लगी और वो चीज दीदी की बूर में घुसने लगी।

फिर मैंने अपनी उंगलियों को दीदी की बूर के पट्टो पर लगाया। और दीदी की चड्डी को उनकी बूर पर से बगल में खिसका दिया। सामने दीदी की बूर का जो नज़ारा था। उसे देख मैं चौक गया और घबराने लगा।

दीदी अपनी बूर में बैगन डालकर सोई हुई थी। जैसे ही उनके बूर पर से चड्डी हटी तो धीरे धीरे उनकी बूर से बैगन बाहर निकलने लगा। उनकी बूर पर हर तरफ बूर का सफेद पानी लगा हुआ था। बैगन जैसे जैसे उनकी बूर से बाहर निकल रहा था।

वैसे वैसे उनकी बूर से और भी सफ़ेद गाढ़ा पानी बाहर आ रहा था। अंत में बैगन का अंतिम हिस्सा भी “फुच्छ” की आवाज से बाहर आकर बिस्तर पर गिर गया। दीदी की बूर की दोनों फैले हुए पट्टे धीरे धीरे करके आपस में चिपक गए।

बैंगन बूर से बाहर निकलते ही दीदी की बूर की छेद फिर से बंद होता हुआ देख मेरा सब्र टूट रहा था। मैं अपनी तलाक़शुदा दीदी की बूर को देख पागल सा हो चुका था। मैंने अपना मुँह दीदी की जाँघों के बीच डाल दिया।

फिर मैंने अपनी जीभ से दीदी की बूर को चाटने लगा। दीदी की बूर से अजीब सी ही मस्त गंध आ रही थी। मैं दीदी की बूर चाटते चाटते सपनों में डूब गया। और उनकी बूर में लंड डालने के सपने देखने लगा।

थोड़ी देर में दीदी की बूर मेरे जीभ से बहे थूक से लबालब हो गयी। उनकी बूर चाटने से चपड़ चपड़ की आवाज आने लगी। मेरे लंड का हाल बेहाल हो चुका था। दीदी अभी भी नींद में ही थी। दीदी की चिकनी बूर में जल्दी से अपना दानव जैसा लंड ड़ालकर उनकी बूर को चोदना चाहता था।

तो मैंने अपनी पैंट उतार कर नंगा हो गया। फिर मैंने दीदी की साड़ी को अच्छे से उठा कर उनकी कमर तक कर दिया। मुझे ये सब करने में डर भी लग रहा था। लेकिन मैंने हिम्मत की मुझे पता था। की दीदी बस लंड की भूखी थी।

एक बार उनको मज़ा आने लगेगा तो उन्हें क्या फर्क पड़ेगा कि किसके लंड से उनकी बूर चुद कर सांत हो रही है। यही सोच कर मैंने उनकी जांघो को पकड़कर और फैला दिया। और उनके पैरों के बीच मे बैठकर अपने लंड को एक दो बार हिलाकर लंड को कड़ा करने लगा।

फिर मैं अपने दोनों हाथों को दीदी के कंधे के अगल बगल रखकर अपनी कमर को दीदी की बूर के ऊपर हवा में कर लिया। फिर मैं उनकी बूर में अपने लंड से निशाना लगाने लगा। इतने में मेरा लंड उनकी बूर से छू गया।

मेरे मुँह से आनंद भारी आआआह निकल गयी। पर मैंने अपना ध्यान उनकी बूर पर टिकाए रखा। और अपना लंड दीदी की बूर के पट्टों पर रगड़ते हुए उनकी बूर की छेद को लंड से ढूंढने लगा। आप ये कहानी सेक्सी कहानी पर पढ़ रहे है।

जैसे ही मेरा लंड दीदी की बूर की छेद पर अटका दीदी की नींद खुल गयी। हम दोनों एक दूसरे को देख रहे थे। दीदी बड़े अजीब नज़रो से मुझे और अपनी बूर की तरफ देख रही थी। उनकी आंखें बड़ी बड़ी हो गयी थी।

जैसे ही उनको सब समझ आया तो दीदी ने मेरी कमर को अपनी बूर से दूर धकेलने की कोशिश करने लगी पर मैंने ये नही होने दिया। मेरा लंड तो उनकी बूर की छेद पर ही था। मैंने तुरंत अपनी कमर उनकी बूर पर दबा दिया। देखते ही देखते आसानी से लंड का कुछ हिस्सा दीदी की बूर में घुस गया।

दीदी अ आ आ ऊई ई मा आ….. करने लगी और हल्की आवाज में रोने लगी। लंड का मोटा पिछला हिस्सा अभी भी बूर में नही घुसा था। मैं उनके सीने पर अपना सीना चिपका के दीदी के ऊपर लेट गया। और अपने दोनों हाथों से उनकी टाँगो को ऊपर खींच लिया।

दीदी अभी भी मुझसे चुदवाने को तैयार नही थी। वो मुझे हटाने की कोशिश में लगी थी साथ ही रोये जा रही थी। मैंने तुरंत एक ज़ोरदार धक्का मार दिया मेरा लंड पूरा का पूरा दीदी की बूर में उतर गया। दीदी आईईईईई ईईई दर्द उउउउइई ईईईई हो रहा है! माह हहह आ आ करके रोने लगी।

उनकी आँखों से आँसू बहने लगे वो रोते बिलखते हुए बोली मैं कभी सोच भी नही सकती थी। कि मेरा भाई मेरे साथ संबंध बनाएगा बाबू ये सब गलत हो रहा है छोड़ दो मुझ पर इनसब बातों का कोई असर नही हो रहा था।

वो समझ चुकी थी कि वो कुछ नही कर सकती। कुछ देर बाद वो चुप हो गयी। मैंने धीरे धीरे अपना लंड दीदी की बूर में अंदर बाहर घसीटने लगा। दीदी भी आह ओह्ह उम्म आईईईईई ईईई उईईई दर्द हो रहा है!उनकी आवाज पर मैं और तेज़ी से धक्के मारने लगा। उनका पूरा शरीर ऊपर नीचे हिलने लगा था।

दीदी दर्द से चींख रही थी। माहहहह नहीईईई मुझे लग रहाहहहह मत कर बाबू छोड़ दे। शायद मेरे जीजा का लंड पतला होगा क्योंकि मेरा लंड अभी भी दीदी की बूर में टाइट घुस रहा था। लगातार लंड दीदी की बूर में अंदर बाहर हो रहा था। मैंने झटके तेज़ कर दिए 4 से 5 तेज़ झटकों के बाद दीदी की मुँह से तेज़ आवाज आआआह हहहह उम्मममम निकली।

और दीदी ने मुझे कसकर अपनी बाँहों में जकड़ लिया और मेरी गांड पर अपनी हाथ फिराने लगी। मेरा लंड पूरा चिपचिपे पानी से भर गया दीदी की बूर से ढ़ेर सारा पानी निकला था। मैं समझ गया कि दीदी झड़ चुकी है। दीदी को भी मन भर चुदाई मिल रही थी।

पर मेरा मन अभी सांत नही हुआ था। दीदी भी अब मेरा साथ दे रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए मेरी कानों को चबा रही थी। मैंने दीदी की बूर से अपना लंड निकाल लिया। और दीदी की चड्डी से उनकी बूर को साफ कर दिया।

दीदी को भी मज़ा आने लगा था। क्योंकि जब मैं दीदी की बूर को साफ कर रहा था। तब दीदी भी अपनी ब्लाउज खोलने लगी। मैंने दीदी की बूर साफ करके फिर से अपना लंड उनकी बूर में डाल दिया। दीदी की मुँह से इस्ससस उम्मममहहह ओह्हहह करने लगी।

दीदी ने अपनी ब्लाउज उतार कर अपनी दोनों चुचियों को आजाद कर दिया था। मैं भी उनकी बूर चोदते हुए उनके निप्पलों को अपने होठों से मिस रहा था। दीदी मदहोशी में अजीब सी आन्ह आन्ह उम्महहह… कराह रहीं थीं।

कुछ धक्कों के बाद मैंने तेज़ी से दीदी की बूर में चढ़ाई करने लगा। दीदी आराम से मोटे लंड से बूर चुदाई का सुख ले रही थी। दीदी अपनी आंखें बंद करके मेरी गांड पर अपनी हाथ फेरते हुए मेरी कमर को अपनी बूर में धकेल रही थी।

मैं अब झड़ने वाला था। तो मैंने अपनी लंड की तेजी बढ़ाई और दीदी की वीर्य से लबलबाई बूर में अपना मोटा तना हुआ लंड दनादन घुसेड़ने लगा। मेरा पानी छूटने वाला था मैंने जैसे ही अपना लंड दीदी की बूर के बाहर निकाला मेरा वीर्य छूट गया।

मेरा सारा वीर्य दीदी की बूर और उनकी झाँटो पर फैल गया। दीदी ने भी मेरा सारा वीर्य अपनी हाथों से अपनी बूर पर मलने लगी। वीर्य से बूर की मालिश करने से उनकी बूर चमकने लगी थी। मैं थककर बगल में लेट गया था।

दीदी बिस्तर से उठकर खड़ी हो गयी और मेरे ढ़ीले मगर मोटे लंड को अभी अपनी लार टपकती हुई जबान और आंखों से मेरे लंड को घूर रही थी। दीदी आहिस्ते से बोली तेरा कितना मोटा है रे!! इस बात पर मैंने हल्की सी मुस्कान दे दी।।

फिर दीदी अपनी साड़ी खोलने लगी। कुछ देर बाद दीदी बिल्कुल नंगी होकर मेरे सामने खड़ी हो गयी। और मेरे पैर के पास बैठकर मेरे लंड को अपने मुँह में डालकर मुझे Blowjob देने लगी। मैं भी लेटे लेटे उनकी चुचियों को मसल रहा था। पहली बार किसी लड़की ने मेरा लंड चूसा था। मेरा लंड फिर तन कर तैयार हो गया।

उनकी नर्म चुचियों को मसलकर और उनके मुँह का स्पर्श अपने लंड पर पा कर मैं फिर जोश में आ गया। मैंने दीदी से कहा दीदी आप एक बार और लेट जाओ फिर से करने का मन कर रहा है। तो दीदी ने कहा तू लेटा रह मैं सब खुद करूँगी।

फिर दीदी ने अपने दोनों पैर मेरी कमर के अगल बगल कर दिए। मेरे लंड को पकड़ कर अपनी बूर में घुसाने लगी। जब मेरा लंड दीदी की बूर की छेद पर सट गया। तो दीदी धीरे धीरे करके मेरे लंड पर बैठने लगी। उनको थोड़ा दर्द हो रहा था।

क्योंकि जब वो मेरे लंड को बूर के अंदर करके बैठ रही थी। तो दीदी की शक्ल अजीब अजीब सी बना रही थी। आखिर में पूरा लंड उनकी बूर में समा गया। फिर दीदी धीरे धीरे अपनी कमर से धक्के देकर मेरा लंड अपनी बूर में घुसवाने लगी।

कुछ देर बाद दीदी जोर जोर से अपनी गांड उछाल कर मेरी कमर पर पटकने लगी। और पूरा का पूरा लंड अपनी बूर में चोदने लगी। पूरे कमरे में ठाप्प ठाप्प ठाप ठाप्प की आवाजें गूंजने लगी। मुझे चोट भी लग रही थी। लेकिन दीदी बस अपनी बूर की आग बुझाने में लगी हुई थी।

दीदी एकदम रंडियों की तरह उछल उछल कर अपनी बूर चोद रही थी। ऐसी गजब की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने दीदी को कहा कि दीदी मैं झड़ने वाला हूँ। पर दीदी ने मेरी बात नही सुनी और लगातार मेरे लंड पर उछल रही थी। मेरे वीर्य दीदी की बूर में ही छूट गया।

दीदी की बूर से मेरा वीर्य बाहर तक टपक रहा था। और लगातार दीदी के उछलने से वीर्य पतला होकर मेरे लंड और उनकी बूर पर फैलने लगा। करीब 20 मिनट और दीदी मेरे लंड के ऊपर उछलती रही आखिर में दीदी भी झड़ गयी।

और मेरे लंड पर बैठे बैठे ही वो मेरे सीने पर सर रखकर लेट गयी। और मेरी निप्पलों को चूमते चाटते हुए बोली आज जो इस कमरे में हैम दोनों के बीच हुआ। वो किसी और को नही मालूम पड़नी चाहिये। मैंने कहा ठीक है दीदी पर क्या आज के बाद ये सब नही होगा हमारे बीच।

दीदी थोड़ी देर चुप रहने के बाद बोली जब तक मैं यहां हूँ। तुझे बूर चोदने के लिए तरसना नही पड़ेगा। बस ये सब सेफ़्टी के साथ करना होगा। और किसी को इस बात की भनक नही लगनी चाहिए। मैं भी दीदी की बात पर राज़ी हो गया। उसके बाद दीदी और मैं एक दूसरे का साथ देने लगे।

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